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Alwar News : अलवर में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है. यह जन्मजात विकृतियों, बीमारियों का निःशुल्क उपचार व महंगी सर्जरी करा रहा है. हाल ही में खैरथल-तिजारा जिले के 5 वर्षीय गौरवित की जन्मजात बीमारी का निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लाखों रुपये की लागत से सफल ऑपरेशन कराया गया. सर्जरी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह, सभी आवश्यक जांच और उपचार का पूरा खर्च सरकार ने वहन किया. आवश्यकता अनुसार परिवहन सहित अन्य अनुमन्य सुविधाएं भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं.
Alwar News: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) अलवर जिले के बच्चों के लिए जीवनदायिनी योजना साबित हो रहा है. इस कार्यक्रम के माध्यम से जन्मजात विकृतियों, गंभीर बीमारियों, पोषण संबंधी समस्याओं और विकास संबंधी विकारों की समय रहते पहचान कर उनका पूरी तरह निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की महंगी सर्जरी भी सरकार के खर्च पर कराई जा रही है.
हाल ही में खैरथल-तिजारा जिले के 5 वर्षीय गौरवित की जन्मजात बीमारी का निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लाखों रुपये की लागत से सफल ऑपरेशन कराया गया. सर्जरी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह, सभी आवश्यक जांच और उपचार का पूरा खर्च सरकार ने वहन किया. आवश्यकता अनुसार परिवहन सहित अन्य अनुमन्य सुविधाएं भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं. इसी प्रकार जिले की दो बालिकाओं, जो जन्म से कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) और कटे तालु (क्लेफ्ट पैलेट) की समस्या से पीड़ित थीं, उनका भी आरबीएसके के माध्यम से निजी विशेषज्ञ अस्पताल में सफल ऑपरेशन कराया गया. सर्जरी के बाद दोनों बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और अब वे सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही हैं. चिकित्सकों के अनुसार समय पर उपचार मिलने से उनके बोलने, खाने और सामाजिक विकास में भी सकारात्मक सुधार होगा.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे के स्वास्थ्य की नियमित जांच कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है. इसके तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जन्मे नवजात शिशुओं, आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों तथा राजकीय एवं राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है.
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उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों में 32 चिन्हित स्वास्थ्य स्थितियों की जांच की जाती है, जिन्हें चार प्रमुख श्रेणियों में रखा गया है. इनमें जन्मजात विकार, पोषण संबंधी कमियां, सामान्य बीमारियां तथा विकास संबंधी विलंब एवं दिव्यांगता शामिल हैं. जन्मजात विकारों में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, डाउन सिंड्रोम, कटे होंठ एवं तालु, क्लब फुट, जन्मजात हृदय रोग, जन्मजात मोतियाबिंद, बहरापन और समयपूर्व जन्मे शिशुओं में रेटिनोपैथी जैसी समस्याओं की जांच की जाती है.
वहीं पोषण संबंधी श्रेणी में गंभीर एनीमिया, विटामिन-ए और विटामिन-डी की कमी, गंभीर कुपोषण तथा घेंघा जैसी स्थितियों की पहचान की जाती है. सामान्य बीमारियों में त्वचा रोग, कान का संक्रमण, रूमेटिक हृदय रोग, श्वसन संबंधी रोग, दांतों की सड़न, मिर्गी, क्षय रोग (टीबी) और कुष्ठ रोग शामिल हैं. इसके अलावा दृष्टि दोष, श्रवण दोष, ऑटिज्म, सीखने में कठिनाई, एडीएचडी, बौद्धिक एवं भाषा विकास में विलंब सहित अन्य विकास संबंधी समस्याओं की भी जांच की जाती है.
यदि स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान किसी बच्चे में बीमारी या विकार पाया जाता है, तो उसे जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) अथवा संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थान में निःशुल्क जांच, उपचार, आवश्यक सर्जरी और फॉलो-अप सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. जिन बच्चों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में इलाज की आवश्यकता होती है, उनकी महंगी सर्जरी भी सरकार के खर्च पर कराई जाती है. इसके साथ ही बच्चे और उसके अभिभावक के आने-जाने, आवश्यकतानुसार ठहरने तथा उपचार से संबंधित सभी खर्च का वहन भी सरकार करती है.
जिला कलेक्टर अतुल प्रकाश ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से समय पर बीमारी की पहचान कर निःशुल्क उपचार और सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और किसी भी पात्र बच्चे को उपचार से वंचित न रहने दें.
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी अभिभावकों से आग्रह किया है कि यदि किसी बच्चे में जन्मजात विकार, शारीरिक या मानसिक विकास में देरी अथवा किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या दिखाई दे, तो वे निकटतम स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र, आशा कार्यकर्ता या आरबीएसके मोबाइल हेल्थ टीम से संपर्क कर बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं. समय पर पहचान और उपचार से बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य प्रदान किया जा सकता है.

