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Advanced Tomato Farming Tips: टमाटर की खेती करना चाहते हैं? तो अनुभवी किसान राजीव कुमार सहनी ने कुछ सुझाव दिए हैं. उनके अनुसार टमाटर की उन्नत खेती के लिए सही जुताई बहुत जरूरी है. इसके साथ संतुलित खाद, प्रमाणित बीज और जरूरत के अनुसार सिंचाई जरूरी है. जिससे चार महीने में बंपर पैदावार मिलती है. उनसे जानिए टमाटर की खेती के लिए जरूरी टिप्स.
सीतामढ़ी: टमाटर की व्यावसायिक खेती देश के किसानों के लिए बेहद मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. बशर्ते इसे सही तकनीक और सही प्रबंधन के साथ किया जाए. पिछले 28 वर्षों से टमाटर की खेती से जुड़े अनुभवी किसान राजीव कुमार सहनी ने इस फसल से बंपर पैदावार लेने की पूरी प्रक्रिया और अपने अनुभव साझा किए हैं. उनका मानना है कि टमाटर की बेहतर फसल के लिए सबसे पहली और महत्वपूर्ण कढ़ी खेत की सही तैयारी है. जमीन की अच्छी तरह से निराई और गहरी जुताई करने के बाद मिट्टी की नमी का आकलन किया जाता है. यदि मिट्टी में अत्यधिक नमी हो तो उसे दो-चार दिनों के लिए खुला छोड़ देना चाहिए, ताकि नमी का स्तर सीमित और संतुलित हो सके. इसके बाद ही अगली प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए.
कैसे करें उत्तम बीजों का चयन?
खेत की तैयारी के बाद खाद और उत्तम बीजों का चयन फसल की रीढ़ माना जाता है. किसान राजीव कुमार के अनुसार संतुलित मात्रा में डीएपी, पोटाश, बोरॉन और जाइम जैसी आवश्यक खादों को मिलाकर पूरे खेत में अच्छी तरह से छीटना चाहिए. इसके बाद दोबारा जुताई करके खादों को मिट्टी में पूरी तरह मिला दिया जाता है. वे बताते हैं कि अधिकांश सफल किसान बाजार से सीधे पौधे खरीदने के बजाय अलग-अलग कंपनियों के प्रमाणित बीज खरीदकर अपनी खुद की नर्सरी में पौधे तैयार करते हैं. बीजों की बात करें तो पहले 1080 यूएस नामक वैरायटी को सबसे उत्तम माना जाता था, लेकिन कंपनी के बंद होने के कारण वह अब बाजार में उपलब्ध नहीं है. वर्तमान समय में बाजार के रुझान को देखते हुए ‘राजा’ और ‘नामधारी’ ब्रांड के टमाटर के बीजों की सबसे ज्यादा मांग है और इनकी पैदावार भी बहुत शानदार है.
चार महीने का लगता है समय
टमाटर की फसल को पूरी तरह तैयार होने और बाजार में बिकने लायक बनने में लगभग चार महीने का समय लगता है. नर्सरी से तैयार पौधों को मुख्य खेत में रोपने के लगभग तीन महीने बाद ही पौधों में फूल और फल आने की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो जाती है. चौथे महीने तक फसल पूरी तरह से पककर तैयार हो जाती है. खाद के सही समय पर प्रबंधन की बात करें तो पौधों की रोपाई के करीब 15 दिन बाद दोबारा खाद डालकर पानी का छिड़काव किया जाता है. इसके बाद की पूरी प्रक्रिया पौधों की वृद्धि की स्थिति पर निर्भर करती है.
सिंचाई और अतिरिक्त पोषण के लिए करें ये
सिंचाई और अतिरिक्त पोषण को लेकर किसान राजीव कुमार एक बहुत ही महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सलाह देते हैं. उनका कहना है कि फसल में पानी और खाद का प्रयोग आंख मूंदकर नहीं, बल्कि पूरी तरह से पौधों की जरूरत और मिट्टी की नमी को देखकर ही किया जाना चाहिए. यदि पौधों का विकास सही तरीके से हो रहा है. उन्हें अतिरिक्त खाद की आवश्यकता नहीं है, तो बेवजह खाद डालना पैसे की बर्बादी है. ठीक इसी तरह, पानी भी केवल आवश्यकता होने पर ही देना चाहिए क्योंकि अत्यधिक पानी देने से फसल को फायदा होने के बजाय भारी नुकसान पहुंच सकता है. सूझबूझ के साथ किया गया यही सही प्रबंधन अंततः किसानों को बंपर पैदावार की गारंटी देता है.
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