नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत-जापान की साझेदारी आज न सिर्फ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक स्थिरता को मजबूत बना रही है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक विकास में भी अहम योगदान दे रही है. उन्होंने यह बयान दिल्ली पॉलिसी ग्रुप और जापान इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स द्वारा आयोजित इंडिया-जापान इंडो-पैसिफिक फोरम में दिया.
जयशंकर ने कहा कि “फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक” बनाए रखना आज पहले से कहीं ज़्यादा जरूरी है, लेकिन यह अब कहीं ज़्यादा जटिल चुनौती बन चुका है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत और जापान ये दो प्रमुख लोकतांत्रिक देश अब इस क्षेत्र में स्थिरता और विकास के लिए मिलकर नया एजेंडा तय कर रहे हैं.
इंडो-पैसिफिक की आज़ादी जरूरी, लेकिन चुनौती भी बड़ी
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत-जापान साझेदारी बीते दशकों में जितनी मजबूत हुई है, उतनी पहले कभी नहीं थी. उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक स्थिरता और वैश्विक आर्थिक संतुलन दोनों को मजबूती देती है.” जयशंकर ने कहा कि आज का समय “मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक” को बनाए रखने का है, लेकिन अब यह काम सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा, तकनीक और संसाधनों की होड़ से भी जुड़ा है.
मोदी-ताकाइची की बात से खुली नई दिशा
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच फोन पर हुई बातचीत इस बात की गवाही है कि दोनों देश इस रिश्ते को कितनी प्राथमिकता देते हैं. उन्होंने आगे कहा, “भविष्य की दिशा यही है कि भारत-जापान मिलकर अपनी ताकतों का उपयोग करें, सप्लाई चेन को मजबूत बनाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी और स्पेस जैसे क्षेत्रों में निवेश करें.”
इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव बना अहम स्तंभ
भारत के Indo-Pacific Oceans’ Initiative (IPOI) में जापान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. जयशंकर ने बताया कि जापान इस पहल के “Maritime Trade, Transport and Connectivity” वाले स्तंभ का सह-नेतृत्व कर रहा है, जो क्षेत्र में व्यापार और नौवहन सुरक्षा को नई दिशा देगा.
नए साझेदारी प्रोजेक्ट्स: एआई से क्लीन एनर्जी तक
जयशंकर ने भारत-जापान के बीच हाल में शुरू की गई कई नई पहलों का भी जिक्र किया-
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नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप (Next Generation Mobility Partnership)
नई पीढ़ी की परिवहन साझेदारी- यानी भारत और जापान मिलकर स्मार्ट, इलेक्ट्रिक और पर्यावरण-अनुकूल वाहनों पर काम करेंगे- -
इकोनॉमिक सिक्योरिटी इनिशिएटिव (Economic Security Initiative)
आर्थिक सुरक्षा पहल- दोनों देश मिलकर अपनी सप्लाई चेन, व्यापार और तकनीकी निर्भरता को मजबूत करेंगे ताकि किसी संकट में उनकी अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो. -
जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज़्म (Joint Crediting Mechanism)
संयुक्त कार्बन क्रेडिट योजना- भारत और जापान ग्रीन टेक्नोलॉजी और कार्बन उत्सर्जन घटाने की परियोजनाओं में साथ काम करेंगे, ताकि दोनों देशों को पर्यावरण लाभ मिले. -
जॉइंट डिक्लेरेशन ऑन क्लीन हाइड्रोजन एंड अमोनिया (Joint Declaration on Clean Hydrogen and Ammonia)
स्वच्छ हाइड्रोजन और अमोनिया पर संयुक्त घोषणा- दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा (Green Energy) के लिए हाइड्रोजन और अमोनिया को भविष्य के ईंधन के रूप में विकसित करने पर मिलकर काम करेंगे. -
मिनरल रिसोर्सेज एमओयू (Mineral Resources MoU)
खनिज संसाधन समझौता- भारत और जापान महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल आदि के दोहन और उपयोग में सहयोग बढ़ाएंगे।
उन्होंने कहा कि ये पहलें दिखाती हैं कि भारत-जापान का रिश्ता अब सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि एक कम्प्रिहेंसिव विज़न बन चुका है.
‘लोगों से लोगों का रिश्ता’ अब सबसे बड़ा निवेश
एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच अब पीपल-टू-पीपल कनेक्शन को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा, “मानव संसाधन सहयोग और एक्सचेंज के एक्शन प्लान से समाज स्तर पर गहरा जुड़ाव बनेगा.”

