नई दिल्ली. संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अरे वही देश जहां दुबई जैसा हाईटेक शहर है. इस देश में आजकल दुनियाभर की कंपनियां पैसे लगाने आ रही हैं. यूएई के रेतीले इलाकों में हाईटेक बिल्डिंगों और शहरों का जंगल उग रहा है और इस विकास को देखकर दुनिया हैरान है. हर कोई सोच रहा है कि आखिर वहां ऐसा क्या है जो अमेरिका-यूरोप की दिग्गज कंपनियां भी अरबों रुपये लगाने को तैयार बैठी हैं. विकास की चमक के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर है फ्री जोन. यूएई ने फ्री जोन लागू किया है, जिसने दुनियाभर की कंपनियों को वहां पैसे लगाने के लिए आकर्षित किया है. कहा तो यह भी जा रहा है कि अगर भारत के छोटे शहरों में फ्री जोन व्यवस्था लागू हो जाए तो ये शहर अमेरिका की तरह चमक उठेंगे.
अब तो आपके मन में भी यह कौतुहल जाग गया होगा कि आखिर यह फ्री जोन व्यवस्था है क्या और इसके लागू होने से कैसे विकास की आंधी आ सकती है. दरअसल, फ्री जोन का मतलब किसी देश के खास हिस्से में लागू वह कानून होता है जो उस देश के सामान्य कानून के मुकाबले ज्यादा सरल और सुविधाजनक होता है. फ्री जोन में काम करने वाली कंपनियों को अधिक सुविधा, आयात-निर्यात की विशेष छूट, कस्टम और टैक्स में छूट की जैसी अतिरिक्त सुविधा दी जाती है.
कैसे काम करती है फ्री जोन व्यवस्था
अगर बात यूएई की करें तो वहां अलग-अलग क्षेत्रों और उद्योगों के लिए फ्री जोन की व्यवस्था है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, मीडिया, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, फाइनेंस, हेल्थकेयर और कृषि-तकनीक जैसे सेक्टर शामिल हैं. ऐसे ही मिलाकर कुल 40 सेक्टर हैं. इन सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों को तमाम तरह की छूट और सुविधा दी जाती है. जो भी कंपनी यहां निवेश करने आती है, उसे लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन दिया जाता है. कंपनी को कारोबार की अनुमति के साथ जगह, गोदाम और फैक्ट्री लगाने की व्यवस्था दी जाती है.
देश को क्या फायदा
यूएई में फ्री जोन व्यवस्था लागू होने से वहां बनाए गए उत्पाद निर्यात किए जाते हैं, लेकिन वही प्रोडक्ट घरेलू बाजार में बेचने का अलग नियम लागू होता है. फ्री जोन का सबसे बड़ा फायदा ये है कि यहां काम करने वाली विदेशी कंपनियों को भी पूर्ण स्वामित्व मिलता है. उनके आयात और निर्यात के लिए खास नियम और प्रक्रिया लागू होती हैं. इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को निवास और वर्क परमिट भी मिलता है.
टैक्स लगता है या नहीं
फ्री जोन का मतलब यह नहीं है कि यहां काम करने वाली कंपनियों को टैक्स ही नहीं देना पड़ता है, बल्कि उन्हें टैक्स की छूट दी जाती है. वैसे तो यूएई में कॉरपोरेट टैक्स 9 फीसदी है, लेकिन यहां काम करने वाली कंपनियों को इस टैक्स में छूट मिलती है. कुछ पात्र कंपनियों को शून्य टैक्स का लाभ मिलता है. सरकार सिर्फ टैक्स में छूट ही नहीं देती है, बल्कि पूरा कारोबारी इकोसिस्टम तैयार करती है. फ्री जोन में जमीन, सड़क, पानी, बिजली, इंटरनेट, गोदाम और कनेक्टिविटी बेहतर बनानी होती है.
क्या भारत में है ऐसा मॉडल
अगर किसी देश को फ्री जोन बनाना है तो उसे इन्फ्रा तैयार करने के साथ ही प्रोसेस के लिए सिंगल विंडो प्रशासन की भी व्यवस्था करनी होती है. इसके लिए कंपनी का पंजीकरण, परमिट और अन्य मंजूरियां सिंगल विंडो से देने की व्यवस्था की जाती है. भारत की बात करें तो यहां फ्री जोन जैसा ही एक स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) मॉडल काम कर रहा है. इसके लिए बाकायदा सेज की वेबसाइट भी बनी हुई है. हालांकि, इसे और अपग्रेड करके फ्री जोन बनाया जा सकता है. ऐसा करने से भारत में भी विदेशी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित किया जा सकता है. इसके लिए कई शहरों में फ्री जोन की व्यवस्था करनी होगी. अगर ऐसा होता है तो इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे सहित तमाम सेक्टर को फायदा मिल सकता है.

