India
oi-Smita Mugdha
S
Jaishankar
News:
भारत
के
विदेश
मंत्री
एस.
जयशंकर
ने
भारतीय
कूटनीति
को
रामायण
और
महाभारत
से
जोड़कर
बताया।
उन्होंने
पुणे
के
सिम्बॉयसिस
इंटरनेशनल
यूनिवर्सिटी
के
22वें
दीक्षांत
समारोह
में
बदलती
वैश्विक
राजनीति
और
कूटनीति
पर
विचार
रखे।
उन्होंने
कहा
कि
कृष्ण
और
हनुमान
जी
महान
डिप्लोमेट
थे।
महाभारत
और
रामायण
में
डिप्लोमेसी
के
अहम
सूत्र
छिपे
हैं।
विदेश
मंत्री
ने
इस
दौरान
कहा
कि
दुनिया
में
ताकत
का
संतुलन
अब
पूरी
तरह
बदल
चुका
है।
आज
वैश्विक
मंच
पर
शक्ति
का
कोई
एक
केंद्र
नहीं
रहा।
इस
दौरान
उन्होंने
भारत
के
पड़ोसी
देशों
के
बारे
में
कहा
कि
हमारे
पड़ोसी
देश
आकार
में
बहुत
छोटे
हैं।
ये
सभी
देश
हमसे
किसी
न
किसी
तरह
जुड़े
हैं।

वैश्विक
सत्ता
केंद्रो
में
बदलाव
पर
की
अहम
बात
जयशंकर
ने
कहा
कि
मौजूदा
दौर
में
कई
ऐसे
प्रभावशाली
केंद्र
उभर
चुके
हैं,
जहां
से
आर्थिक
और
राजनीतिक
शक्ति
संचालित
हो
रही
है।
ऐसे
में
चाहे
कोई
देश
कितना
भी
ताकतवर
क्यों
न
हो,
वह
हर
मुद्दे
पर
अपनी
शर्तें
नहीं
थोप
सकता।
उन्होंने
छात्रों
से
कहा
कि
वैश्विक
बदलावों
को
समझने
और
बहु-ध्रुवीय
दुनिया
के
लिए
खुद
को
अभी
से
तैयार
करना
शुरू
करें।
S
Jaishankar
News:
विदेश
मंत्री
ने
दिया
कृष्ण-हनुमान
का
उदाहरण
विदेश
मंत्री
ने
इस
दौरान
सनातन
परंपरा
के
दो
प्रमुख
देवों
के
कूटनीतिक
स्वरूप
पर
बात
की।
उन्होंने
महाभारत
और
रामायण
का
उदाहरण
दिया।
एस
जयशंकर
ने
कहा
कि
आम
तौर
पर
महाभारत
को
शक्ति
और
संघर्ष
की
कथा
माना
जाता
है।
रामायण
की
रणनीति
और
कूटनीतिक
पहलुओं
पर
कम
ध्यान
दिया
जाता
है।
जयशंकर
ने
कहा
कि
जब
उनसे
पूछा
गया
कि
उनके
अनुसार
सबसे
महान
डिप्लोमेट
कौन
हैं,
तो
मेरा
जवाब
था
भगवान
कृष्ण
और
हनुमान।
External
Affairs
Minister
बोले,
‘हनुमान
जी
ने
लंका
में
जुटाई
जानकारी’
उन्होंने
कहा
कि
हनुमान
को
श्रीलंका
केवल
युद्ध
के
लिए
नहीं,
बल्कि
जानकारी
जुटाने,
संवाद
स्थापित
करने
और
मनोबल
बढ़ाने
के
लिए
भेजा
गया
था।
माता
सीता
से
मिलकर
उनका
साहस
बढ़ाना
भी
एक
बड़ी
कूटनीतिक
सफलता
थी।
जयशंकर
ने
कहा
कि
अगर
हम
ऐसे
उदाहरणों
को
दुनिया
के
सामने
नहीं
रखते,
तो
यह
हमारी
संस्कृति
के
साथ
अन्याय
होगा।
‘पड़ोसी
देशों
की
अपनी
राजनीति,
वो
हमसे
आकार
में
छोटे
हैं’
पड़ोसी
देशों
से
भारत
के
संबंधों
पर
बोलते
हुए
विदेश
मंत्री
ने
कहा
कि
भारत
के
अधिकतर
पड़ोसी
देश
आकार
में
छोटे
हैं।
उन्होंने
कहा,
‘हमारे
पड़ोसी
देशों
से
संबंध
बेहद
जटिल
हैं।
उनकी
घरेलू
राजनीति
में
भारत
एक
बड़ा
मुद्दा
बन
जाता
है।
इस
घरेलू
राजनीति
का
असर
हमारे
रिश्तों
में
उतार-चढ़ाव
आता
रहता
है।’
उन्होंने
यूरोप
को
भारत
का
अहम
रणनीतिक
साझेदार
भी
बताया।
विदेश
मंत्री
ने
कोरोना
काल
और
यूक्रेन
संकट
का
उदाहरण
देते
हुए
कहा
कि
भारत
ने
हमेशा
जरूरत
के
समय
अपने
पड़ोसियों
और
मित्र
देशों
की
मदद
की
है।

