S-400 Missile Uses: पूरी दुनिया में जंग का दौर जारी है. ईरान-अमेरिका, रूस-यूक्रेन, इजरायल-गाजा… पश्चिम जारी जंग को देखते हुए पूरी दुनिया अपनी डिफेंस सिस्टम मजबूत करने में जुटी हुई है. इन सभी जंग के दौर में रूसी मेड एयर डिफेंस सिस्टम S-400 ट्रायम्फ ने अपना जलवा और ताकत का एहसास करा दिया है. ये डिफेंस सिस्टम बॉर्डर पर दुश्मनों के हमलों को नेस्तनाबूद करने के अलावे नेवल बेस पर रक्षा करती है. लेकिन, क्या आपको पता है कि इस डिफेंस सिस्टम का दूसरे सेक्टर में इस्तेमाल हो सकता है? कई ऐसे सेक्टर हैं, जहां कि ये आसमानी ब्रह्मास्त्र रक्षा कर सकता है.
आधुनिक युद्धनीति में हवाई सुरक्षा किसी भी देश की रीढ़ होती है. दुनिया में जब भी सबसे खतरनाक और अचूक एयर डिफेंस सिस्टम की बात आती है, तो रूस में निर्मित ‘S-400 ट्रायम्फ’ सबसे ऊपर दिखता है. ये कोई साधारण मिसाइल नहीं है, बल्कि रडार, कमांड सेंटर और कई तरह की मिसाइलों का एक चलता-फिरता अभेद्य किला है. कई मौके पर ये साबित कर चुका है कि ये किस प्रकार अभेद्य किला है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तो इसने कई बार साबित कर दिया था.
कई सेक्टर्स में एस-400 डिफेंस सिस्टम अचूक रक्षक साबित हो सकता है.
लॉन्ग-रेंज स्ट्रेटेजिक डिफेंस है एस-400
स्वदेशी ‘आकाश’ मिसाइल सिस्टम जहां शॉर्ट से मीडियम रेंज की हवाई सुरक्षा के लिए एक बेहतरीन ढाल है, वहीं S-400 बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र (लॉन्ग-रेंज स्ट्रेटेजिक डिफेंस) को सुरक्षित करने का काम करता है. आइए समझते हैं कि रक्षा और सामरिक दृष्टिकोण से S-400 का इस्तेमाल किन-किन सेक्टर्स (क्षेत्रों) में किया जा सकता है.
सीमा सुरक्षा और ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ सेक्टर
S-400 का सबसे मुख्य इस्तेमाल बॉर्डर या विवादित सीमाओं पर ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ (A2/AD) ज़ोन बनाने के लिए किया जाता है. इसका मतलब है कि दुश्मन के विमानों के लिए एक ऐसा “नो-फ्लाई ज़ोन” तैयार करना, जहां उनका घुसना नामुमकिन हो.
- फाइटर जेट्स का खात्मा: मिग-29 (MiG-29) या सुखोई जैसे फाइटर जेट्स को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करके भले ही उनकी ताकत कितनी भी बढ़ा ली जाए, या दुश्मन के पास F-35 जैसे स्टील्थ (रडार से बचने वाले) लड़ाकू विमान हों, S-400 का ताकतवर रडार उन्हें 400 किलोमीटर दूर से ही ट्रैक कर सकता है.
- AWACS और सपोर्ट एयरक्राफ्ट को रोकने में: दुश्मन की हवाई ताकत केवल फाइटर जेट्स पर निर्भर नहीं होती, बल्कि उन्हें कमांड देने वाले AWACS (हवाई रडार सिस्टम) और रिफ्यूलिंग विमानों पर टिकी होती है. S-400 अपनी सबसे लंबी रेंज की मिसाइल से दुश्मन के इन बड़े और अहम विमानों को सीमा पार करने से पहले ही मार गिराता है.
बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल डिफेंस सेक्टर
आज के दौर में हवाई हमले केवल विमानों से नहीं, बल्कि घातक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से होते हैं.
- आधुनिक मिसाइलों को रोकना: ईरान की ‘खैबर शेकन’ (Kheibar Shekan) जैसी आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलें अपनी तेज गति और रडार को चकमा देने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं. S-400 सिस्टम खास तौर पर ऐसे हाई-स्पीड, ऊंचाई से गिरने वाले लक्ष्यों को इंटरसेप्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
- बहु-स्तरीय सुरक्षा: इस सिस्टम में 4 अलग-अलग रेंज (40 किमी, 120 किमी, 250 किमी और 400 किमी) की मिसाइलें तैनात की जाती हैं. अगर दुश्मन की क्रूज मिसाइल पहली लेयर को पार भी कर ले, तो दूसरी या तीसरी लेयर की मिसाइलें उसे हवा में ही राख कर देती हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तो इसने कई बार साबित कर दिया था.
नौसैन्य नेवल और तटीय ढांचे की सुरक्षा
समुद्री सीमाओं और नौसैनिक बेड़ों की सुरक्षा किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और सामरिक ताकत के लिए बेहद जरूरी है. आधुनिक नेवल इक्विपमेंट और युद्धपोतों को आसमान से होने वाले हमलों का सबसे ज्यादा खतरा रहता है.
- नेवल बेस और बंदरगाहों की रक्षा: S-400 सिस्टम को तटीय इलाकों में तैनात करके देश के प्रमुख नेवल बेस, डॉकयार्ड और समुद्री तटों को दुश्मन के हवाई हमलों और एंटी-शिप मिसाइलों से बचाया जा सकता है.
- कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को कवर देना: किसी बड़े नौसैन्य ऑपरेशन के दौरान, S-400 जमीन से ही समुद्र में मौजूद अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों के ऊपर एक सुरक्षा छतरी (Umbrella) प्रदान कर सकता है.
रणनीतिक और महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा
युद्ध के समय दुश्मन का सबसे पहला लक्ष्य देश की महत्वपूर्ण संपत्तियों को नष्ट करके सरकार और सेना को पंगु बनाना होता है. S-400 का इस्तेमाल इन क्रिटिकल सेक्टर्स को ‘आयरन डोम’ जैसी सुरक्षा देने के लिए होता है.
- परमाणु ऊर्जा संयंत्र: न्यूक्लियर प्लांट्स पर होने वाला कोई भी हवाई हमला पूरे देश के लिए विनाशकारी हो सकता है. S-400 को इन प्लांट्स की सुरक्षा के लिए पहली पंक्ति के तौर पर तैनात किया जाता है.
- राजधानी और कमांड सेंटर: देश की संसद, राष्ट्रपति भवन, सैन्य मुख्यालयों और अहम औद्योगिक शहरों को सुरक्षित रखने के लिए S-400 अचूक है. इसका रडार एक साथ 300 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और 80 लक्ष्यों पर एक साथ मिसाइलें दाग सकता है.
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ड्रोन डिफेंस सेक्टर
- एंटी-जैमिंग क्षमता: जब दुश्मन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) का इस्तेमाल करके रडार को जैम (Jam) करने की कोशिश करता है, तब भी S-400 काम करता रहता है. इसका रडार सिस्टम बहुत ही एडवांस है जो भारी इलेक्ट्रॉनिक हमले के बीच भी अपने लक्ष्य को ढूंढ निकालता है.
- ड्रोन स्वार्म से निपटना: यद्यपि छोटे ड्रोन्स को मार गिराने के लिए S-400 की महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना आर्थिक रूप से सही नहीं है, लेकिन दुश्मन के बड़े कॉम्बैट ड्रोन (UCAV) को नष्ट करने में यह सिस्टम बेजोड़ है.
S-400 सिस्टम का सीमा सुरक्षा में सबसे मुख्य इस्तेमाल क्या है?
सीमाओं पर S-400 का मुख्य इस्तेमाल ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ (A2/AD) ज़ोन बनाने के लिए होता है. यह दुश्मन के विमानों के लिए एक ऐसा ‘नो-फ्लाई जोन’ तैयार करता है, जिससे उनकी सीमा में घुसपैठ करना लगभग नामुमकिन हो जाता है.
S-400 बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से कैसे रक्षा करता है?
यह सिस्टम हाई-स्पीड और ऊंचाई से गिरने वाले लक्ष्यों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें 4 अलग-अलग रेंज (40, 120, 250 और 400 किमी) की मिसाइलें तैनात होती हैं, जो दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही कई लेयर पर नष्ट कर देती हैं.
नौसैन्य सुरक्षा में S-400 की क्या भूमिका होती है?
इसे तटीय इलाकों में तैनात करके देश के प्रमुख नेवल बेस और समुद्री तटों को हवाई हमलों से बचाया जा सकता है. साथ ही, यह समुद्र में मौजूद युद्धपोतों और पनडुब्बियों के ऊपर एक मजबूत सुरक्षा छतरी (Umbrella) प्रदान करता है.
क्या S-400 सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक हमले (Electronic Warfare) का सामना कर सकता है?
बिल्कुल, S-400 में बेहतरीन ‘एंटी-जैमिंग’ क्षमता होती है. जब दुश्मन रडार को जैम करने की कोशिश करता है, तब भी इसका एडवांस रडार सिस्टम भारी इलेक्ट्रॉनिक हमले के बीच भी अपने लक्ष्य को सटीक रूप से ढूंढ निकालता है.

