किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन समाप्त होते ही संगठन की कमान पाकिस्तान के हाथों में आ गई है. किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने औपचारिक रूप से पाकिस्तान को एससीओ की अध्यक्षता सौंपने का ऐलान किया. इसके साथ ही पाकिस्तान वर्ष 2026-27 के लिए इस प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठन का अध्यक्ष बन गया है.
अध्यक्षता संभालने के साथ ही पाकिस्तान के सामने अब एससीओ की बैठकों और गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी. अगले एक वर्ष के दौरान संगठन से जुड़े मंत्रीस्तरीय और उच्चस्तरीय कार्यक्रम पाकिस्तान में आयोजित किए जाने की संभावना है. हालांकि, सबसे ज्यादा नजर वर्ष 2027 के एससीओ शिखर सम्मेलन पर रहेगी, जिसका आयोजन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होना है.
यहीं से एक बड़ा कूटनीतिक सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या सितंबर 2027 में होने वाले इस एससीओ सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान जाएंगे? और क्या रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी पहली बार पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं?
बिश्केक से इस्लामाबाद तक पहुंची एससीओ की कमान
बिश्केक शिखर सम्मेलन के बाद किर्गिस्तान ने अपनी अध्यक्षता का कार्यकाल पूरा किया. राष्ट्रपति जापारोव ने कहा कि किर्गिस्तान एससीओ की अध्यक्षता पूरी कर रहा है और उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं.
किर्गिस्तान ने 2025-26 के दौरान ‘एससीओ के 25 साल: स्थायी शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर’ विषय के साथ संगठन की अध्यक्षता की. यह कार्यकाल एससीओ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के लिहाज से भी अहम रहा.
बिश्केक में आयोजित शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने ‘बिश्केक घोषणापत्र’ सहित कुल 28 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए. इनमें क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से लेकर नशा तस्करी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर और सूचना सुरक्षा, ऊर्जा, परिवहन नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का खाका शामिल है.
अब पाकिस्तान की अध्यक्षता में बैठकों का सिलसिला
एससीओ की अध्यक्षता के दौरान पाकिस्तान इस संगठन की विभिन्न बैठकों की मेजबानी करेगा. सदस्य देशों के विदेश मंत्री, सुरक्षा अधिकारी, आर्थिक प्रतिनिधि और अन्य उच्चस्तरीय अधिकारी इन बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं. लेकिन पाकिस्तान की अध्यक्षता का सबसे बड़ा आकर्षण 2027 का वार्षिक एससीओ शिखर सम्मेलन होगा. पाकिस्तान सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजेगा. इसके बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-कौन से शीर्ष नेता व्यक्तिगत रूप से इस्लामाबाद पहुंचते हैं.
क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी?
भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित यात्रा पर पहले से ही अटकलें शुरू हो गई हैं. भारत एससीओ को एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच मानता है और संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है. हालांकि, किसी सदस्य देश में होने वाले एससीओ सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री स्तर पर ही हो, यह जरूरी नहीं है. सरकार परिस्थितियों और कूटनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रतिनिधित्व का स्तर तय कर सकती है.
ऐसे में यह संभावना भी जताई जा रही है कि अगर प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान नहीं जाते हैं तो भारत किसी अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि को सम्मेलन में भेज सकता है. हालांकि, इस बारे में भारत सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है.
पुतिन की पाकिस्तान यात्रा पर भी सवाल
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पाकिस्तान दौरे की संभावना भी 2027 के एससीओ सम्मेलन को लेकर चर्चा में है. पुतिन ने अब तक पाकिस्तान की कोई आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा नहीं की है. हालांकि एससीओ शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय यात्रा से अलग बहुपक्षीय मंच है. इसलिए यदि पुतिन इस्लामाबाद सम्मेलन में भाग लेने का फैसला करते हैं तो यह पाकिस्तान की उनकी पहली यात्रा हो सकती है. रूस और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क बढ़ा है, लेकिन पुतिन की संभावित यात्रा पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
पाकिस्तान की अध्यक्षता पर भारत का रुख क्या?
भारत ने साफ किया है कि पाकिस्तान के अध्यक्ष बनने से एससीओ के प्रति उसकी नीति नहीं बदलेगी. भारत संगठन को एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय संस्था के रूप में देखता है और उसके साथ अपना जुड़ाव जारी रखेगा.
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने कहा, ‘पाकिस्तान एससीओ की अध्यक्षता ग्रहण कर रहा है. भारत एससीओ को एक इकाई, एक महत्वपूर्ण संगठन के रूप में देखता है. जहां तक अलग-अलग देशों के साथ हमारे जुड़ाव का सवाल है, उचित समय पर उचित प्राधिकरण द्वारा निर्णय लिया जाएगा और हमारी भागीदारी उसी के अनुसार तय की जाएगी.’

