नई दिल्ली: एक बार फिर से नागरिकता और एनआरसी को लेकर माहौल काफी गरम हो गया है. विदेश मंत्रालय के एक बयान के बाद इंडी गठबंधन ने सरकार पर हमला बोल दिया है. अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है और यह आपकी नागरिकता का अल्टीमेट सबूत बिल्कुल नहीं है. इसके बाद से ही कांग्रेस से लेकर ओवैसी तक सब मोदी सरकार पर हमलावर हो गए हैं. विपक्ष लगातार ये डर फैला रहा है कि नरेंद्र मोदी अब एनआरसी लागू करने की तैयारी कर रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि अगर आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं तो फिर भारतीय होने का असली सबूत क्या है. क्या सरकार सच में कोई नया सिस्टम लाने वाली है. इमरजेंसी की बरसी पर राहुल गांधी और कांग्रेस किस तरह से इस पूरे मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं. आज हम आपको इस पूरे विवाद की असली सच्चाई बताएंगे.
पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय ने अचानक ऐसा क्या कह दिया?
देश में कागज नहीं दिखाएंगे वाला इकोसिस्टम एक बार फिर से एक्टिव हो गया है. ये लोग लगातार ये माहौल बना रहे हैं कि नरेंद्र मोदी इस देश से सबको बाहर कर देंगे. विपक्ष का नैरेटिव है कि देश में सिर्फ वही लोग रहेंगे जो बीजेपी को वोट देते हैं. विरोधियों ने ये नैरेटिव सेट करना शुरू कर दिया है कि नरेंद्र मोदी तानाशाह बन जाएंगे. विपक्ष कह रहा है कि देश में घुसपैठियों को भगाने की आड़ में विरोधियों को देश निकाला दे दिया जाएगा. ये सारा बवाल तब शुरू हुआ जब विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने एक अहम बयान दिया.
क्या अब आधार और वोटर आईडी कार्ड भी नागरिकता का सबूत नहीं हैं?
- इंडी गठबंधन के नेता लगातार सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे कर रहे हैं. उनका कहना है कि पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस नागरिकता को प्रमाणित नहीं करते हैं. विपक्ष तंज कसते हुए कह रहा है कि सिर्फ बीजेपी की सदस्यता ही नागरिकता साबित करेगी. इस राजनीति से अलग आम लोग भी सोशल मीडिया पर कई तरह के जायज सवाल उठा रहे हैं.
- लोग पूछ रहे हैं कि जिस पासपोर्ट से दुनिया नागरिकता तय करती है उसे भारत में प्रमाण क्यों नहीं माना जा रहा है. पासपोर्ट जारी करने से पहले तमाम तरह के डॉक्यूमेंट्स चेक किए जाते हैं. फिर इसे नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं मान सकते. वोटर आईडी कार्ड 18 साल की उम्र के बाद बनता है और यह भारतीय नागरिकों को ही मिलता है. लेकिन कानूनी रूप से सिर्फ उम्र तय होना नागरिकता का अंतिम आधार नहीं है.
- आधार कार्ड आपकी पहचान का अहम सबूत है. यह नागरिकता का प्रमाण पत्र बिल्कुल नहीं है. आधार कार्ड उन लोगों को भी जारी किया जा सकता है जो भारतीय नहीं हैं लेकिन भारत में रह रहे हैं. पैन कार्ड भी गैर भारतीय को जारी किया जा सकता है. ये सारी बातें इंडी गठबंधन के नेता भी बहुत अच्छे से जानते हैं. इसके बावजूद वो कह रहे हैं कि मोदी सरकार अब पासपोर्ट को भी नहीं मान रही है.
पासपोर्ट और नागरिकता विवाद की असली जड़ आखिर कहां से शुरू हुई?
ये बात पूरी तरह सही है कि जब आप विदेश जाते हैं तो पासपोर्ट आपकी नेशनलिटी तय करता है. यह विदेश यात्रा में मदद करता है. लेकिन इसे नागरिकता तय करने वाले फाइनल डॉक्यूमेंट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. जैसे ही ये बात सामने आई इंडी वालों ने तुरंत बवाल मचाना शुरू कर दिया.
ओवैसी और कपिल सिब्बल ने नागरिकता को लेकर क्या सवाल उठाए?
- वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के पुराने नेता कपिल सिब्बल ने सरकार से तीखा सवाल पूछा. सिब्बल ने पूछा कि फिर नागरिकता का प्रूफ देने के लिए देश में कौन सा डॉक्यूमेंट मान्य है. इंडी गठबंधन वाले कहने लगे कि क्या अब बीजेपी की सदस्यता का कार्ड ही वैध नागरिकता कार्ड है. विपक्ष पूछ रहा है कि मौजूदा वक्त में जो अलग-अलग कार्ड बन रहे हैं फिर उनका क्या फायदा है.
- टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने कहा कि हिंदू और बीजेपी वोटर होना ही भारतीय नागरिक होने का एकमात्र प्रूफ बन गया है. कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी सवाल उठाया कि क्या अब मोदी का चरणवंदन ही नागरिकता का प्रूफ है. पूरा विपक्ष इस मामले पर सरकार पर टूट पड़ा है.
- इस विवाद में असदुद्दीन ओवैसी भी कूद गए हैं. ओवैसी ने कहा कि 2030 तक सिर्फ बीजेपी की सदस्यता ही नागरिकता तय करेगी. ओवैसी ने दलील दी कि पासपोर्ट एक्ट में साफ लिखा है कि पासपोर्ट सिर्फ भारतीय नागरिक को जारी होता है. ओवैसी ने कहा, ‘जो भारतीय नागरिक नहीं है उसे पासपोर्ट नहीं मिल सकता तो फिर ये नया तमाशा क्या है’.
साल 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पासपोर्ट को लेकर क्या फैसला दिया था?
ओवैसी खुद कानून के बहुत बड़े ज्ञाता और बैरिस्टर माने जाते हैं. इंडी वाले भी हाथ में संविधान लेकर घूमते रहते हैं. ये लोग पासपोर्ट को लेकर ऐसी बातें कर रहे हैं जैसे यह नियम पहली बार सामने आया हो. सच तो ये है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है ये बात नरेंद्र मोदी ने तय नहीं की है. यह बात तो खुद देश की कई अदालतें पहले ही कह चुकी हैं. और यह सब तब हुआ था जब केंद्र में इंडी गठबंधन की सरकार थी.
इन चारों के पास भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र तीनों मौजूद थे. इन पर बिना वैध अनुमति के भारत में घुसपैठ का गंभीर आरोप था. ट्रायल कोर्ट ने इन्हें अवैध रूप से घुसपैठ का दोषी माना था. बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इनकी 6 महीने की सजा को बरकरार रखा था. कोर्ट ने नागरिकता का फैसला नागरिकता एक्ट 1955 के तहत किया था. इससे स्पष्ट है कि नरेंद्र मोदी ने पासपोर्ट को लेकर कोई नया नियम नहीं बनाया है.
पासपोर्ट और नागरिकता एक्ट के बीच क्या कानूनी अंतर है?
दूसरी तरफ नागरिकता साबित करने के लिए आपको नागरिकता एक्ट के नियम फॉलो करने होते हैं. अगर आपकी नागरिकता पर कोई कानूनी सवाल उठता है तो कोर्ट पासपोर्ट नहीं देखेगा. आपकी नागरिकता को नागरिकता कानून के कड़े आधार पर ही परखा जाएगा. इंडी वाले इस सीधे से कानून को लेकर बेवजह का भारी कंफ्यूजन फैला रहे हैं.
दुनिया के बाकी देशों में नागरिकता और पासपोर्ट को लेकर क्या नियम हैं?
दुनिया भर में कई देश ऐसे हैं जो पासपोर्ट को ही नागरिकता का इकलौता सबूत मान लेते हैं. लेकिन बहुत सारे विकसित देश ऐसे हैं जहां अतिरिक्त डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है. कनाडा में सिर्फ पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं मानते हैं. वहां सिटिजन सर्टिफिकेट को नागरिकता का ज्यादा पुख्ता प्रमाण माना जाता है.
- जर्मनी में पासपोर्ट को सबूत मानते हैं लेकिन वहां का नागरिकता रजिस्टर ज्यादा प्रमाणिक है.
- ऑस्ट्रेलिया में पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण है लेकिन एडिशनल डॉक्यूमेंट्स की भी जरूरत पड़ती है.
- इटली और स्पेन में भी पासपोर्ट के साथ दूसरे जरूरी रिकॉर्ड चेक किए जाते हैं.
भारत में भी सिर्फ एक डॉक्यूमेंट को दिखाकर आप अपनी नागरिकता पूरी तरह साबित नहीं कर सकते हैं.
फर्जी पासपोर्ट और फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट का असली रैकेट कैसे काम करता है?
भारत में एक से ज्यादा डॉक्यूमेंट्स मांगने का एक बहुत बड़ा और ठोस कारण है. हमारे देश में दस्तावेजों को लेकर भारी फर्जीवाड़ा लंबे समय से चलता आ रहा है. कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम को साल 2013 में फर्जी पासपोर्ट के केस में 7 साल की कड़ी सजा हुई थी. साल 2025 में चेन्नई में तीन विदेशी नागरिक फ्रॉड करके इंडियन पासपोर्ट लेने के जुर्म में पकड़े गए थे.
कोलकाता में साल 2025 में एक ऐसा रैकेट पकड़ा गया था जो बांग्लादेशियों को फर्जी इंडियन पासपोर्ट बांटता था. इसी साल ईडी ने पाकिस्तान से कनेक्शन वाले एक फर्जी पासपोर्ट गैंग का बड़ा खुलासा किया था. दस्तावेजों का फर्जीवाड़ा सिर्फ पासपोर्ट तक सीमित नहीं है. महाराष्ट्र के अमरावती में हजार से ज्यादा लोगों पर फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने का केस दर्ज हुआ है.
मुंबई के पास ठाणे में भी दस हजार से ज्यादा बोगस बर्थ सर्टिफिकेट पकड़े गए हैं. पूरे देश में लाखों की संख्या में फर्जी राशन कार्ड और फर्जी वोटर आईडी जब्त हो चुके हैं. ऐसे में सरकार किसी एक कार्ड को नागरिकता का अंतिम आधार कैसे मान सकती है.
क्या मोदी सरकार सच में देश में एनआरसी लागू करने वाली है?
इंडी गठबंधन के नेता इस पूरे मामले को एनआरसी के खौफ से जोड़ रहे हैं. विपक्ष ये माहौल बना रहा है कि पीएम मोदी ने इंडियन पासपोर्ट की वैल्यू घटा दी है. टीएमसी नेता साकेत गोखले ने कहा कि मोदी सरकार सारे दस्तावेजों को जानबूझकर खारिज कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार नागरिकता को शक के घेरे में लाना चाहती है.
साकेत गोखले ने कहा, ‘अगला स्टेप एनआरसी है और मोदी-शाह तय करेंगे कि कौन नागरिक है’. विपक्ष का कहना है कि सरकार आपका नाम वोटर लिस्ट से हटाकर नागरिकता छीन लेगी. कांग्रेस नेता डॉ सैयद नासिर हुसैन ने पूछा कि अगर सब खारिज हो रहा है तो फिर नागरिकता कैसे साबित होगी.
इस पूरे विवाद पर बीजेपी नेता बीएल संतोष ने विपक्ष को करारा जवाब दिया है. संतोष ने कहा, ‘विपक्ष को एनआरसी को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लेना चाहिए’. बीजेपी का तर्क है कि एनआरसी लागू होने के बाद सबके पास एक सिंगल और पुख्ता डॉक्यूमेंट होगा. इससे बार-बार नागरिकता साबित करने का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.

