नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ महीनों से कई तरह के रंग दिखा रहा है. साल की शुरुआत से ही दबाव में चल रहे भारतीय आईटी सेक्टर ने अचानक उछाल मारना शुरू कर दिया. आप अक्टूबर के आंकड़े देखें तो भारतीय आईटी सेक्टर की लगभग सभी कंपनियों में तेजी दिख रही है. एक निवेशक के तौर पर भले ही आप यह तेजी देख खुश हो रहे हों और यह खुशफहमी भी पैदा कर ली हो कि अब आईटी शेयरों के दिन लौट आए हैं. लेकिन, जब आपकी नजरें ग्लोबल मार्केट की तरफ उठेंगी तो यह सवाल खुद ब खुद सामने आ जाएगा कि कहीं यह तेजी किसी और सेक्टर में आ रही गिरावट पर इतराने जैसी तो नहीं. मसलन, ग्लोबल मार्केट में अन्य सेक्टर में आई बिकवाली ही तो भारतीय आईटी सेक्टर में खरीदारी की वजह तो नहीं बन गई.
सबसे पहले आपको भारतीय आईटी सेक्टर के अक्टूबर के प्रदर्शन के बारे में बताते हैं. एक से 14 अक्टूबर तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस दौरान सबसे ज्यादा 12.8 फीसदी उछाल एचसीएल टेक में दिख रहा है, जबकि टीसीएस ने इस दौरान 11 फीसदी की ग्रोथ हासिल की है. इन्फोसिस ने भी 9.6 फीसदी का उछाल मारा है और विप्रो तो 7.6 फीसदी की तेजी हासिल करने में कामयाब रही है. कोफोर्ज (Coforge) में 6.2 फीसदी की तेजी दिख रही है तो टेक महिंद्रा ने भी 4.4 फीसदी ग्रोथ बनाई है. आपको बता दें कि यह तेजी तब दिख रही है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीन कार्ड और वीजा नियमों में सख्त बदलाव किया है. इसका भारतीय आईटी सेक्टर्स पर गहरा असर पड़ा है.
अब डालते हैं ग्लोबल मार्केट पर नजर
आपने घरेलू बाजार में आईटी सेक्टर में आई तेजी तो देख ली, अब इसका दूसरा पहलू भी देखते हैं. दरअसल, इसी दौरान ग्लोबल मार्केट में एआई और चिप कंपनियों के शेयरों में लगातार गिरावट आती दिख रही है. अमेरिका सहित तमाम एशियाई बाजारों में एआई और चिप कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट दिखी है. एक्सपर्ट का मानना है कि इस दौरान भारतीय बाजार में आई तेजी सेक्टर रोटेशन का नतीजा हो सकती है. निवेशकों को जब चिप और एआई सेक्टर में कमजोरी दिखी तो यहां से पैसे निकालकर आईटी कंपनियों में डाल रहे हैं, वह भी भारतीय बाजार में जो सबसे ज्यादा अमेरिकी बाजार पर ही निर्भर है.
दूसरे फैक्टर भी करते हैं काम
एचसीएल टेक में सबसे ज्यादा तेजी दिख रही है, लेकिन यह सिर्फ सेक्टर रोटेशन की वजह से नहीं है, बल्कि कंपनी की मजबूत तिमाही ग्रोथ ने भी निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया है. 15 अक्टूबर को निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2 फीसदी का उछाल दिखा और महज 3 कारोबारी सत्र में यह 8 फीसदी चढ़ चुका है. इस पूरे सिनेरियो में आपको यह समझना भी जरूरी है कि आखिर अमेरिका और एशिया में एआई शेयर क्यों गिर रहे हैं. दरअसल, इस बार की गिरावट सिर्फ मुनाफावसूली नहीं है, बल्कि एआई के भविष्य और उस पर हो रहे भारी-भरकम निवेश पर उठ रहे सवालों का नतीजा हैं. इसके अलावा अमेरिका में बढ़ती महंगाई से ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव भी है. अगर फेड रिजर्व ऐसा करता है तो ऊंचे वैल्यूएशन वाली टेक कंपनियों पर भी दबाव बढ़ सकता है.
- एआई और चिप पर क्या है चिंता
- एआई पर रिटर्न की चिंता : अमेरिकी और एशियाई बाजारों में एआई कंपनियों के शेयरों में आ रही गिरावट की वजह निवेशकों में एआई पर रिटर्न की चिंता है. दरअसल, एआई कंपनियां अपने डाटा सेंटर, चिप और कंप्यूटिंग क्षमता पर काफी पैसा खर्च कर रही हैं. इससे निवेशकों को चिंता है कि बढ़ती महंगाई के बीच उनका मुनाफा लौटेगा या नहीं.
- चिप कंपनियों में बिकवाली : दक्षिण कोरिया सहित तमाम चिप बाजारों में दबाव दिख रहा है. 15 अक्टूबर को कॉस्पी 8 फीसदी से भी ज्यादा टूट गया, जबकि जापान का निक्केई भी 5 फीसदी नीचे आया है. दुनिया के बड़े चिप विनिर्माताओं जैसे सैमसंग, हायनिक्स के शेयरों पर भारी दबाव है.
इस दबाव से आईटी को क्यों हो रहा फायदा
बाजार के एक्सपर्ट का मानना है कि एआई और चिप से जुड़ी कंपनियों में दबाव और बिकवाली बढ़ने की वजह से निवेशक पारंपरिक आईटी सेवाओं वाली कंपनियों की ओर लौट रहे हैं. दरअसल, भारतीय आईटी कंपनियां दुनिया की तमाम कंपनियों को सॉफ्टवेयर सर्विस, क्लाउड माइग्रेशन, साइबर सुरक्षा, सिस्टम इंटीग्रेशन और एआई के इस्तेमाल में मदद करती हैं. इन कंपिनयों का कारोबार सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है. यही वजह है कि उन्हें एआई और चिप से ज्यादा पारंपरिक भारतीय आईटी कंपनियों में अवसर दिख रहा है. शेयर बाजार एक्सपर्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि एआई शेयरों में आई गिरावट भारतीय बाजार के लिए पॉजिटिव मूव बना सकता है. इससे भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार हो रही निकासी पर भी लगाम लगाई जा सकती है.
क्या आगे भी जारी रह सकती है तेजी
ऊपर दिए गए आंकड़ों से एक बात तो तय है कि भारतीय आईटी सेक्टर में आ रही तेजी सिर्फ एआई और चिप कंपनियों में गिरावट का नतीजा नहीं है. HCLTech को बाजार नतीजों का काफी साथ मिला है.कंपनी ने सितंबर तिमाही में 21 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ हासिल की है और एआई से उसकी सालाना कमाई करीब 22 करोड़ डॉलर पहुंच चुकी है. हालांकि, विप्रो जैसी कंपनियों को तिमाही नतीजों का उतना साथ नहीं मिला लेकिन सेक्टर में आ रही तेजी का फायदा जरूर मिल रहा है, क्योंकि टीसीएस के शेयरों में भी तगड़ा उछाल आया है. हालांकि, आगे इसमें तेजी बनी रहेगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से निकासी कम कर सकते हैं या फिर जारी रखेंगे. साथ ही अगर अमेरिका में आईटी खर्च और ब्याज दरें बढ़ती हैं तो कंपनियां अपना खर्च रोक सकती हैं. इससे भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दबाव आ सकता है.

