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अभी तक भीड़भाड़, बाजार, छोटे-छोटे फ्लैट, हरे-भरे पेड़ और पुराने इलाके के रूप में पहचाने जाने वाले सरोजनि नगर की सूरत अब बदलने वाली है. यहां अब ऊंची-ऊंची इमारतें, मॉडर्न फ्लैट, लैविश ऑफिस स्पेस और हरियाली देखने को मिलेगी. एनबीसीसी अब जल्द यहां कंस्ट्रक्शन काम शुरू करने जा रही है. आइए जानते हैं यहां क्या-क्या बदलने वाला है?
दिल्ली का सरोजनि नगर अगर आपने देखा हो तो अभी भी आपके दिमाग दिल्ली का एक पुराना, भीड़भाड़ भरे बाजार वाला सामान्य इलाका ही आएगा, लेकिन जल्द ही सरोजनि नगर की सूरत बदलने जा रही है. नोएडा और द्वारका एक्सप्रेसवे की तरह यहां भी गगनचुंबी इमारतें देखने को मिलेंगी, लैविश ग्रीन हरियाली और चमकते मॉडर्न ऑफिस स्पेसेज इसे अलग ही रूप देंगे.
दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने NBCC (India) Limited को सरोजिनी नगर की GPRA कॉलोनी के री-डेवलपमेंट के लिए 1,091 पेड़ काटने या उन्हें कहीं और शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है. ऐसे में अब इस इलाके का जल्द ही कायाकल्प होने जा रहा है. यहां बड़ा कंस्ट्रक्शन होने जा रहा है.
यहां से लिफ्ट किए जाने वाले पेड़ों भले ही कहीं और भेज दिया जाएगा लेकिन इस इलाके को और भी हरा-भरा बनाने के निर्देश दिए गए हैं. यहां इन पौधों के 10 गुना पेड़ लगाए जाएंगे. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक पहले इस इलाके में 1,218 पेड़ प्रभावित बताए गए थे लेकिन जांच के बाद अब 1,091 पेड़ हैं जिन्हें गिराया या दूसरी लोकेशन पर भेजा जाएगा.
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सिर्फ सरोजनि नगर ही नहीं बल्कि कुल 7 साइटों का पुनर्विकास होना है. इनमें नेताजी नगर, नौरोजी नगर और सरोजनि नगर का काम NBCC (India) को सौंपा गया है. वहीं CEC यहां पर्याप्त हरियाली बचाए रखने के लिए निगरानी करेगी. सीईसी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक वैधानिक संस्था है.
सरोजिनी नगर और अन्य लोकेशनों का विकास नोएडा की तर्ज पर होगा. यहां पुराने करीब 12,970 फ्लैटों की जगह 21,000 से ज्यादा नए आधुनिक फ्लैट बनाए जाएंगे. ये सभी हाईराइज होंगे. साथ में नया ऑफिस स्पेस और कमर्शियल एरिया भी विकसित होगा. रिंग रोड जैसी जगहों पर कमर्शियल निर्माण से इस प्रोजेक्ट को फंडिंग मिलेगी.
बता दें कि GPRA कॉलोनियां 1940 के दशक की हैं. ये केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बनाई गई थीं. अब पुरानी कम ऊंची इमारतों की जगह घनी और ऊंची इमारतें बनाने की योजना है ताकि दिल्ली के मास्टर प्लान के अनुसार जमीन का बेहतर उपयोग हो सके. इस प्रोजेक्ट में पहले ही सरोजिनी नगर और कस्तूरबा नगर में नए फ्लैट तैयार हो चुके हैं.
NBCC ने इससे पहले नौरोजी नगर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का काम पूरा किया है. न्यू मोती बाग और ईस्ट किडवई नगर में भी इसी तरह का काम हाल ही में पूरा हुआ है. कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी और मोहम्मदनगर सहित पूरे सात कॉलोनियों के इस कार्यक्रम की कुल लागत करीब 32,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
वन विभाग ने यहां हर पेड़ को मैप किया था. उसने छोटे पौधों को भी पेड़ माना था. ऐसे में विकास कार्यों के दौरान कटने वाले पेड़ों के बदले यहां 10 गुना पौधे लगाने होंगे. द्वारका के भारत वंदना पार्क में 10,910 पौधे लगाए जाएंगे और 1,049 पेड़ों का स्थानांतरण भी वहीं होगा. हर पेड़ को जियो-टैगिंग करना, फोटो अपलोड करना और पक्षी घोसलों, गिलहरियों या सांपों के बिलों को परेशान न करना भी शर्तों में शामिल किया गया है.

