दिल्ली देश की राजधानी है. देश यहां से चलता है. देश का सिस्टम यहां से चलता है. लेकिन इसी दिल्ली का सिस्टम ऐसा है कि चलना तो दूर रेंग रहा है बॉस. सरकार किसी की हो, सिस्टम वैसा ही दो कौड़ी का है. कभी बेसमेंट में डूबकर बच्चे मर जाते हैं, कभी कोचिंग सेंटर में आग लगने से बच्चे मर जाते हैं, कभी बिल्डिंग गिरने से बच्चे मर जाते हैं. आप देखिए कि सत्य निकेतन पीजी हादसे को लेकर इतना हो-हल्ला मचा हुआ है. कांग्रेस ने मोर्चा खोला हुआ है. उधर कॉकरोच पार्टी वाले भिड़े पड़े हैं. केजरीवाल भी एक्टिव हो गए हैं. लेकिन आपके, हमारे, आम आदमी के बच्चों की जिन्दगी की कोई कीमत नहीं है बॉस… लिख कर ले लीजिए… ये हो हल्ला कुछ ही दिन का है. क्योंकि सरकार में सब रह चुके हैं. चाहे कांग्रेस हो, चाहे केजरीवाल हो, या फिर आज बीजेपी हो. सबकी सरकारों में दिल्ली का यही हाल रहा है. कोई हादसा होता तो कुछ दिन हो हल्ला होता है फिर सब भूल जाते हैं और अगले हादसे का इंतजार करते हैं.
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे को 30 घंटे से ज्यादा हो गए हैं. अभी का हाल ये है कि मलबा पूरी तरह से क्लियर हो गया है. इस बिल्डिंग का ओनर अरेस्ट हो चुका है. कई अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है. उधर दिल्ली सरकार की मीटिंग हुई है. एलजी की मीटिंग हुई है. जर्जर इमारतों के जांच के आदेश दिए गए हैं. 4 फ्लोर से ऊपर जो भी अवैध निर्माण होगा, उन सब को सील करने को कहा गया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी की भी मीटिंग हुई है. दिल्ली पुलिस कमिश्नर की भी मीटिंग हुई है. यानी ऊपर से नीचे तक सिस्टम में खलबली मची है. हाईकोर्ट ने भी जवाब मांग लिया है.
ये खलबली इसलिए मची है, क्योंकि लोगों में घटना को लेकर बहुत गुस्सा है. जो नई तस्वीरें आ रही हैं हादसे की वो गुस्सा भी बढ़ा रही हैं. शॉकिंग भी हैं और सवालों की संख्या भी बढ़ा रही हैं. आप देखिए कि कैसे बिल्डिंग भरभरा कर गिर गई थी. इस हादसे को लेकर विपक्ष ने मोर्चा खोला हुआ है. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कॉकरोच पार्टी सब इसमें कूद गए हैं और प्रधानमंत्री तक से सवाल किए जा रहे हैं. आरजेडी के सांसद तो पीएम मोदी को लेटर लिख रहे हैं.
आज कांग्रेस और आम आदमी पार्टी वालों ने मोर्चा खोला हुआ है लेकिन सरकार किसी की भी रही हो, सबका यही हाल रहा है. आज देखिए कि जिस बिल्डिंग की बात हो रही है, वो बिल्डिंग सिर्फ 55 गज पर बनी थी. और ये 5-10 साल नहीं 40-50 साल पुरानी है. 55 गज का मकान जो 2 फ्लोर का होना चाहिए था, वहां पर 5 फ्लोर खड़ा कर दिए यानी ग्राउंड फ्लोर+ चार फ्लोर. इतने से भी मन नहीं भरा तो बेसमेंट बनवा दिया. इसी बेसमेंट को बनवाने में इस बिल्डिंग की नींव ऐसी हिली कि बिल्डिंग गिर गई. बेसमेंट में पानी भरने से पिलर कमजोर हो गए थे जिसकी वजह से बिल्डिंग लोड नहीं सह पाई और गिर गई.
सवाल ये है कि 5 फ्लोर रातों रात खड़े नहीं हुए. ये सबको दिख रहा होगा. अवैध तरीके से फ्लोर बनाए जा रहे हैं. अवैध तरीके से बेसमेंट बन रहा है. लेकिन संकट ये है कि जब तक हादसा ना हो जाए, किसी की नींद नहीं टूटती. और ये किसी एक पार्टी की सरकार की बात नहीं है. सरकार किसी भी हो, CM कोई भी हो. दिल्ली में हादसे रुकते नहीं हैं.
दिल्ली अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2022 से जनवरी 2025 के बीच
- करीब 3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने या धंसने की 1,133 घटनाएं हो चुकी हैं
- इन घटनाओं में 98 लोग जान गंवा चुके हैं.
- अप्रैल 2022-23 में बिल्डिंग गिरने या धंसने की 349 घटनाएं हुई थी, 43 की जान गई थी
- 2023-24 में 371 घटनाएं हुई थीं, इन हादसों में 23 लोगों की मौत हुई थी
- 1 अप्रैल 2024 से 27 जनवरी 2025 के बीच 413 घटनाएं हुई, 32 लोगों ने जान गंवाई
ये तीन साल का जो आंकड़ा है, इसमें ढाई साल करीब आम आदमी पार्टी की एमसीडी में सरकार थी. इस दौरान दिल्ली सरकार में भी आम आदमी पार्टी ही थी. दिल्ली में बीजेपी की सरकार बने भी डेढ़ साल हो रहे हैं, लेकिन हादसे नहीं रुके. होटल में आग वाला हादसा कुछ महीने हुआ था. अब बिल्डिंग गिर गई है. सत्य निकेतन वाले हादसे पर अभी जो एक्शन जो दिख रहा है वो ये है कि अधिकारियों को सस्पेंड किया किया. MCD के साउथ जोन के 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. इसमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार हैं. विभाग के बड़े अधिकारियों में शामिल सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह हैं. एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल हैं. अस्सिटेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) सुनील चौहान हैं. जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार को भी सस्पेंड कर दिया गया है.
लेकिन इस सस्पेंशन को लेकर लोग ये कह रहे हैं कि सस्पेंड होने से क्या होगा, इन पर केस होना चाहिए. सस्पेंशन तो कुछ दिन चलेगा फिर उसे हटा देंगे. जब तक अधिकारियों के खिलाफ केस नहीं चलेंगे तब तक ये सब ऐसे ही चलेगा. दूसरी तरफ इस एक्शन को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री अपनी पीठ थपथपा रहे हैं. दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद का दावा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा तगड़ा एक्शन हुआ है. इसके साथ ही आशीष सूद ये भी कह रहे हैं कि उनकी सरकार के सामने डबल चुनौती, डेढ़ साल में सुशासन भी देना है . A टीम, B टीम के 27 साल के सड़े-गले इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्थागत उपेक्षा की विरासत को ठीक भी करना है.
यानी आशीष सूद इस हादसा का दोष कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की पुरानी सरकारों पर डाल रहे हैं. दिल्ली के मंत्री तो अपनी पीठ थपता रहे हैं लेकिन कल से ABVP ने मोर्चा खोला हुआ है. ABVP से जुड़े छात्र MCD कमिश्नर का इस्तीफा मांग रहे हैं. सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार लगातार एक्शन लेने का दावा कर रही है. सीएम रेखा गुप्ता ने सभी विधायकों को कहा कि वो अपने अपने इलाकों में जाएं और देखें कि कोई भी गैरकानूनी इमारत ना बने.
सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में जितनी भी बिल्डिंग्स जिसमें अवैध तरीके से पांचवीं मंजिल बनाई जा रही है वो सब सील होंगी. PG और उसके आस पास की बिल्डिंग की जांच होगीं. विधायकों को कहा गया कि वो अपने इलाको में 17.5 मीटर से ऊपर बिल्डिंग ना बनने दें. जर्जर इमारतों में चल रहे PG और हॉस्टल को भी चेक करें. खासकर मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर , सत्य निकेतन, साकेत जैसे जगहों पर खास नज़र रखी जाएगी.
निर्माणाधीन अवैध निर्माणों की शिकायत करें जनप्रतिनिधि, होगा एक्शन
मुख्यमंत्री ने राजधानी के सांसदों, विधायकों, पार्षदों से आग्रह किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में बनाए जा रहे अवैध निर्माणों की जानकारी प्राप्त करें और इसकी शिकायत संबंधी विभाग को भेजें. उन्होंने कहा कि ऐसे अवैध निर्माणों को तोड़ा जाएगा. निर्माणाधीन अवैध निर्माणों को लेकर सिस्टम बनाया जाएगा ताकि उन पर निगरानी भी रखी जा सके. इस प्रकार की शिकायतों की निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी की जाएगी. मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि केवल घटनास्थल तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि आसपास के सभी संवेदनशील भवनों और पीजी की भी गहन जांच की जाए.
घटनास्थल पर फिर पहुंची सीएम, मजिस्ट्रियल जांच
रविवार को हुई इस घटना के अगले दिन सोमवार सुबह भी मुख्यमंत्री स्वयं एक बार फिर घटनास्थल का दौरा करने पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से बचाव, राहत तथा सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी ली. घटनास्थल के निरीक्षण और प्रारंभिक आकलन के आधार पर मुख्यमंत्री ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुरानी इमारत के बेसमेंट में पानी भरने के कारण उसके पिलर कमजोर होकर गिर गए, जिसके चलते पूरी इमारत ढह गई. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस गंभीर घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसकी जवाबदेही तय की जाएगी और उसके खिलाफ कानून के कठोरतम प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल और व्यापक कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं.
लेकिन विपक्ष ने पूरा मोर्चा खोला हुआ है. आप देखिए कि केजरीवाल ने मोर्चा खोला हुआ है. अरविंद केजरीवाल ने सत्यनिकेतन हादसे पर कहा कि दिल्ली में सरकार की लापरवाही के कारण अब तक कई हादसे हो चुके हैं. सरकार को नींद से जागना होगा. बड़े स्तर पर एक्शन लेकर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है.
उधर कांग्रेस भी सवाल उठा रही है. लेकिन आप देखिए कि कैसा खत्म सिस्टम है कि सरकार किसी की भी हो, हादसे रुकते नहीं. आप याद कीजिए इसी दिल्ली में बेसमेंट में बनी लाइब्रेरी में बच्चे डूब कर मर गए थे. ये 2024 की बात है. तब ये कहा गया था कि आगे सब ठीक हो जाएगा. सारे बेसमेंट को चेक करेंगे लेकिन सत्य निकेतन में जो हादसा हुआ वो इसी बेसमेंट को बनाने के चक्कर में हुआ. बेसमेंट में कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. रिनोवेशन का काम चल रहा था. तभी बिल्डिंग भरभरा कर गिर गई.
आप देखिए कि साल 2022 में सत्य निकेतन इलाके में एक बिल्डिंग गिरने से हादसा हो गया था. तब निर्माणीधीन बिल्डिंग गिर गई थी. उस वक्त बिल्डिंग में PG बनाने का काम चल रहा था. उस वक्त दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार थी. और आज चार साल बाद बीजेपी की सरकार है और उसी इलाके में फिर हादसा हो गया है
आप देखिए कि इस मामले में कैसे हर लेवल पर लापरवाही बरती गई है.
- MCD की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक बेसमेंट में किया गया कंस्ट्रक्शन अवैध था
- नियम के मुताबिक बिल्डिंग में पांचवीं या उससे ज्यादा मंजिल बनाने की इजाजत नहीं थी
- बिल्डिंग निर्माण में Permissible Floor Area Ratio का उल्लंघन किया गया था.
- MCD अधिकारियों के मुताबिक पीजी के पास फायर एनओसी नहीं था.
- शुरुआती जांच में पता चला है कि बिल्डिंग में कोई इमर्जेंसी एक्जिट नहीं था.
सत्य निकेतन हादसे के बाद एक बार फिर से जर्जर इमारतों की ऑडिट की बात हो रही है. सेफ्टी ऑडिट की बात हो रही है. लेकिन इस ऑडिट के नाम पर कैसे मजाक चलता है. उसका हाल आप देख लीजिए. इसी साल MCD ने मॉनसून से पहले जर्जर इमारतों का पता लगाने के लिए एक सर्वे कराया था.
- 32 लाख 55 हजार 909 बिल्डिंग को सर्वे के दायरे में रखा गया
- इसमें से 29 लाख 94 हजार 179 भवनों का निरीक्षण किया गया
- लेकिन इस जांच में MCD को सिर्फ 27 बिल्डिंग ऐसी मिली जिसकी संरचना कमजोर थी
- ऐसी बिल्डिंग को रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया गया
- इसके अलावा 125 बिल्डिंग्स को मरम्मत की श्रेणी में रखा गया है
इस हादसे में जिन 7 लोगों की मौत हुई है. उसमें 5 छात्र हैं, दो मजदूर हैं. 4 लोग अभी भी भर्ती हैं, जिसमें एक की हालत क्रिटिकल है जबकि एक डिस्चार्ज किया गया. हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों में
– एमपी के देवास के रहने वाले अर्पित हैं. वो दिल्ली यूनिवर्सिटी के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था
– एमपी से एक और छात्र अक्षत यादव भी इस हादसे में बच नहीं पाए. वो दिल्ली यूनविर्सिटी के पीजीडीएवी कॉलेज में सेकंड ईयर का छात्र था
– यूपी के औरैया के रहने वाले पवन ने भी इस हादसे में जान गंवा दी. वो दिल्ली के मोतिलाल नेहरू कॉलेज में पढ़ रहा था
– एक अभिषेक नाम का छात्र यूपी के वाराणसी से था. अभिषेक भी मोतिलाल नेहरू कॉलेज में पढ़ रहा था
इस हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित की मां को सुनिए जो बता रही हैं कि वो हादसे की सुबह ही घर से दिल्ली आया था. हादसे से दो घंटे पहले ही वीडियो कॉल पर बात हुई थी. इस हादसे में बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया है. बिल्डिंग उर्मिला गुप्ता के नाम पर थी. और ये भी दावा है कि इलाके में इनका एक और पीजी है उसकी भी जांच कर रही है. इसके अलावा PG ऑपरेटर और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की तलाश चल रही है.
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के पीछे एक बड़ी वजह किराए की लालच है जिसके चक्कर में वहां लोगों ने बिना परमिशन के बड़ी बड़ी बिल्डिंग बनाई हुई हैं. और उस बिल्डिंग में हर फ्लोर पर छोटे छोटे कमरे बना दिए हैं. क्योंकि ये इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास है इसलिए यहां बड़ी संख्या में स्टूडेंट रहते हैं. इन बच्चों से मनमाना किराया वसूला जाता है लेकिन सुरक्षा और सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता है. जिस PG में ये हादसा हुआ. वहां रहने वाले छात्रों से भी किराए के नाम पर लाखों की कमाई की जाती थी. 40 दिन पहले इस PG में कमरा देखने गए एक स्टूडेंट ने बताया कि 6 फ्लोर थे. जिसमें 4 फ्लोर पर Boys PG चल रहा था. हर फ्लोर पर 4 कमरे हैं. एक कमरे में तीन बेड हैं. हर बेड का किराया 12 से लेकर 17 हजार तक है.
अगर आप इस हिसाब से किराए सो होने वाली कमाई देखे तों
- 4 फ्लोर पर PG
- हर फ्लोर पर 4 कमरे
- हर कमरे में करीब 3 बच्चे
- कुल कमरे -16
- कुल बच्चे -48
- औसत रेंट – 15000 रुपये प्रति व्यक्ति
- कुल कमाई – 7,20,000
यानी जितने ज्यादा कमरे और फ्लोर उतनी ज्यादा कमाई. इसी वजह से नियमों को ताक पर रखकर बड़ी ब़ड़ी इमारतें खड़ी की जा रही हैं. बिना वेटिलेशन वाले छोटे छोटे कमरें में छात्र रहने को मजबूर हैं. ऐसे ही UPSC एस्पिरेंट के साथ होता है. 10 बाय 10 के कमरे के लिए उन्हें 12 से 15 हजार रुपये किराया देना पड़ा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हर साल करीब 50 हजार से 1 लाख UPSC एस्पिरेंट तैयारी के लिए दिल्ली आते हैं.
इस मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई. कोर्ट ने PG और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर चिंता जताई. MCD, दिल्ली सरकार दिल्ली यूनिवर्सिटी, NHRC को नोटिस जारी कर सवाल किए हैं, अधिकारियों को 10 दिन में जवाब दाखिल करने को कहा. हाईकोर्ट ने MCD को एक हफ़्ते के अंदर PG और हॉस्टल का ऑडिट करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा, छात्रों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ बिल्डिंग मालिकों की ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भी है. हाई कोर्ट ने कहा कि अगर अधिकारियों ने अपनी कानूनी ज़िम्मेदारियां ठीक से निभाई होतीं, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था. हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से भी छात्रों के लिए उपलब्ध हॉस्टल सुविधा पर जवाब मांगा. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से यह बताने को कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उसकी क्या योजना है. हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों पर एक्शन की भी रिपोर्ट मांगी है.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि इस मामले में MCD के अलावा दिल्ली यूनिवर्सिटी भी जिम्मेदार है. कोर्ट ने कहा कि DU के पास छात्रों के लिए पर्याप्य जरूरी हॉस्टल नहीं हैं. इसलिए छात्र प्राइवेट पीजी में रहने को मजबूर हैं. और अगर आप हालात देखेंगे तो दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास इतने भी हॉस्टल नहीं हैं कि वो 10 प्रतिशत छात्रों को भी हॉस्टल मुहैया कर सके.
दिल्ली यूनिवर्सिटी में कुल छात्र – 2,51,474
DU के हॉस्टल में कितने छात्रों की जगह – सिर्फ 7000
यानी DU के पास सिर्फ 3 प्रतिशत छात्रों को हॉस्टल देने की सुविधा है.

