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Tata Group Row : टाटा समूह में चंद्रशेखरन की तीसरी बार नियुक्ति को लेकर जारी विवाद के बीच एक आंकड़े ने सभी को चौंका दिया है. इसमें कहा गया है कि चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल के दौरान बीते 4 साल में व्हिसलब्लोअर की शिकायतों का आंकड़ा 12 हजार को भी पार कर गया है. इसमें से 80 फीसदी शिकायतें तो सिर्फ तीन साल में ही की गई हैं.
चंद्रशेखरन की तीसरी नियुक्ति के ऐलान के बाद से ही टाटा समूह में विवाद हो रहा है.
नई दिल्ली. टाटा समूह का विवाद सतह पर भले ही कुछ दिनों पहले आया है, लेकिन इसकी शुरुआत 4 साल पहले ही हो चुकी थी. आपको जानकर हैरानी होगी कि टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से अब तक कंपनी के अंदर से करीब 12 हजार शिकायतें की गई हैं. चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल वित्तवर्ष 2022 से शुरू हुआ था और तब से अब तक व्हिसलब्लोअर ने 12 हजार से ज्यादा शिकायतें की हैं. इसमें से 80 फीसदी यानी 9,600 शिकायतें तो सिर्फ 2024 से अब तक की गई हैं. इन शिकायतों से पता चलता है कि टाटा समूह की कंपनियों में अंदरूनी तौर पर चिंताएं किस कदर बढ़ने लगीं थी.
मनीकंट्रोल के आंकड़े बताते हैं कि टाटा समूह के भीतर व्हिसलब्लोअर की शिकायतें खासतौर से बीते तीन साल में काफी ज्यादा बढ़ गई हैं. इस दौरान शिकायतों में करीब 80 फीसदी का उछाल आया है. वित्तवर्ष 2024 से 2026 के बीच इन शिकायतों में काफी उछाल दिखा है. वित्तवर्ष 2026 के दौरान भी 3,500 शिकायतें की गई हैं. समूह की कंपनियों में वित्तवर्ष 2025 में 3,111 शिकायतें की गईं तो वित्तवर्ष 2024 में 2,496 शिकायतें सामने आईं. इसके अलावा वित्तवर्ष 2023 में 1,668 तो 2022 में 1,323 शिकायतें की गई हैं.
क्या है टाटा का आंतरिक नियम
यह आंकड़े बताते हैं कि टाटा समूह की कंपनियों की सालाना रिपोर्ट को उसके डिस्क्लोजर नियमों के तहत जारी की गई है. मनीकंट्रोल ने यह सभी आंकड़े कर्मचारियों, वेंडर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स की शिकायतों के आधार पर तैयार किए हैं. इसमें उन शिकायतों को शामिल नहीं किया गया है, जिसमें बोनस, शेयर अथवा अन्य लाभ वाली चीजों के वितरण को लेकर शिकायत की गई थी. इन आंकड़ों में टाटा समूह की 6 शीर्ष कंपनियों को शामिल किया गया है. इसमें टीसीएस, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा कंज्यूमर्स, टाटा पॉवर और ट्रेंट के आंकड़े शामिल हैं. समूह की अन्य कंपनियों के आंकड़े उतने बड़े नहीं हैं.
क्या है टाटा समूह में मौजूदा विवाद
टाटा समूह के यह खुलासे टाटा संस और नोएल टाटा की अगुवाई वाले टाटा ट्रस्ट के बीच बढ़ते गवर्नेंस विवाद के बीच सामने आए हैं. टाटा संस और टाटा ट्रस्ट समूह की होल्डिंग कंपनियों में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं. विवाद तब शुरू हुआ जब 17 सितंबर को नोएल टाटा के विरोध के बावजूद टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी थी. ट्रस्ट ने बोर्ड के इस फैसले को चुनौती दी है और कहा है कि कंपनी के नियमों के तहत उसके नॉमिनी डायरेक्टर्स की मंजूरी लेना जरूरी होता है जो फिलहाल नहीं दी गई है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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