नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राजनीतिक दबदबे को लेकर नामी चुनावी विश्लेषक और एक्सिस माई इंडिया के चीफ प्रदीप गुप्ता ने बड़ी भविष्यवाणी की है. प्रदीप गुप्ता का मानना है कि देश की सियासत में बीजेपी का यह सुनहरा और मजबूत दौर अभी खत्म होने वाला नहीं है. उनके आकलन के अनुसार, केंद्र और राज्यों की सत्ता पर बीजेपी का यह दबदबा अगले ‘कम से कम 20 साल’ तक लगातार जारी रह सकता है. समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में गुप्ता ने भारतीय राजनीति के इतिहास और भविष्य के समीकरणों को बहुत गहराई से समझाया है. उन्होंने कहा कि भारतीय मतदाता अब बहुत समझदार हो चुका है. वह सिर्फ चुनावी वादों या धर्म के नाम पर नहीं, बल्कि सरकार के परफॉर्मेंस और सुशासन को देखकर अपना कीमती वोट देता है.
प्रदीप गुप्ता ने भारतीय राजनीति के इस दौर की तुलना आजादी के बाद वाले कांग्रेस के उस सुनहरे दौर से की है, जब देश में कांग्रेस को हराना लगभग नामुमकिन माना जाता था. उन्होंने साफ कहा कि भारतीय राजनीति हमेशा एक बड़े और लंबे राजनीतिक चक्र (पॉलिटिकल साइकिल) के हिसाब से आगे बढ़ती है. मौजूदा समय में बीजेपी इसी तरह के एक मजबूत राजनीतिक चक्र के बिल्कुल बीच में खड़ी है. गुप्ता के इस बयान ने देश के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. इस बड़े दावे के पीछे उन्होंने सुशासन, मजबूत संगठन और विपक्ष की कमजोरियों को मुख्य वजह बताया है.
भारतीय राजनीति का वह कौन सा नियम है जिससे बीजेपी को अगले 20 साल तक फायदा मिल सकता है?
प्रदीप गुप्ता ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का हवाला देते हुए एक बेहद दिलचस्प थ्योरी सामने रखी है. उन्होंने कहा कि राजनीति में एक निश्चित सीमा और पीढ़ी का नियम काम करता है. देश की आजादी के बाद कांग्रेस ने साल 1977 तक देश पर बिना किसी बड़ी चुनौती के लगातार शासन किया था. उस दौर में देश की राजनीति में एक पीढ़ी का चक्र लगभग 20 साल का माना जाता था. गुप्ता के मुताबिक, वही 20 साल का पुराना राजनीतिक चक्र आज के दौर में भी पूरी तरह लागू होता है.
बीजेपी ने साल 2014 से देश की सत्ता पर जो मजबूत पकड़ बनाई है, वह इसी चक्र का हिस्सा है. प्रदीप गुप्ता ने कहा कि जब तक बीजेपी का जमीनी प्रदर्शन कमजोर या खराब नहीं होता, तब तक उसे सत्ता से बेदखल करना बहुत मुश्किल है. उन्होंने सीधा समीकरण समझाते हुए कहा कि जब तक सत्ताधारी पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरी उतरती रहेगी, तब तक वह लगातार चुनाव जीतती रहेगी और विपक्ष को लगातार हार का सामना करना पड़ेगा. इस चक्र को तोड़ने के लिए विपक्ष को जनता के बीच अपना भरोसा नए सिरे से कायम करना होगा.
जबरदस्त जनादेश मिलने के बाद अब बीजेपी के सामने कौन सी नई और बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं?
देश की सत्ता पर लंबे समय तक राज करने की भविष्यवाणी करने के साथ ही प्रदीप गुप्ता ने बीजेपी और एनडीए (NDA) गठबंधन को एक गंभीर चेतावनी भी दी है. उन्होंने कहा कि जब किसी पार्टी को जनता से इतना बड़ा और ऐतिहासिक जनादेश मिलता है, तो उसके साथ ही जनता की नजरें भी बहुत कड़ी हो जाती हैं. बड़े जनादेश का सीधा मतलब होता है कि सरकार से जनता की उम्मीदें अब आसमान छूने लगी हैं.
गुप्ता ने आगाह करते हुए कहा कि इस स्टेज पर पहुंचने के बाद अब बीजेपी और पूरे एनडीए को ‘सुपरपरफॉर्म’ यानी उम्मीद से भी कई गुना बेहतर काम करके दिखाना होगा. उन्होंने एक मानवीय और राजनीतिक स्वभाव का जिक्र करते हुए कहा कि जब कोई भी ताकत बहुत बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंच जाती है, तो वहां से नीचे गिरने का दबाव और खतरा भी उतना ही ज्यादा बढ़ जाता है. बीजेपी भी अब उसी स्टेज पर खड़ी है, जहां जनता की हर छोटी-बड़ी उम्मीद का बोझ सीधा सरकार के कंधों पर आ टिका है.
कांग्रेस पार्टी अभी तक अपने पुराने दौर के किन मुद्दों से जूझ रही है और उसे वापसी में कितना समय लगेगा?
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की मौजूदा हालत और भविष्य पर बात करते हुए प्रदीप गुप्ता ने कहा कि पार्टी अभी भी अपने पुराने दौर की गलतियों और धारणाओं के बोझ से उबर नहीं पाई है. जनता के मन में कांग्रेस की पिछली सरकारों के खराब शासन को लेकर जो छवि बनी थी, उसे पूरी तरह से मिटाने में पार्टी को अभी कई और साल लग सकते हैं.
विश्लेषक गुप्ता का मानना है कि अगर हम अगले लोकसभा चुनाव यानी साल 2029 की भी बात करें, तब भी कांग्रेस को सत्ता से बाहर रहे लगभग 15 साल का लंबा समय हो जाएगा. इसके बावजूद, कांग्रेस को पूरे देश की जनता को यह भरोसा दिलाने में कि वह एक मजबूत विकल्प है, कम से कम 5 साल का वक्त और लग सकता है. उन्होंने साफ किया कि किसी भी पार्टी का राजनीतिक भविष्य शॉर्ट-टर्म नैरेटिव या सोशल मीडिया के बयानों से तय नहीं होता, बल्कि इसके लिए जनता के बीच जाकर उनका नजरिया बदलना पड़ता है.
उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े राज्यों को लेकर प्रदीप गुप्ता के आंकड़े क्या इशारा कर रहे हैं?
आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से प्रदीप गुप्ता ने उत्तर प्रदेश और पंजाब की राजनीतिक स्थिति का भी बड़ा विश्लेषण साझा किया है. उत्तर प्रदेश को लेकर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी राज्य में बेहद मजबूत और आरामदायक स्थिति में दिखाई दे रही है. एक्सिस माई इंडिया के जमीनी फीडबैक के अनुसार, यूपी की जनता में सरकार के कामकाज को लेकर संतुष्टि का प्रतिशत काफी अच्छा है. इस वजह से फिलहाल बीजेपी के लिए यूपी में कोई बड़ा संकट नजर नहीं आता.
हालांकि, गुप्ता ने यह भी जोड़ा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति बहुत उतार-चढ़ाव वाली है, जहां मतदाताओं का मूड बहुत तेजी से बदलता है. वहीं, पंजाब को लेकर उन्होंने इसे एक बेहद दिलचस्प और कड़ा मुकाबला बताया. पंजाब में इस समय आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी के बीच चौतरफा मुकाबला देखने को मिल रहा है. गुप्ता ने समझाया कि जब मुकाबला चार पार्टियों के बीच हो, तो वोटों का बिखराव बहुत ज्यादा होता है. ऐसे में महज 26 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने वाली पार्टी भी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना सकती है.
क्या सिर्फ हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के दम पर बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है?
प्रदीप गुप्ता ने उन सभी राजनीतिक विश्लेषकों के दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जो यह मानते हैं कि बीजेपी की चुनावी सफलता के पीछे सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण या हिंदू वोटों का एकजुट होना है. पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बीजेपी की बड़ी सफलता का उदाहरण देते हुए गुप्ता ने कहा कि पार्टी की जीत का असली श्रेय वहां का सुशासन, मजबूत लीडरशिप और जमीनी संगठन है.
उन्होंने कहा कि सिर्फ हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों से कभी कोई चुनाव जीता या हारा नहीं जा सकता. जब लोग बीजेपी की जीत को सिर्फ हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण से जोड़कर देखते हैं, तो वे उन राज्यों में सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों और अच्छे प्रोजेक्ट्स का अपमान करते हैं. गुप्ता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपना एक अलग जादू है. इसके साथ ही गृह मंत्री अमित शाह की संगठन को चलाने की गजब की क्षमता और आरएसएस (RSS) का फैला हुआ मजबूत नेटवर्क बीजेपी को हर राज्य में अजेय बना रहा है. दूसरी तरफ, बंगाल में टीएमसी (TMC) के सालों के कुशासन ने जनता के मन में जो डर और असंतोष पैदा किया, उसने भी बीजेपी की राह को आसान बनाया है.

