नई दिल्ली (Shardendu Tiwari Indian Army Success Story). मल्टीनेशनल कंपनियों में लाखों का सैलरी पैकेज, एयरोस्पेस सेक्टर में करियर और कॉर्पोरेट लाइफ की तमाम सहूलियतें… ज्यादातर युवाओं के लिए सफलता का पैमाना यही होता है. लेकिन जब दिल में देश सेवा का जुनून और सेना की ऑलिव ग्रीन वर्दी पहनने की तड़प हो तो 46 लाख रुपये का सालाना पैकेज भी बहुत छोटा लगने लगता है. लखनऊ के नीलमथा निवासी 27 वर्षीय शारदेंदु तिवारी ने इसी जुनून की गजब मिसाल कायम की है.
46 लाख का पैकेज भी लगने लगा फीका
शारदेंदु तिवारी अमेजन में बतौर क्लाउड इंजीनियर काम कर रहे थे. वहां उनका सालाना पैकेज करीब 46 लाख रुपये था. इसके साथ ही उन्हें ग्लोबल एयरोस्पेस कंपनी ‘एयरबस’ से भी शानदार जॉब ऑफर मिला था. आमतौर पर लोग ऐसे अवसरों को अपने करियर का पीक मानते हैं. लेकिन शारदेंदु के लिए मंजिल यह नहीं थी. उनका मानना है कि आर्मी लाइफ का जो थ्रिल, एडवेंचर और आत्मसंतुष्टि है, उसकी तुलना दुनिया के किसी भी कॉर्पोरेट पैकेज से नहीं हो सकती.
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टेक्निकल एंट्री से बने टेक्नोलॉजी और देश सेवा का पुल
शारदेंदु तिवारी ने भारतीय सेना में ‘टेक्निकल एंट्री रूट’ के जरिए जगह बनाई है. यह सेना की ऐसी खास शाखा है जहां युद्ध की मॉडर्न टेक्नीक्स, साइबर सिक्योरिटी और हाई टेक्नोलॉजी वाले हथियारों को संभालने के लिए इंजीनियरों की जरूरत होती है. इसका मतलब है कि शारदेंदु अपनी कंप्यूटर साइंस की डिग्री का पूरा इस्तेमाल अब भारतीय सेना की साइबर और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने में करेंगे.
ओटीए गया में बने ‘सीनियर अंडर ऑफिसर’
ट्रेनिंग के मैदान पर भी शारदेंदु तिवारी का प्रदर्शन शानदार रहा. ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), गया में उनकी लीडरशिप क्वॉलिटी को देखते हुए उन्हें ‘सीनियर अंडर ऑफिसर’ चुना गया. यह कैडेट्स को मिलने वाला सबसे बड़ा और सम्मानजनक पद होता है. बास्केटबॉल और टेबल टेनिस के शौकीन शारदेंदु कहते हैं कि फील्ड सर्विस का जो रोमांच सेना में मिलता है, वह डेस्क जॉब में कभी नहीं मिल सकता.

