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S Jaishankar News: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक संकटों से निपटने के लिए भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच गहरे रणनीतिक सहयोग का आह्वान किया है. उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में कोई भी संघर्ष एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता और इसका सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ता है. जयशंकर ने आर्थिक जोखिम कम करने, सप्लाई चेन को लचीला बनाने और उत्पादन के एकतरफा निर्भरता वाले स्रोतों को खत्म करने पर विशेष जोर दिया.
एस जयशंकर ने खुलकर अपनी बात कही.
नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच गहरे होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों पर जोर देते हुए वैश्विक संकटों से मिलकर निपटने का आह्वान किया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट या संघर्ष केवल अपनी भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसके दूरगामी और अप्रत्याशित प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ते हैं. ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ जैसी लोकतांत्रिक और आर्थिक महाशक्तियों को साझा चुनौतियों से निपटने के लिए अपने सहयोग को नए स्तर पर ले जाना होगा.
आर्थिक निर्भरता और सप्लाई चेन का जोखिम
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सप्लाई चेन का लचीला होना बेहद जरूरी है. इस समय दुनिया कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, तकनीक और सप्लाई चेन जैसी कई ढांचागत और संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है.
• एकतरफा निर्भरता का खतरा: उन्होंने आगाह किया कि उत्पादन के कुछ सीमित या केवल एक ही स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता दुनिया के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है.
• वैकल्पिक स्रोतों का निर्माण: समय की मांग है कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति के नए और विश्वसनीय विकल्प तैयार किए जाएं, ताकि किसी भी संकट के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार न मचे.
• जोखिम कम करना: भारत और उसके वैश्विक साझेदारों को मिलकर आर्थिक जोखिमों को कम करने की दिशा में ठोस नीतियां बनानी होंगी, जिससे तकनीक और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एकाधिकार को रोका जा सके.
वैश्विक संघर्षों का पूरी दुनिया पर पड़ता है सीधा असर
डॉ. एस. जयशंकर ने जियो-पॉलिटिक्स तनावों का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में कोई भी युद्ध या सैन्य संघर्ष स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता. यूक्रेन युद्ध, खाड़ी देश, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रों में बढ़ते तनाव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन संकटों के कारण वैश्विक व्यापार, ईंधन की कीमतें और खाद्य सुरक्षा बुरी तरह प्रभावित होती हैं.
दुनिया के किसी एक कोने में होने वाला संघर्ष दूसरे कोने में बैठे लोगों के जीवन को बदल सकता है. इन संकटों का असर कई बार ऐसे अप्रत्याशित रूपों में सामने आता है जिसकी पहले से कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. इसलिए संकटों के इस दौर में देशों के बीच गहरा राजनीतिक सहयोग और रणनीतिक समन्वय अब सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि अपरिहार्य आवश्यकता बन गया है.
— डॉ. एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
सहयोग और समन्वय ही है आगे का रास्ता
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज के चुनौतीपूर्ण समय में भारत और यूरोपीय संघ जैसे करीबी व विश्वसनीय भागीदारों के बीच रणनीतिक सहयोग न केवल दोनों पक्षों के हित में है बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए भी एक मजबूत स्तंभ साबित होगा. जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करके ही दुनिया को एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य दिया जा सकता है. वैश्विक जोखिमों को कम करने के लिए बहुपक्षीय संवाद और मजबूत आर्थिक साझेदारी ही एकमात्र रास्ता है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…और पढ़ें

