Super El Nino Monsoon Heatwave Effect: मई की शुरुआत में सबको लगने लगा था कि अब क्या अब तो गर्मी का द एंड ही चल रहा है. मगर, प्रकृति कुछ और ही पटकथा लिख रही थी. ये पटकथा भारत से हजारों किलोमीटर दूर लिखी जा रही थी. कहानी दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी तट पर डेवलप होने वाली गर्म हवा एल नीनो की थी. मगर इस साल ये सुपर रूप लेकर आ रही है यानी कि भीषण गर्मी, लू और कमजोर बारिश की 140 सालों की रिकॉर्ड टूटने वाली है. जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘सुपर एल नीनो’ की. मौसम वैज्ञानिकों ने तो अब से ही डराने वाले भविष्यवाणी करने लगे हैं. देश एक बार फिर भीषण गर्मी, जानलेवा लू और कमजोर मानसून के खतरनाक दौर में प्रवेश करने जा रहा है. इस भयानक मौसमी बदलाव की सबसे बड़ी वजह एक समुद्री दैत्य बन सकता है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘सुपर एल नीनो’ (Super El Nino) कहा जाता है.
अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों और दुनिया भर के वैज्ञानिकों की ताजा रिपोर्ट्स ने खतरे की बड़ी घंटी बजा दी है. चेतावनी दी गई है कि साल 2026 में बनने वाला एल नीनो पिछले 140 वर्षों के इतिहास में सबसे ज्यादा ताकतवर और विनाशकारी साबित हो सकता है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी स्पष्ट कर दिया है कि मई से जुलाई 2026 के बीच इस सुपर एल नीनो के पूरी तरह से सक्रिय होने की प्रबल संभावना है.
सुपर एल नीनो विनाशकारी साबित हो सकता है.
क्या बला है यह ‘सुपर एल नीनो’?
आसान भाषा में समझें तो जब प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा गर्म हो जाता है, तो इस मौसमी घटना को एल नीनो कहा जाता है. लेकिन, जब यह तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक ऊपर चला जाए, तो यह एक खूंखार ‘सुपर एल नीनो’ का रूप ले लेता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार प्रशांत महासागर में जो वार्मिंग पैटर्न दिख रहा है, वह पिछले 40 वर्षों में सबसे ज्यादा असामान्य है. इंडोनेशिया और अमेरिका के तटों के पास समुद्र में भारी गर्मी जमा हो गई है, जिसने एक खतरनाक वार्मिंग रिंग बना दी है.
भारत पर क्या होगा इस दैत्य का असर?
इस मौसमी बदलाव का सबसे पहला असर भीषण गर्मी के रूप में दिखेगा. भारतीय मौसम विभाग (IMD) पहले ही कई राज्यों में भयंकर लू का अलर्ट जारी कर चुका है. इसी साल अप्रैल में यूपी के बांदा में पारा 47.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले हफ्तों में सिर्फ दिन ही नहीं, बल्कि रातें भी झुलसाने वाली होंगी. इसके अलावा, IMD के अनुसार इस साल मानसून सामान्य से काफी कमजोर रह सकता है. जहां देश में औसतन 870 मिमी बारिश होती है, वहीं इस बार इसके गिरकर 800 मिमी तक रहने का ही अनुमान है. मानसून के फेल होने का खतरा भी इस बार सामान्य से दोगुना बताया जा रहा है.
खेती और आपकी जेब पर पड़ेगी तगड़ी मार
कमजोर मानसून का सबसे सीधा और विनाशकारी असर भारत की खेती पर पड़ेगा, क्योंकि देश के करीब 60 प्रतिशत किसान आज भी सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर हैं. मानसून कमजोर होने से धान, दाल और गन्ने जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार बुरी तरह घट सकती है. जब बाजार में अनाज कम होगा, तो जाहिर सी बात है कि खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छुएंगी और आम आदमी पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सूखे और लू का सबसे ज्यादा खतरा है.
सूरज की ताप में अभी और तपेगी धरती.
पूरा एशिया झेलेगा तबाही
सुपर एल नीनो का यह कहर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा. इससे ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी भीषण सूखे की आशंका है. मौसम जानकारों का कहना है कि 1997-98 और 2015-16 जैसी मौसमी तबाही दुनिया में एक बार फिर देखने को मिल सकती है.
सुपर एल नीनो क्या होता है?
जब प्रशांत महासागर की सतह का तापमान अपने सामान्य स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ जाता है, तो उस खतरनाक मौसमी स्थिति को ‘सुपर एल नीनो’ कहा जाता है.
सुपर एल नीनो का भारत के मानसून पर क्या असर पड़ेगा?
आईएमडी (IMD) के अनुसार, सुपर एल नीनो के कारण इस साल भारत में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और औसत बारिश 870 मिमी की जगह गिरकर सिर्फ 800 मिमी होने का अनुमान है.
कमजोर मानसून का आम आदमी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
कमजोर मानसून के कारण धान और दाल जैसी फसलों की पैदावार घटेगी, जिससे बाजार में खाद्य पदार्थों की कमी होगी और आम आदमी को भारी महंगाई का सामना करना पड़ेगा.
भारत के किन राज्यों में सूखे और लू का सबसे ज्यादा खतरा है?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भीषण सूखे और लू का सबसे अधिक खतरा मंडरा रहा है.

