नई दिल्ली. रक्षाबंधन के त्योहार में अब सिर्फ चार दिन शेष बचे हैं. इसके साथ ही दिल्ली सहित देशभर के बाजारों में खरीदारी अपने चरम पर पहुंच गई है. दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली, लक्ष्मी नगर सहित तमाम स्थानीय बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. शाम के समय बाजारों में विशेष रौनक है और व्यापारियों के अनुसार इस साल रक्षाबंधन का उत्साह पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक दिखाई दे रहा है. इस बार की राखियों की डिजाइन भी काफी खास है. माना जा रहा है कि सिर्फ एक ही दिन में पूरे देश में करीब 25 हजार करोड़ का कारोबार हो सकता है.
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि इस साल पारंपरिक राखियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं और भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा तथा ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प से प्रेरित राखियां भी बाजार में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. इन राखियों में खासतौर से ‘विकसित भारत’, ‘मोदी गारंटी’, ‘ब्रह्मोस’, ‘नारी वंदन’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘भारत गौरव’, ‘लखपति दीदी’, ‘नमामि गंगे’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र’ और ‘अमृतकाल’ राखी की मांग लगातार बढ़ रही है.
बच्चों में दिख रहा अलग उत्साह
उन्होंने बताया कि युवाओं और बच्चों में विशेष रूप से ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘विकसित भारत राखी’ को लेकर असाधारण उत्साह देखा जा रहा है. वहीं महिलाओं के बीच ‘नारी वंदन राखी’ और ‘लखपति दीदी राखी’ विशेष लोकप्रिय हो रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं. इसके अलावा देश के विभिन्न क्षेत्रों की कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाली राखियां भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं. इनमें नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, जनजातीय बांस राखी, मुंबई की सिल्क राखी और बिहार की मधुबनी कला राखी प्रमुख हैं. पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ तैयार की गई बीज (सीड) राखियों और प्राकृतिक सामग्री से बनी इको-फ्रेंडली राखियों की मांग भी बाजार में खूब है.
कितना रहेगा इस साल का कारोबार
कैट को देशभर के व्यापारिक संगठनों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, इस साल रक्षाबंधन पर केवल राखियों का कारोबार लगभग 25 हजार करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. अकेले दिल्ली में यह कारोबार 4 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहने की संभावना है. यदि उपहार, मिठाइयों, परिधानों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी वस्तुओं, ड्राई फ्रूट्स, पूजा सामग्री और अन्य त्योहारी उत्पादों को भी शामिल किया जाए तो रक्षाबंधन से संबंधित कुल कारोबार 30 हजार करोड़ से अधिक होने की संभावना है. इस साल बाजार में उपहार पैकेज, चॉकलेट हैम्पर, ड्राई फ्रूट गिफ्ट बॉक्स, हस्तशिल्प उत्पाद, एथनिक परिधान और पारंपरिक मिठाइयों की बिक्री में भी खूब तेजी दिख रही है.
अब बाजार का भी त्योहार बन गया है रक्षाबंधन
खंडेलवाल ने कहा कि रक्षाबंधन का त्योहार अब सिर्फ भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र गौरव का भी उत्सव बन चुका है. स्वदेशी राखियों की बढ़ती मांग से लाखों महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, कुटीर उद्योगों और स्थानीय कारीगरों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है. पीएम मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को अधिक मजबूत बनाने में भी इसकी भूमिका है.

