वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच फॉर्म 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष साफ किया है. चुनाव आयोग के सूत्रों ने सोमवार को कहा कि नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. SIR के दौरान इसके साथ जो घोषणा-पत्र लगाया गया था, वह एक अतिरिक्त दस्तावेज था.
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि फॉर्म 6 अपने मूल वैधानिक स्वरूप में ही है. SIR की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त घोषणा-पत्र को अलग से जोड़ा गया था. आयोग ने यह भी कहा कि बिहार में हुए SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस घोषणापत्र को प्रक्रिया का हिस्सा मान चुका है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर दायर याचिकाओं पर हो रही थी. याचिकाकर्ताओं ने आयोग के कामकाज और उसके फैसलों पर भी सवाल उठाए हैं.
क्या है फॉर्म 6 का विवाद?
फॉर्म 6 नए वोटर्स के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वैधानिक फॉर्म है. SIR के दौरान चुनाव आयोग ने इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा था. इस घोषणापत्र में नए आवेदकों से खुद या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली किसी SIR में होने से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी.
यही अतिरिक्त घोषणापत्र विवाद के केंद्र में आ गया. विपक्षी दलों और कुछ याचिकाकर्ताओं ने इसे नए वोटर्स के लिए अतिरिक्त बाधा बताया, जबकि चुनाव आयोग का कहना रहा कि फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया, बल्कि SIR की विशेष प्रक्रिया के लिए अलग घोषणापत्र जोड़ा गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR को दी थी मंजूरी
इस विवाद के बीच 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में हुए SIR को सर्वसम्मति से बरकरार रखा था. अदालत ने कहा था कि नियमित मतदाता सूची पुनरीक्षण से अलग प्रक्रिया अपनाए जाने मात्र से SIR असंवैधानिक नहीं हो जाता. इसके बाद 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने भी कहा था कि फॉर्म 6 के साथ लगाया गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बरकरार रखा गया है. हालांकि, बाद में फॉर्म 6 को लेकर आयोग के भीतर भी सवाल उठे.
30 सितंबर को EC ने लिया था बड़ा फैसला
चुनाव आयोग ने 30 सितंबर को घोषणा की कि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण फॉर्म 6 से SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणापत्र हटा दिया गया है. जहां SIR अभी चल रहा है, वहां यह घोषणा-पत्र ECINET पोर्टल पर उपलब्ध है. जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां ECINET ऐप, पोर्टल और संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट से भी इसे हटा दिया गया है. ऐसे राज्यों में नए मतदाताओं को अब सिर्फ Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म 6 भरना होगा.
चुनाव आयुक्तों के बीच भी उठा था मुद्दा
सूत्रों के मुताबिक, 26 सितंबर की पूर्ण आयोग की बैठक में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी फॉर्म 6 में SIR से जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र को शामिल किए जाने को लेकर चिंता जताई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों का तर्क था कि वैधानिक फॉर्म 6 में बदलाव करने के लिए मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है. उनका यह भी मानना था कि ऑनलाइन फॉर्म 6 में अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ने से पहली बार वोट डालने वाले युवाओं के लिए परेशानी पैदा हो सकती है. खासकर उन आवेदकों के सामने समस्या आ सकती है जिनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम पिछली मतदाता सूचियों में दर्ज नहीं थे.

