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Sushant Sinha Desh Ki Pathshala: चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में चुपके से हेराफेरी की क्या? ज्ञानेश कुमार या कॉकरोच… जेल जाने पर क्या खबर आ गई?

HawkNewsBy HawkNewsOctober 5, 2026No Comments11 Mins Read
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तीन दिन से देश में अलग ही गदर मचा हुआ है. भीड़ इकट्टा करके सड़कों पर माहौल बनाया जा रहा है. प्रोटेस्ट के नाम पर पुलिस से भिड़ंत हो रही है. क्या इंडी वाले, क्या लेफ्ट वाले, क्या कॉकरोच पार्टी वाले, सब पूरी ताकत से जुटे हुए हैं. इंडी वाले तो अपना नया प्लान भी ले आ गए और ये कह रहे हैं कि तीन दिन से जो देखा वो तो सिर्फ ट्रेलर था, असली पिक्चर अभी बाकी है.

आज तो बहुत ही बवाल हो गया. चर्चा इस बात की होने लगी कि गिरफ्तारी किसकी होगी. क्योंकि कॉकरोच पार्टी वाले अलग दावा कर रहे हैं कि उन्हें जेल में लंबा भेजने की तैयारी है. उधर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद इंडी वाले अलग कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार का जेल जाना तय है. लेकिन आखिर जेल कौन जाएगा. ज्ञानेश कुमार या कॉकरोच पार्टी वाले, इस पर क्या खबर आ गई, आज पाठशाला में हम आपको डिटेल में इसके बारे में बताएंगे.

आपको बताएंगे कि सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार पर ऐसा क्या कह दिया कि राहुल गांधी तुरंत बोल पड़े कि अब तो ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार कर लो. आपको फॉर्म-6 में हेराफेरी का पूरा सच भी बताएंगे,क्योंकि राहुल गांधी माहौल बना रहे हैं कि चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 को चुपके से बदल दिया और सुप्रीम कोर्ट में इनका झूठ पकड़ा गया. लेकिन झूठ क्या है और सच क्या है. इसका आज ही दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.

आप देखिए कि इस वक्त क्या गजब का बवाल मचा हुआ है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. दूसरी तरफ प्रोटेस्ट चल रहे हैं. इंडी वाले अलग जुटे हैं. कॉकरोच पार्टी वाले भी लगे हुए हैं. ये लोग चाह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार का फैसला सड़क पर ही हो जाए. इसके लिए कल से इंडी वाले फिर से सड़क पर उतर रहे हैं. राहुल गांधी चाहते हैं कि ज्ञानेश कुमार पर अब कहने सुनने के लिए कुछ बचा नहीं, ज्ञानेश कुमार को तुरंत जेल में डाल दिया जाए. उधर कॉकरोच वाले अलग माहौल बना रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार की जगह उनको जेल में डालने की तैयारी चल रही है.

आप देखिए कि कॉकरोच पार्टी क्या बातें कर रहे हैं. आशुतोष रांका ने लिखा कि अगर सरकार ये सोच रही है कि वो हम पर UAPA, NSA लगाकर हमें सालों तक जेल में भेजकर चुप करवा सकती है तो ऐसा नहीं होगा. अभिजीत दीपके कह रहे हैं कि कितनों को अरेस्ट करोगे अमित शाह, 10 अक्टूबर को पूरा देश आ रहा है.

इनकी गिरफ्तारी का क्या सच है इसके बारे में हम आपको आगे बताएंगे, कैसे ये बात कहकर ये लोग एक्सपोज़ हो गए, लेकिन पहले ज्ञानेश कुमार की बात करते हैं जिनकी गिरफ्तारी को लेकर इंडी और कॉकरोच वाले जी जान से जुटे हुए हैं. आप देखिए कि एक तरफ ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए इंडी और कॉकरोच पार्टी वालों ने पूरा मोर्चा खोला हुआ है. रोज जंतर मंतर पर हल्ला हंगामा हो रहा है. लेकिन दूसरी तरफ इस हंगामे और शोर से दूर. कानून की कसौटी पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो एक्शन की मांग थी. उस मांग में सुप्रीम कोर्ट को दम नहीं दिखा. CJI की बेंच ने ज्ञानेश कुमार पर एक्शन की मांग को खारिज कर दिया है

सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कुछ अर्जियां डाली गई थी. इसमें ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की थी. SIT जांच की मांग की गई थी. चुनाव आयोग के अंदर कथित एकतरफा फैसलों पर रोक की मांग की गई थी. याचिका में यहां तक कह दिया कि अगर ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया तो देश जल उठेगा. ये भी कहा गया कि कोर्ट कुछ कुछ अंतरिम आदेश दें, क्योंकि हर नागरिक अपने मतदान के अधिकार को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि अगर CEC को ही सस्पेंड कर देंगे तो चुनाव आयोग कैसे चलेगा. उधर याचिकाकर्ता का तर्क था कि बाकी दो इलेक्शन कमीश्नर काम संभाल सकते हैं. इस पर कोर्ट ने पूछा कि CEC के निलंबन की स्थिति में कौन चुनाव कौन कराएगा?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में उन 14 कथित आपत्तियों पर भी बात हुई. जिनके बारे में कहा गया था कि ज्ञानेश कुमार ने एकतरफा 14 फैसले किए और दूसरे चुनाव आयुक्तों से पूछा नहीं. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से ये मांग की गई कि जो भी फैसले दोनों चुनाव आयुक्त की मर्जी के बिना हुए हैं उन्हें पलट दिया जाए.

याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ये ऑर्डर दे कि चुनाव आयोग में जो भी फैसला हो वो सर्वसम्मति से हो. इस पर CJI ने कहा कि ये तो कानून में है ही. हम उम्मीद करते हैं कि वो इसे फॉलो कर रहे होंगे. अगर कोई उल्लंघन होगा तो हम उस फैसले को पलट देंगे. कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से, चुनाव आयोग से, ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त को नोटिस देकर जवाब मांगा है. कोर्ट उनके जवाब और बाकी रिकॉर्ड देखकर ये तय करेगा कि वाकई चुनाव आयोग में एकतरफा फैसले हो रहे हैं या सर्व सम्मति से फैसले हो रहे हैं.

यानी सुप्रीम कोर्ट इस मामले में चुनाव आयोग का पक्ष सुनना चाहता है. कोर्ट ने जवाब मांगा है. रिकॉर्ड मांगे हैं. अगर कुछ गड़बड़ होगी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. लेकिन अगर ये साबित हो गया कि सारे फैसले सर्वसम्मति से लिए गए तो फिर इंडी वालों की पूरी पॉलिटिक्स धुआं-धुआं हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट हवाला दिया गया. जिस रिपोर्ट का नाम लेकर राहुल गांधी, पूरा इंडी और कॉकरोच पार्टी वाले बवाल काट रहे हैं. और एक बार फिर से सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं लेकिन आप देखिए कि सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट का ज्यादा लोड नहीं लिया है याचिकाकर्ता की तरफ ये कहा गया कि चुनाव आयोग ने भी अपनी प्रेस रिलीज में अखबार की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया. इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि आप न्यूज पेपर की रिपोर्ट के आधार पर कह रहे हैं. संभव है कि वो पूरी सही हो या आंशिक सही हो. लेकिन कोर्ट सिर्फ अखबार की रिपोर्ट पर भरोसा करते ऑर्डर पास नहीं कर सकता.

इस पूरे मामले में जिस मुद्दे पर सबसे ज्यादा बवाल किया जा रहा है, वो मुद्दा है फॉर्म 6 का. फॉर्म 6 नए वोटर्स को जोड़ने के लिए होता है. ये आरोप लग रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में मनमाने बदलाव कर दिए हैं जो नियम के मुताबिक नहीं हैं.

इस मुद्दे पर आज CJI ने कहा कि फॉर्म 6 में किसी तरह के बदलाव को हमने मंजूरी नहीं दी है. CJI ने कहा कि जब कोर्ट के सामने रिकॉर्ड रखे जाएंगे तो हम ये देखना चाहेंगे कि इसमें किसने बदलाव किया है. CJI सूर्यकांत की इसी टिप्पणी को लेकर अब ये माहौल बना जा रहा है कि कोर्ट में ज्ञानेश कुमार का झूठ पकड़ा गया है. कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया कि ज्ञानेश कुमार एक नंबर का फ्रॉड है. 26 सितंबर को ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसमें कहा गया कि फॉर्म-6 में बदलाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर किया गया. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है किसी भी संशोधित फॉर्म-6 को हमने मंजूरी नहीं दी है’

राहुल गांधी ने कहा कि अब तो बिना शक के ये तय हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किए हैं. ममता बनर्जी की पार्टी की नेता महुआ मोइत्रा कह रही हैं कि इनकी चोरी पकड़ी गई. कॉकरोच पार्टी भी यही माहौल बना रही है कि ज्ञानेश कुमार का टाइम अब पूरा हो गया है.

कॉकरोच पार्टी और बाकी लोग तो ये तक माहौल बनाने लगे कि चुनाव आयोग ने डर के मारे 26 सितंबर की अपनी प्रेस रिलीज तक अपनी वेबसाइट से हटा दी है, जिसमें फॉर्म 6 में बदलाव पर सु्प्रीम कोर्ट की मुहर का दावा है. लेकिन चुनाव आयोग कह रहा है कि प्रेस रिलीज को हटाया नहीं गया है. वो अब भी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद है. फॉर्म 6 के मुद्दे पर कॉकरोच पार्टी वाले ये कह रहे हैं कि अब तो ज्ञानेश कुमार की चोरी पकड़ी गई.

सीजेपी चीफ अभिजीत दीपके ने कहा, ‘तो ज्ञानू (ज्ञानेश कुमार) ने ये किसके कहने पर किया? क्योंकि सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि उन्होंने ऐसी चीज़ को मंजूरी ही नहीं दी. तो साफ़ बात है, ज्ञानू (ज्ञानेश कुमार) पूरी तरह से कॉम्प्रमाइज़ हैं. उन्होंने ये बदलाव अमित शाह और मोदी के कहने पर किया था.’

फॉर्म 6 पर CJI की टिप्पणी के बाद इंडी वाले पूरा माहौल बना रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने तो फॉर्म 6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी तो फिर चुनाव आयोग ने कैसे सुप्रीम कोर्ट का नाम ले लिया है. यानी इन लोगों का कहना है कि ज्ञानेश कुमार तो साफ साफ झूठ बोल रहे हैं लेकिन इसका सच क्या है, ये भी आपको बताता हूं. आप देखिए कि चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को अपनी प्रेस रिलीज में ये कहा था कि The declaration attached to Form 6 for SIR has been upheld by the Hon’ble Supreme Court यानी जो Declaration Form..फॉर्म 6 के साथ अटैच है, उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट भी मंजूरी दे चुका है. इसका मतलब ये है कि चुनाव आयोग ये बता रहा है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उसके साथ एक Declaration Form लगाया गया है. उस फॉर्म को सुप्रीम कोर्ट ने अप्रूव किया है. सुप्रीम कोर्ट ने Declaration Form को लेकर जो फैसला दिया था उसके बारे में भी अभी आपको बताऊंगा.

यानी फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ. बल्कि फॉर्म 6 के साथ एक डेक्लरेशन रखा गया है और वो चीज सुप्रीम कोर्ट ने भी अप्रूव की हुई है. आप देखिए कि चुनाव आयोग की वेबसाइट में फॉर्म 6 भी है और Full Declaration Form अलग से है. अगर फॉर्म 6 में कोई बदलाव हुआ होता तो ये Declaration Form अलग से क्यों होता. फॉर्म 6 के साथ एक Declaration Form जोड़ा गया है. ये Declaration Form भी सिर्फ SIR के दौरान ही इस्तेमाल हुआ. जहां SIR की प्रक्रिया नहीं चल रही, वहां ये Declaration Form भी नहीं देना है.

अब ये Declaration Form क्या होता है वो भी देख लीजिए. ये वो Declaration Form है. चुनाव आयोग ये कह रहा है कि अगर आप नए वोटर हैं जो फॉर्म 6 भरेंगे. उसके साथ चुनाव आयोग ने ये फॉर्म अटैच कर दिया है कि अगर आपके माता पिता या रिश्तेदार का नाम पहले जो SIR हुआ है उसमें आ चुका है तो उनका डिटेल दे दीजिए. और ये वोटर को परेशान करने के लिए नहीं है. बल्कि वोटर का काम आसान करने के लिए है.

क्योंकि अगर आप ने ये Declaration दे दी कि आपके माता पिता का तो पहले के SIR में नाम है तो आपको SIR में फॉर्म-6 के जरिए मांगे गए 11 में से कोई डॉक्यूमेंट देने की जरुरत नहीं पड़ेगी. सिर्फ खुद से जुड़े सामान्य डॉक्यूमेंट देने भर से आपका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा और अगर आपके माता पिता का नाम पुरानी SIR में नहीं है तो आपको बाकी के 11 डॉक्यूमेंट्स में से कोई भी एक लगाकर अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने का विकल्प मौजूद रहेगा, यानी डिक्लरेशन फॉर्म नाम काटने का नहीं बल्कि वोटर के लिए प्रक्रिया और आसान बना देने का माध्यम था.

वोटर लिस्ट को क्लीन रखने के लिए दो तरह के फॉर्म होते हैं. एक होता है फॉर्म 6 और दूसरा होता है फॉर्म 7. फॉर्म 6 तब भरा जाता है जब कोई नया वोटर कहीं पर बनता है. पहली बार वोट बनवाने वाले या फिर किसी जगह से शिफ्ट होकर आए लोग अपना नाम वहां की वोटर लिस्ट में डलवाना चाहते हैं तो इसके लिए फॉर्म 6 भरना पड़ता है. इसमें नाम, उम्र, माता पिता का नाम, जेंडर, आधार जैसी जानकारियां भरनी पड़ती है. इसके अलावा डेट ऑफ बर्थ का प्रूफ देना पड़ता है, एड्रेस प्रूफ देना पड़ता है. डेक्लरेशन देना पड़ता है कि भारत का नागरिक हूं. जब आप फॉर्म भरते हैं तो बीएलओ या ईआरओ आपको एक रसीद दे देता है कि आपने इस फॉर्म को भरा है.

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