जो लोग ये कह रहे थे कि नरेंद्र मोदी का तो टाइम खत्म हो गया है. मोदी सरकार तो एक साल में निपट जाएगी. आज उनकी हालत ये हो गई है कि खुद उन्हें उनके ही साथी निपटाने में लगे हैं. यहां राहुल गांधी नरेंद्र मोदी को डिबेट का चैलेंज दे रहे हैं, उधर विपक्ष के अंदर से ही राहुल गांधी को चैलेंज मिल रहा है. इधर राहुल गांधी ये बता रहे हैं कि कैसे नरेंद्र मोदी उनसे डर गए. उधर विपक्ष के अंदर ऐसे नेताओं की लाइन लग गई है जो डंके की चोट पर राहुल गांधी के फेल होने का रिपोर्ट कार्ड खोलकर बैठ गए हैं.
आप सोचिए इधर राहुल गांधी ये माहौल बना रहे हैं कि वोट चोरी हो रही है नहीं तो वो हारते नहीं. नरेंद्र मोदी के साथ पूरा सिस्टम है. ज्ञानेश कुमार है इसलिए नरेंद्र मोदी जीत रहे हैं. और दूसरी तरफ विपक्ष के लोग ही पूरी लिस्ट निकालकर दुनिया को बता रहे हैं कि कांग्रेस तो तब से हार रही है जब ज्ञानेश कुमार दूर दूर कहीं नहीं थे. कांग्रेस तो तब से हार रही है जब EVM भी नहीं था. आज आपको बताएंगे कि राहुल गांधी को कैसे तगड़ा झटका लगा है, कैसे अखिलेश और केजरीवाल के लोगों ने ही राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोलकर नरेंद्र मोदी का काम कर दिया है.
विपक्ष के अंदर शुरू हो गया बड़ा खेल
आप देखिए कि बात हो रही थी कि नरेंद्र मोदी को डिबेट का चैलेंज देने की. बात हो रही थी नरेंद्र मोदी की सरकार गिराने की. मोदी तो कहीं नहीं गए लेकिन ये लोग जरूर एक दूसरे को निपटाने में लग गए हैं. विपक्ष के अंदर बड़ा खेल शुरू हो गया है. अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव की पार्टी के नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया. यानी लड़ाई होनी थी कांग्रेस Vs बीजेपी की लेकिन धमाके हो रहे हैं विपक्ष के खेमे में…
आप देखिए कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस को बीजेपी की B टीम बता रही है. आम आदमी पार्टी के नेता पूरी लिस्ट गिनवा रही है कि कैसे कांग्रेस की मदद से बीजेपी जीतती है. उधर अखिलेश की पार्टी के नेता भी इसमें कूद गए हैं, वो भी कांग्रेस को घेर रहे हैं. कांग्रेस भी पलटवार कर रही है. केजरीवाल को शीशमहल और शराब घोटाले पर घेर रही है. कांग्रेस के नेता तो अरविंद केजरीवाल की तुलना ओवैसी से कर रहे हैं. ये कह रहे हैं कि जैसे ओवैसी बीजेपी की मदद करते हैं, वही काम आम आदमी पार्टी करती है.
यानी विपक्ष के अंदर की जबरदस्त घमासान मचा हुआ है. दो बयान इधर से आ रहे हैं तो पलटकर चार बयान उधर से आ रहे हैं. सबसे ज्यादा मार तो अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी की पार्टी के बीच मची है. पंजाब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आम आदमी पार्टी को बीजेपी की बी टीम बताया था. और ये कहा था कि जहां जहां हम जीतते हैं वहां आम आदमी पार्टी बीजेपी को बचाने के लिए टांग लगा देती है.
कांग्रेस की हार की पूरी लिस्ट ले आई AAP
इस पर आम आदमी पार्टी भड़क गई. आम आदमी पार्टी पूरी लिस्ट ले आई कि कितने राज्यों में कांग्रेस सालों से नहीं हैं. इस लिस्ट को बताकर आम आदमी पार्टी के नेता ये पूछ रहे हैं कि इन राज्यों में तो आम आदमी पार्टी नहीं थी यहां आप दशकों से क्यों हार रहे हैं.
AAP सांसद संजय सिंह ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में 37 साल से कांग्रेस हार रही है, बिहार में 36 साल से कांग्रेस हार रही है, बंगाल में 54 साल से कांग्रेस हार रही है, तमिलनाडु में 59 साल से कांग्रेस हार रही है, मध्य प्रदेश में 23 साल से कांग्रेस हार रही है. बीच में 1.5 साल की सरकार बनाई. महाराष्ट्र में 12 साल से कांग्रेस हार रही है, हरियाणा में 12 साल से कांग्रेस हार रही है, ओडिशा में 26 साल से कांग्रेस हार रही है, आंध्र प्रदेश में 12 साल से कांग्रेस हार रही है, असम में 11 साल से कांग्रेस हार रही है, उत्तराखंड में 10 साल से कांग्रेस हार रही है, गोवा में 14 साल से कांग्रेस हार रही है, सिक्किम में 47 साल से कांग्रेस हार रही है, त्रिपुरा में 38 साल से कांग्रेस हार रही है, मणिपुर में 10 साल से कांग्रेस हार रही है, अरुणाचल प्रदेश में 10 साल से कांग्रेस हार रही है. आप 59 साल पहले से तमिलनाडु में हारते चले आ रहे हैं, 54 साल से बंगाल में हार रहे हैं, 37 साल से उत्तर प्रदेश में हार रहे हैं, 36 साल से बिहार में हार रहे हैं. आम आदमी पार्टी आपको हरवा रही है. अपनी कमियों का मूल्यांकन कीजिए, अपने अंदर झांक कर देखिए.’
कांग्रेस के खिलाफ मैदान में कूद पड़े सपा नेता
इधर आम आदमी पार्टी कांग्रेस की धुलाई कर रही है. उधर अखिलेश यादव के नेता भी इसमें कूद गए हैं, क्योंकि यूपी में सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस और सपा में पहले ही जुबानी जंग हो चुकी है. इसलिए अब मौका देखकर सपा नेता भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की लड़ाई में कांग्रेस की टांग खींचने आ गई है. सपा नेता आईपी सिंह ने संजय सिंह के बयान का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि ‘RSS BJP को कांग्रेस ने ही खाद पानी देकर सींचा है. आज वही लोग लोकतंत्र के लिए खतरा बन गए हैं. उत्तर प्रदेश में चार दशकों से चली आ रही कांग्रेस की जुमलेबाजी चल रही है.’
केजरीवाल और अखिलेश यादव… दोनों की पार्टी के नेता कांग्रेस की क्लास लगा रहे हैं. उधर कांग्रेस भी पीछे नहीं है. कांग्रेस नेताओं ने भी आम आदमी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सोशल मीडिया पर कांग्रेस के नेता संजय सिंह के बयान पर पलटवार कर रहे हैं. कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘संजय जी लाला रामदेव किसके मंच से सलवार-कमीज़ पहन कर भागे थे? किरन बेदी किसके मंच से भाषण दे रही थीं? अरुण जेटली तीसरे दिन ही अन्ना आंदोलन में क्यों पहुंच गए थे? RSS क्यों AAP के आंदोलन में आलू-पूड़ी खिला रहा था? पंजाब में जो सूपड़ा साफ़ होते दिख रहा है, उससे आपकी बौखलाहट चरम पर है. लेकिन इतनी बेसिर-पैर की बातें तो मत कीजिए.’
इसी तरह यूपी में कांग्रेस के इंचार्ज और राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त ने कहा कि संजय भाई, आपके नेता आज़ादी की लड़ाई के लिए नहीं, बल्कि शराब की कथित अवैध नीति और हवाला के पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोपों में जेल गए थे. जिस बीजेपी सरकार ने राहुल गांधी जी को बेघर किया था, उसी सरकार के दौर में आपके नेता ने शीशमहल बनवाया था. केजरीवाल जी की पोल खुल चुकी है.’
कांग्रेस के टारगेट पर केजरीवाल
यानी अब कांग्रेस के टारगेट पर सीधे केजरीवाल आ गए हैं. बात शीशमहल और शराब घोटाले की होने लगी है. आम आदमी पार्टी ने अटैक तेज किए तो कांग्रेस के नेता भी खुलकर मैदान में आ गए हैं. कांग्रेस के नेता आम आदमी पार्टी की तुलना असदुद्दीन ओवैसी से कर रहे हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अतुल पाटिल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘जैसे AIMIM पहले पूरे देश में नहीं लड़ती थी अब पूरे देश में लड़ती है. जीतना मकसद नहीं है, बस मुसलमानों मत विभाजित मकसद रहता है. जिससे भाजपा को जीतने में मदद मिले, वही काम AAP करती है भाजपा के लिए.’
यानी बात अब यहां तक आ गई है कि कांग्रेस के नेता केजरीवाल और ओवैसी को एक जैसे बता रहे हैं. कांग्रेस के नेता इसलिए केजरीवाल की पार्टी से चिढ़ गए, क्योंकि केजरीवाल की पार्टी ने कांग्रेस के धागे खोल दिए हैं. संजय सिंह एक एक कर गिना रहे हैं कि कैसे अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस के विधायकों ने पलटी मार ली और बीजेपी में जा मिले.
संजय सिंह ने कहा, ‘अरुणाचल प्रदेश में 2016 में जनता ने जिताया कांग्रेस पार्टी को, पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी और उसके विधायक भारतीय जनता पार्टी में चले गए बीजेपी की सरकार बनवा दी. 2016 में उत्तराखंड के अंदर 9 कांग्रेस के विधायक भारतीय जनता में चले गए बीजेपी की सरकार बनवा दी. 2017 में गोवा के अंदर 13 कांग्रेस के विधायक बीजेपी में चले गए, बीजेपी की सरकार बनवा दी. 2019 में 13 कांग्रेस के विधायक बीजेपी में चले गए, कर्नाटक के अंदर बीजेपी की सरकार बनवा दी. 2020 में 22 कांग्रेस के विधायक मध्यप्रदेश के अंदर बीजेपी में चले गए, बीजेपी की सरकार बनवा दी. 2022 में फिर गोवा के अंदर 8 विधायक कांग्रेस के टूट के भारतीय जनता पार्टी में चले गए.’
पीएम मोदी को डिबेट का चैलेंज देकर ही खुश राहुल गांधी
इधर ये सब घमासान मचा है, उधर राहुल गांधी इसी में खुश हैं कि उन्होंने पीएम मोदी को डिबेट के लिए चैलेंज कर दिया है. पीएम मोदी भले ही राहुल गांधी के चैलैंज का कोई लोड ना ले. लेकिन राहुल गांधी ऐसा ही दिखा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी तो उनसे डिबेट करने से डर रहे हैं. राहुल गांधी और उनका इकोसिस्टम इसी में खुश हो जाता है कि राहुल गांधी ने डरा दिया. राहुल गांधी ने माहौल बना दिया.
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत कह रही है कि राहुल गांधी ने कहा था कि वो बीजेपी को पागल कर देंगे. और पागल कर भी दिया. सुप्रिया श्रीनेत ऐसे बयान दे रही हैं जैसे राहुल गांधी ने कोई बहुत बड़ा तीर मार लिया हो.
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘राहुल गांधी ने कहा था, BJP को पागल कर देंगे, और असल में कर दिया है. पूरी की पूरी BJP अमित शाह के पीछे-पीछे सड़कों पर चल रही है. मतलब राहुल जी सदन में बोलते हैं तो BJP वाले बौखला जाते हैं. वो सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते हैं तो BJP भी विरोध में प्रदर्शन करने की कोशिश करने लगती है. राहुल जी जब डिबेट के लिए मोदी जी को चैलेंज करते हैं, तो सारी की सारी BJP उछलने-कूदने लगती है. अरे राहुल जी के वीडियो के जवाब में मंत्री जी लोग हारमोनियम बजाने लगते हैं, कोई माइक पकड़कर गाना गाने लगता है. वो एक ट्वीट कर देते हैं, तो पूरी की पूरी BJP की हालत खस्ता हो जाती है और भक्त बेचारे तो बौराए-बौराए घूम रहे हैं कि करें तो करें क्या. कहा था पागल कर देंगे, पागल करके दिखा दिया है. 12 साल बाद सत्ता में बीजेपी सड़कों पर है, समझ ही में नहीं आ रहा है, करें तो करें क्या?’
आप सोचिए कांग्रेस के नेताओं का हाल. वो ये बताने में खुश हैं कि उन्होंने 12 साल बाद बीजेपी नेताओं को सड़क पर लाने पर मजबूर कर दिया .लेकिन सवाल ये है कि इससे हासिल क्या होगा. 12 साल बाद भी आप यही तक पहुंचे हैं. 12 साल बाद भी आप डिबेट, चैलेंज, 10 लाख की भीड़..इन्हीं सब में उलझे हैं. लेकिन जहां चुनाव की बात आती है. कांग्रेस पस्त पड़ जाती है.
आप देखिए कल तक राहुल गांधी ये कह रहे थे कि मोदी सरकार तो एक साल में निपट जाएगी. लेकिन आज उन्होंने कहा कि ये लंबी लड़ाई है. सूत्रों से खबर है कि कांग्रेस नेताओं के साथ मीटिंग में राहुल गांधी ने कहा कि लोगों से जुड़े मुद्दे उठाते रहें. एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहें. यह एक दिन या एक महीने का काम नहीं है. तब तक लड़ते रहें जबतक हम अपने संविधान की पवित्रता को बनाए न रखें. लंबी लड़ाई की बात करने वाले राहुल गांधी दो दिन पहले क्या कह रहे थे वो भी सुन लीजिए.
राहुल गांधी ने कहा, ‘तीन साल में अमित शाह गृहमंत्री ही नहीं होंगे. पता नहीं क्या बात कर रहे हैं. मेरा तो अनुमान है कि एक साल के अंदर ये सरकार निपट जाएगी. राहुल गांधी कभी ये कहते हैं कि एक साल सरकार निपट जाएगी. कभी कहते हैं कि ये लड़ाई 1 साल..2 साल भी चल सकती है. इधर राहुल गांधी चैलेंज चैलेंज खेल रेह हैं. उधर बीजेपी ने राहुल गांधी के सामने नया चैंलेंज रख दिया है.
बीजेपी ने राहुल गांधी के सामने चार सवाल रख दिए हैं.
- पहला सवाल – 2008 बीजिंग दौरा: CCP के साथ गुप्त समझौता किसलिए?
- डोकलाम मुलाकात: सेना के चीन से तनाव के बीच चीनी राजदूत से गुप्त मुलाकात क्यों?
- चीनी फंडिंग: राजीव गांधी फाउंडेशन को करोड़ों का चंदा क्यों मिला?
- विदेश में भारत के खिलाफ बयानबाजी क्यों?
इन चार सवालों पर बीजेपी कह रही है कि हिम्मत है तो डिबेट की टेबल पर आइए और इन चारों सवालों का जवाब दीजिए. बहस अपने आप हो जाएगी! यानी अब डिबेट वाली लड़ाई एक कदम आगे बढ़ गई है. बीजेपी ने राहुल गांधी के सामने 4 सवाल रखकर उन्हें नया चैलेंज दे दिया है.
उधर राहुल गांधी को लगातार जवाब देने वाले गृहमंत्री अमित शाह ने आज भी राहुल गांधी को एक और चुनौती दी. अमित शाह ने आज उत्तराखंड के दौरे पर रहे. उत्तराखंड में चुनाव होने वाले हैं. अमित शाह कह रहे हैं कि तीसरी बार भी उनकी सरकार बनेगी. राहुल गांधी कुछ नहीं कर पाएंगे…
अमित शाह ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि आने वाले चुनावों में तीसरी बार, मेरी बात ध्यान से सुनना, तीसरी बार फिर एक बार भाजपा सरकार बनने वाली है. राहुल जी, आपके पर्यटन से कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला.’

