प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दो तीन हफ्ते में जो एक्शन लिए, उसने देश को बहुत बड़ी साजिश से बचा लिया. क्योंकि आज की डेट में फ्रांस का हाल देख लीजिए, यूरोप का हाल देख लीजिए. वहां पर प्रोटेस्ट के नाम पर खुल्लेआम गदर मचा है. कहीं लूटपाट हो रही है, कहीं आगजनी हो रही है, कहीं पर पुलिस पर अटैक हो रहे हैं. जो हाल यूरोप का हो रहा है. उसकी क्या गारंटी थी कि ये भारत में भी ना होता. और पूरा देश देख चुका था कि जुलाई में जंतर मंतर पार्ट-1 में क्या क्या हुआ था. अगर यही इस बार भी रिपीट होता तो जो तस्वीरें फ्रांस से आ रही है, यूरोप से आ रही हैं, क्या पता वैसी ही तस्वीरें दिल्ली से आ रही होती.
आप देखिए कि जब नरेंद्र मोदी इस बार तगड़े इंतजाम किए थे हैवी सिक्योरिटी डिप्लॉय की थी तो इकोसिस्टम हल्ला मचा रहा था कि इतनी फोर्स क्यों लगा दी. इतनी पुलिस क्यों लगा दी. कोई पूछ रहा था कि क्या ये बॉर्डर है. जो फोर्स लगाई उन्हें तो बॉर्डर पर होना चाहिए. लेकिन अब यूरोप की तस्वीरें देखकर लोगों को समझ आ रहा होगा कि इतने तगड़े इंतजाम क्यों थे. जो टूलकिट यूरोप को जला रही है, वो टूलकिट भारत में एक्टिव हो जाए, ऐसी इच्छा रखने वाले बहुत सारे लोग हमारे देश के अंदर ही हैं.
पीएम मोदी ने देश को बड़ी साजिश से बचा लिया
इसलिए आप देख लीजिए रिजीम चेंज, तख्तापलट, खूनखराबा, बांग्लादेश. ये सब बातें भी हो रही थी. आज हम आपको बताएंगे कि पीएम मोदी ने देश जलाने वाली किस भयानक साजिश से बचा लिया. क्योंकि दूसरों को तो इसकी कोई परवाह नहीं है कि देश में चाहे कुछ भी हो जाए. आप देखिए कि ये कहा जा रहा है कि राहुल गांधी विदेश चले गए हैं. पिछले 15-20 से हो हल्ला हंगामा और गदर मचा रहे राहुल गांधी हॉलीडे मोड में आ गए. उधर कॉकरोच वालों का भी हाल ये है कि अब सिर्फ सोशल मीडिया पर ही छटपटा रहे हैं. कॉकरोच वालों का तो हाल ये हो गया कि ये जेल से बाहर ही नहीं आ रहे हैं. ये सब आपको बताएंगे. आपको ये भी बताएंगे कि इधर राहुल-कॉकरोच-केजरीवाल.. सब देखते रह गए.. उधर PM मोदी की शर्तों पर अमेरिका करेगा डील? इस पर क्या खबर आ गई है लेकिन पहले आप एक ट्रेलर देख लीजिए…
आज की डेट में देश की जनता फ्रांस और यूरोप से आ रही जो भी तस्वीरें देख रही है, उन तस्वीरों से वो सारे डॉट कनेक्ट कर रही है. सारी क्रोनोलॉजी समझ रही है. उन्हें ये समझ में आ रहा है कि प्रोटेस्ट की आड़ में कैसे देश के देश अराजकता की चपेट में आ सकते हैं. इसलिए लोगों को आज समझ में आ रहा है कि नरेंद्र मोदी ने जो इस बार किया था, वो देश को बड़ी साजिश से बचाने वाला काम था. आप याद कीजिए जंतर मंतर पार्ट-1 में क्या हुआ था. और आज की डेट में फ्रांस में क्या हो रहा है. यहां पर भी पथराव हुए थे. जवानों पर अटैक हुए थे. और फ्रांस में भी ठीक यही हो रहा है. जो प्रोटेस्ट स्टूडेंट के नाम पर शुरू हुआ था, एजुकेशन सिस्टम के नाम पर शुरू हुआ था. उसकी आड़ में फ्रांस में क्या हो रहा है. वो पूरी दुनिया देख रही है. अब यही बातें हो रही है कि अगर दिल्ली पुलिस इस बार सख्ती ना दिखाती. इतनी फोर्स ना लगाई जाती तो हो सकता था कि दिल्ली में भी ऐसी तस्वीरें देखने को मिलती. अगर ऐसा होता तो पूरी दुनिया दिल्ली की बात कर रही होती.
हिंसा की टूलकिट एक्टिव
हमारे यहां मोदी विरोधी इकोसिस्टम ये कह रहा था कि इतनी फोर्स क्यों लगा दी. जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट क्यों नहीं होने दे रहे हैं. आप देखिए कि फ्रांस की पुलिस के साथ क्या हो रहा है. वहां पर प्रदर्शनकारी एकदम अनकंट्रोल हो गए हैं. पुलिसवालों को पीट रहे हैं. सड़कों पर खदेड़ रहे हैं. देखिए किस तरह पुलिस को टारगेट किया जा रहा है. पुलिस की गाड़ी पर हमले किए जा रहे हैं. ये मारकर जश्न मना रहे हैं. आतिशबाजी कर रहे हैं. पहले पुलिसवालों पर हमला किया और फिर ये पटाखे फोड़ रहे हैं.
देखिए जो हाथ में आ रहा, उसी से अटैक कर दे रहे हैं. पुलिसवालों पर हेलमेट चला रहे हैं. पत्थर फेंक रहे हैं. देखिए इनमें से ज्यादातर लोगों के चेहरे ढके हुए हैं. सबने मास्क लगा रखा है. इनकी मंशा क्या है. इसी से समझ लीजिए. वहां किस तरह से प्रोटेस्ट के नाम पर दुकानें लूटी जा रही है. किस तरह से आगजनी हो रही है. इसकी एक एक तस्वीर आगे आपको दिखाएंगे. कैसे यूरोप के दूसरे देशों में यही टूलकिट चल रही है.
लेकिन पहले आप देखिए कि जो फ्रांस में हो रहा है, जो यूरोप में हो रहा है, वैसा ही कुछ भारत में करने की साजिश थी. और ये बात अब सरकार के मंत्री खुलकर कह रहे हैं. केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि ‘बांग्लादेश में हुई हिंसक घटना और फ्रांस में जो दंगे, आगजनी और लूटपाट हुईं है. ठीक वैसी ही साजिश भारत के लिए भी रची गई थी. भारत-विरोधी गिरोहों और कुछ राजनेताओं ने मिलकर युवाओं को भड़काने और हमारी सड़कों पर हिंसा फैलाने की योजना बनाई थी. लेकिन इस खतरनाक साजिश रचने वाले भूल गए कि भारत न तो बांग्लादेश हैं और न ही फ्रांस. भारत में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल हो सकता है लेकिन केवल चुनावों के जरिए, सोरोस के जरिए नहीं.’
विदेश यात्रा पर राहुल गांधी
अगर कुछ भारत में भी ऐसा ही होता तो ये लोग नरेंद्र मोदी को कोस रहे होते. मोदी विरोधी इकोसिस्टम को तो फर्क नहीं पड़ता. देश में चाहे कुछ हो जाए इन्हें तो नरेंद्र मोदी को कुर्सी से हटाना है. बाकी किसी बात की परवाह नहीं है.
आप देखिए कि 15-20 दिन से राहुल गांधी इतना हंगामा मचा रहे थे. रोज कहीं धरने पर बैठ जाते थे, कहीं मार्च निकालने चले जाते थे. लेकिन अब खबर आ रही है कि राहुल गांधी तो विदेश निकल गए हैं. बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी विदेश यात्रा पर चले गए हैं. ये वो लोग हैं जो कहते थे कि ज्ञानेश कुमार का जब तक इस्तीफा नहीं होगा, तब तक हिलेंगे नहीं. लेकिन अब सब सन्नाटे में चले गए हैं, क्योंकि इनके कोई पैंतरा इस बार नरेंद्र मोदी ने चलने नहीं दिया.
कॉकरोच पार्टी का भी हाल बेहाल
इधर कॉकरोच पार्टी का भी हाल देख लीजिए. कुछ टाइम तक ये लोग Gyanu its done bro कह रहे थे. अब इनका खुद का बोरिया बिस्तर बंधता दिख रहा है. दो नेता जेल में है, दीपके कहां है ये क्लियर नहीं है. जो जेल के बाहर हैं, वो सिर्फ सोशल मीडिया पर माहौल बना रहे हैं. आप ये देखिए कि जो कॉकरोच वाले पहले किसी को कुछ समझते नहीं थे. बात बात कहते थे कि हमने एजुकेशन मिनिस्टर का इस्तीफा लिया है, हमसे भिड़ना नहीं. जो ये सोचते थे कि भीड़ इकट्ठा करके किसी का भी इस्तीफा अब ले लेंगे. वो अब कह रहे हैं कि ये तो बहुत लंबी लड़ाई है.
दीपके ने कहा, ‘आश्वस्त होने के बाद हम फिर मिलेंगे, बात करेंगे और देखेंगे कि इसे कैसे आगे लेकर जा सकते हैं क्योंकि जो कुछ हमने पिछले दिनों में देखा, गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया जा रहा है, हिरासत में लिया जा रहा है, एक तरीके से डराने की कोशिश की जा रही है लेकिन हम घबराएंगे नहीं ना ही पीछे हटेंगे, ये लंबी लाड़ाई है और उसके हम तैयार हैं पूरी तरह से.’
राहुल गांधी भी कह रहे हैं 2 साल लग जाएंगे. दीपके भी कह रहे हैं कि लंबी लड़ाई है. मतलब इन्हें समझ में आ गया कि सड़क और सोशल मीडिया पर माहौल बनाकर मोदी के खिलाफ इनका कोई प्लान नहीं चलेगा.
अभी जेल में ही रहेंगे सौरव और आशुतोष
आप देखिए कि कॉकरोच वाले जो जेल में है, उनका क्या हाल हो रखा है. सौरव दास और आशुतोष रांका अभी भी तिहाड़ में बंद हैं. पांच दिन की रिमांड आज खत्म हुई थी. जिसके बाद दोनों को SEM के सामने पेश किया. बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष की रिहाई का विरोध किया है. दिल्ली पुलिस ने सौरव औऱ रांका की न्यायिक हिरासत और बढ़ाने की मांग की है, जिसके बाद SEM कोर्ट ने सौरव और रांका की न्यायिक हिरासत 2 दिन बढ़ा दी है.
यानी अभी सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ में ही रहेंगे. और तिहाड़ जेल के अंदर ही दशहरा सेलिब्रेट करेंगे. वहीं कॉकरोच पार्टी इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बता रही है. कॉकरोच पार्टी की लीगल हेडर रत्ना सिंह ने कहा, ‘हमें नहीं पता कि यहां क्या हो रहा है. यह बिल्कुल इंसाफ का गला घोंटने जैसा है. मैं समझती हूं कि कोर्ट को ही आगे आना चाहिए और देखना चाहिए कि यहां क्या हो रहा है. यह SEM कोर्ट और उसके काम करने के तरीके ही सवाल के घेरे में हैं. एक एसीपी (ACP) रैंक के अफसर कैसे न्यायिक हिरासत का फैसला कर सकते हैं? इन सबको चैलेंज किया जा सकता है. ये कैसे मुद्दे से लोगों को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, ये कैसे आम लोगों को जेल भेजने की कोशिस कर रहे हैं. ये ऐसा है जो वो बस करना चाहते हैं.’
सौरव दास और आशुतोष रांका जो कल तक डंके की चोट पर कह रहे थे कि जो उखाड़ना है उखाड़ लो. आज वो कुछ बोल नहीं पा रहे हैं. दो दिन की न्यायिक हिरासत बढ़ने पर दोनों कुछ बोल नहीं पा रहे थे. कॉकरोच पार्टी के नेताओं की मुश्किल अभी और बढ़ सकती है, क्योंकि अब दिल्ली के व्यापारी रोज रोज के प्रोटेस्ट वाले नाटक से परेशान हो गए हैं.
प्रोटेस्ट से हजारों करोड़ का नुकसान
कनॉट प्लेस और जंतर मंतर के आस पास जिनका बिजनेस है. उनको प्रोटेस्ट की वजह से नुकसान हो रहा है. और ये नुकसान लगातार बढ़ रहा है. आप देखिए कि प्रदर्शनों से दीवाली तक 10 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के मुताबिक, अक्टूबर में अब तक 3 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है. इसमें 1800 करौड़ का नुकसान खुदरा व्यापार को हुआ और 600 करोड़ थोक व्यापार को हुआ है. रामलीला मैदान सदर बाजार, चांदनी चौक, खारी बावली, चावड़ी बाजार के करीब है. दीवाली से पहले इन थोक बाजारों में जमकर व्यापार होता है. दिल्ली व्यापार महासंघ ने LG, पुलिस कमिश्नर और MCD को पत्र लिखा है. 29 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच इंडी वालों के कार्यक्रम रद्द करने या जगह बदलने की मांग की है. रामलीला मैदान में 1 नवंबर को इंडी गठबंधन की रैली होने वाली है. व्यापारी इसी के साथ प्रदर्शनों से हुए नुकसान का मुआवजा भी मांग रहे हैं. रेस्टोरेंट एसोसिएशन की तरफ से मुआवजे के लिए याचिका भी दाखिल की गई है.
आप देखिए कि दिल्ली में आम जनता रोज रोज के प्रोटेस्ट से कितना ऊब चुकी है कि अब दशहरे में रावण के साथ कॉकरोच का पुतला भी जलाने की तैयारी की जा रही है. दिल्ली के पीतमपुरा में कॉकरोच का 30 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया गया है. जिसे रावण कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ जलाया जाएगा.
अखिलेश यादव का भी देखिये हाल
राहुल गांधी और कॉकरोच वालों का हाल तो बता दिया. अब देखिए इंडी वालों का क्या हाल है. अखिलेश यादव भी दिल्ली में प्रोटेस्ट के दौरान राहुल गांधी के साथ थे. चुनाव आयोग और SIR के विरोध में बढ़ चढ़ के हिस्सा ले रहे थे. ये अलग बात है कि अखिलेश को दिल्ली में राहुल गांधी ने भाव ही नहीं दिया. अखिलेश के सामने उत्तर प्रदेश की भी चुनौती है. जहां वो फंसे हुए हैं.
अखिलेश यादव PDA वाले नारे को लेकर घूम रहे हैं. लेकिन अब उनका ये दांव भी फेल हो रहा है. आप ये तस्वीर देखिए यूपी के कन्नौज में समाजवादी पार्टी का PDA सम्मेलन था. जिस में यूपी प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल भी शामिल हुए थे. लेकिन इस सम्मेलन में भीड़ ही नहीं आई, कुर्सियां खाली पड़ी रहीं. कन्नौज जो समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है. वहां ये हाल है. इन तस्वीरों ने अखिलेश को भड़का दिया. कहां तो वो यूपी का सीएम बनने का सपना देख रहे हैं. और कहां उनके pDA सम्मेलन में लोग ही नहीं आ रहे हैं. इसी से नाराज हो कर समाजवादी पार्टी ने कन्नौज में पूरी पार्टी कार्यकारिणी को ही भंग कर दिया है.
कॉकरोचों का जो हाल है, उसे देखकर बाहर जो मोदी विरोधी और देश विरोधी ताकतें हैं, उनको आग लगी हुई थी. उन्हें तो लग रहा था कि भारत प्रोटेस्ट में फंस जाएगा और भारत की इकॉनमी को इससे तगड़ी चोट पहुंचेगी. इसीलिए आप देखिए कि यहां पर बड़ी साजिश फेल हुई तो विदेश में बैठे भारत विरोधी कैसे इन लोगों को पंप कर रहे हैं सुनिए आतंकी पन्नू को, उसका एक वीडियो वायरल हो रहा है.
भारत अब रुकेगा नहीं
आप देखिए कि ये लोग भारत के खिलाफ माहौल बना रहे हैं भारत को आर्थिक तौर पर नुकसान पहुंचाना चाह रहे हैं, लेकिन मोदी ऐसा होने नहीं देंगे. भारत अब रुकेगा नहीं. यहां तक कि अमेरिका भी इतना हाथ पैर मारने के बाद भी पीएम मोदी पर शर्तों पर डील करने के लिए संकेत दे रहा है. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस से तेल खरीदने और ट्रेड डील को लेकर कहा, ‘जैसा कि आप जानते हैं, पिछले कुछ महीनों में हमें प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी है. इसकी वजह आपूर्ति, दुनिया भर में कीमतों और दूसरे देशों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना था. मुझे पता है कि अमेरिका में डीजल की कीमतें ज्यादा हैं, लेकिन दुनिया के कई दूसरे देशों में ये कीमतें बहुत ज्यादा हैं. इसलिए हमें इन सभी चीजों को संभालना पड़ता है. हम इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं. हम इसके काफी करीब हैं. इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में प्रतिबंधों से छूट देने और इस तरह के फैसले लेते समय राष्ट्रपति इन बातों को भी ध्यान में रखते हैं.’
पूरा यूरोप सुलग रहा है
भारत को तो पीएम मोदी ने बड़ी साजिश से बचा लिया, लेकिन यूरोप सुलग रहा है. फ्रांस और इटली में तबाही मची हुई है. अल्बानिया और बेल्जियम में प्रोटेस्टर्स ने कई सरकारी दफ्तर और भवन को आग के हवाले कर दिया है. स्पेन में भी प्रटेस्ट हो रहा है. पोलैंड, ग्रीस, पुर्तगाल यूरोप के इन सारे देशों से हिंसक प्रदर्शन और पुलिस के साथ भयानक झड़प की तस्वीरें लगातार आ रही हैं.
फ्रांस में तो लोग अब कहने लगे हैं कि फ्रांस की माइग्रेशन नीतियों और लेफ्टिस्ट लॉबी की वजह से फ्रांस में ये बवाल हो रहा है. फ्रांस में प्रदर्शनकारी किसी को नहीं छोड़ रहे हैं. जमकर लूटपाट कर रहे हैं. पुलिस पर हमला कर रहे हैं. रोड पर प्रदर्शनकारियों का आक्रोश दिख रहा है. आग दिख रही है. सड़कें जल रही हैं. प्रोटेस्टर्स पुलिसवालों को पीट रहे हैं. चारों तरफ एकदम बवाल मचा हुआ है.
इंडिया में भी यही होने वाला था?
और कहा जा रहा है कि यहां भी इंडिया में यही होने वाला था. भयानक हमले की साजिश रही गई थी. पुलिस को भी कई इनपुट मिले थे. प्रदर्शन की आड़ में दिल्ली को दहलाया जा सकता था. जो हाल यूरोप का हो रखा है. वैसा सीन यहां इंडिया में भी बन सकता था. लोग यहां भी तो प्रदर्शन के लिए उतरे थे. एक दिन नहीं कई दिन लगातार. लेकिन सरकार ने ऐसा होने नहीं दिया. इंडिया को यूरोप नहीं नहीं बनने दिया. अब बातें सामने आ रही हैं. नेहा बोरा का बयान. प्रशांत भूषण का बयान. योगेन्द्र यादव ने जो कहा. क्या ये तख्तापलट की तैयारी में थे. क्या ये इंडिया को बांग्लादेश या यूरोप जैसा बनाने वाले थे.
जो प्रोटेस्ट एजुकेशन सिस्टम और स्टूडेंट के नाम पर शुरू हुआ था, उसका फ्रांस में अब हाल क्या है वो देख लीजिए कि ये किसी की सुन नहीं रहे हैं. बेलगाम भीड़ दुकानों को लूट रही है. बड़े-बड़े शोरूम ये साफ कर चुके हैं. लोग डर से दुकान और शोरूम बंद कर चुके हैं. लेकिन ये कांच तोड़कर आउटलेट में घुस जा रहे हैं. फिर जमकर लूटपाट कर रहे हैं. लोग सामान लूटकर भाग रहे हैं. कपड़े लेकर भाग रहे हैं. महंगी-महंगी चीजें लेकर भाग रहे हैं.
फ्रांस के मार्सिले शहर में प्रोटेस्ट की आड़ में लूटपाट मची है. ROLEX से लेकर LOUIS VUITTON जैसे नामचीन ब्रांड के स्टोर को ये लोग टारगेट कर रहे हैं. आईफोन के स्टोर में घुसकर लूटपाट कर रहे हैं. कपड़े, घड़ी, मोबाइल, जूते-चप्पल कुछ नहीं छोड़ा इन्होंने. पल भर में सब गायब. राजधानी पेरिस का हाल तो और बुरा है. सड़कों को चारों ओर आग ही आग दिख रही है. प्रदर्शनकारियों ने प्रोटेस्ट के नाम पर दंगा मचा रखा है.
इटली का भी बुरा हाल
उधर, इटली में भी लगभग यही हाल है. भयंकर बवाल मचा हुआ है. राजधानी रोम से लेकर फाइनेंशियल कैपिटल मिलान तक लूटपाट मची हुई है. महंगाई और युद्ध के खिलाफ शुरू हुआ ये प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया है. ये प्रदर्शनकारी दुकानों के शीशे तोड़ रह हैं. सुपरमार्केट में लूटपाट कर रहे हैं. पुलिस प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए वाटर कैनन के इस्तेमाल कर रही है लेकिन हिंसक प्रदर्शन पर उतर चुकी ये भीड़ पीछे हटने को तैयार नहीं है.
इटली में प्रदर्शनकारी पुलिस पर हमला कर रहे हैं. फ्रांस वाला पैटर्न ही इटली में भी दिख रहा है. पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश करती है तो प्रदर्शनकारी हमला कर देते हैं. पुलिस वाले आंसू गैस के गोले दाग कर किसी तरह प्रदर्शनकारियों को काबू करने की कोशिश कर रहे हैं.
अल्बानिया में आग के हवाले सुप्रीम कोर्ट
फ्रांस और इटली जैसे हालात अल्बानिया में भी दिख रहे हैं. अल्बानिया में तो प्रदर्शनकारियों ने वहां की सुप्रीम कोर्ट को ही आग के हवाले कर दिया है. अल्बानिया की संसद पर हमला किया गया है. वहां कई बैंकों को भी आग के हवाले कर दिया है. अल्बानिया में भी प्रदर्शनकारी पुलिसवालों पर हमला कर रहे हैं. हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ रही है.
ये सारा एक जैसा पैटर्न है, जो यूरोप के अलग अलग देशों में दिख रहा है. छात्रों को युवाओं को भड़का के सड़क पर लाओ और फिर हंगामा करो. अल्बानिया में इस समय यही हो रहा है. चारों तरफ आगजनी दिख रही है. भीड़ कुछ सुनने को तैयार नहीं है.

