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Gaganpreet Kaur Bail News: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में बीएमडल्ब्लू केस की आरोपी गगनप्रीत कौर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जज ने दिल्ली पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूत पेश करने का निर्देश दिया है. अब कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर दोपहर 2 बजे करेगी. पटियाला हाउस कोर्ट में आरोपी गगनप्रीत कौर के वकील ने दलील दी कि उनकी मंशा को गलत समझा गया है और उन्हें यह चिकित्सीय जानकारी नहीं थी कि पीड़ित कितने समय में मर सकता है.
बीएमडब्ल्यू केस में गुरुवार को आ सकता है गगनप्रीत की जमानत पर फैसलागगनप्रीत कौर ने दी क्या दलील?
मैं जमानत मिलने पर भागने वाली नहीं हूं… गगनप्रीत
वकील ने दलील दी कि वह अग्रिम जमानत नहीं मांग रही है. वह गिरफ्तारी के बाद से 10 दिनों से हिरासत में है. वकील ने आगे कहा कि उनके भागने का जोखिम नहीं है और उसने जांच में सहयोग किया. जब पूछा गया, तो उसका मोबाइल और ड्राइविंग लाइसेंस पुलिस को सौंप दिया गया. वकील ने कहा कि पूरा परिवार पीड़ित है और सभी सबूत पुलिस के पास हैं. उसे जमानत दी जा सकती है. विशेष सार्वजनिक अभियोजक (SPP) अतुल श्रीवास्तव और अतिरिक्त सार्वजनिक अभियोजक दिशांक धवन ने गगनप्रीत की जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि आरोपी के घर के पास AIIMS अस्पताल है न कि नुलाइफ अस्पताल.
सरकारी वकील ने दी क्या दलील?
SPP ने आगे तर्क दिया कि आरोपी दक्षिण दिल्ली में 6 साल से रह रही थी और क्षेत्र और वहां के अस्पतालों के बारे में अच्छी तरह से जानती थी.
क्या थी गगनप्रीत की मंशा, क्या बोले सरकारी वकील?
सरकारी वकील ने दलील दी कि आरोपी की मंशा घायल को बचाने की नहीं थी, बल्कि कानूनी कार्यवाही से बचने की थी. SPP ने यह भी तर्क दिया कि उसने घायल को अपने रिश्तेदारों के स्वामित्व वाले अस्पताल में ले जाया. यह भी तर्क दिया गया कि सबूत पहले ही छेड़छाड़ किए जा चुके हैं. यह आरोपी को जमानत देने का मामला नहीं है. SPP श्रीवास्तव ने यह भी उल्लेख किया कि गवाह, गुलफाम ने कहा कि आरोपी ने उसे आजादपुर की ओर ले जाने के लिए कहा. कोर्ट के सवाल के जवाब में जांच अधिकारी ने कोर्ट को सूचित किया कि बीएमडब्ल्यू को एक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें कार की गति निर्धारित करने के लिए क्रैश रिपोर्ट मांगी गई है.
कोर्ट ने आरोपी के वकील और पुलिस से कल लिखित दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज आदि प्रस्तुत करने को कहा है. शिकायतकर्ता के वकील, अधिवक्ता अतुल कुमार ने तर्क दिया कि घायल को अस्पताल की लॉबी में घंटों तक स्ट्रेचर पर रखा गया था. दूसरी ओर, आरोपी को आईसीयू में भर्ती किया गया था. उन्होंने आगे कहा कि दुर्घटना स्थल से 2 मिनट की दूरी पर एक सेना बेस अस्पताल है. कानूनी आवश्यकता है कि घायल को निकटतम अस्पताल ले जाया जाए. उन्होंने आगे दलील दी कि पीड़ित ने कहा कि उसे दूर के अस्पताल ले जाया गया. इसके बावजूद, उसने अनुरोध किया कि उसे निकटतम अस्पताल ले जाया जाए.

