International
oi-Siddharth Purohit
OI
Defence:
अरब
खाड़ी
के
समुद्री
क्षेत्र
में
एक
बड़ा
बदलाव
देखने
को
मिल
रहा
है।
ओमान,
यूएई,
बहरीन
और
सऊदी
अरब
की
नौसेनाएं
अब
भारत
के
साथ
अपने
ऑपरेशनल
रिश्ते
पहले
से
कहीं
ज़्यादा
मजबूत
कर
रही
हैं।
इसमें
स्पेशल
ट्रेनिंग,
हाइड्रोग्राफिक
सहयोग,
नियमित
पोर्ट
विज़िट
और
समुद्री
जानकारी
का
लगातार
आदान-प्रदान
शामिल
है।
इसके
उलट,
इन
देशों
का
पाकिस्तान
के
साथ
जुड़ाव
धीरे-धीरे
कम
हो
रहा
है।
यह
सिर्फ
डिप्लोमैटिक
बदलाव
नहीं
है,
बल्कि
खाड़ी
देशों
की
प्रैक्टिकल
ज़रूरतों,
भरोसे
और
क्षमता
के
आधार
पर
लिया
गया
फैसला
है।
भारत-खाड़ी
नौसेना
कब
से
हैं
साथ?
पिछले
कुछ
वर्षों
में
भारत
और
खाड़ी
देशों
का
नौसेना
सहयोग
केवल
समय-समय
पर
होने
वाली
मीटिंग
तक
सीमित
नहीं
रहा।
यह
अब
एक
नियमित
और
गहरा
पार्टनरशिप
मॉडल
बन
चुका
है।
इसका
सबसे
ताज़ा
उदाहरण
अक्टूबर
2024
में
देखने
को
मिला,
जब
भारत
के
फर्स्ट
ट्रेनिंग
स्क्वाड्रन
ने
मनामा
और
दुबई
में
एक
साथ
पोर्ट
विज़िट
की।

इन
विज़िट्स
में
क्रॉस-डेक
एक्सचेंज,
प्रैक्टिकल
सी
मॉड्यूल,
ट्रेनिंग
सेशन
और
लगातार
इंटरैक्शन
शामिल
थे।
इससे
खाड़ी
देशों
के
युवा
नौसैनिक
अधिकारियों
को
असली
समुद्री
अनुभव
मिल
रहा
है,
और
साथ
ही
भारत-खाड़ी
रिश्ते
और
मजबूत
हो
रहे
हैं।
पाकिस्तान
को
क्यों
दिया
गल्फ
ने
झटका?
इसी
दौरान
पाकिस्तान
की
स्थिति
काफी
अलग
दिखती
है।
ओमान
के
साथ
नसीम-अल-बह्र
जैसे
कुछ
संयुक्त
अभ्यास
अभी
भी
होते
हैं,
और
पाकिस्तान
बहुराष्ट्रीय
Combined
Maritime
Forces
का
हिस्सा
भी
है-लेकिन
ओमान,
यूएई
और
कुवैत
के
साथ
उसका
नियमित
द्विपक्षीय
प्रशिक्षण
अब
काफी
घट
चुका
है।
जो
कुछ
बचा
है
वह
बेहद
सीमित
है,
और
भारत
के
सालभर
चलने
वाले
एक्टिव
कार्यक्रमों
के
सामने
बहुत
छोटा
पड़
जाता
है।
खाड़ी
देशों
के
रक्षा
अधिकारी
भी
यह
अंतर
साफ
महसूस
कर
रहे
हैं।
भारत
की
बड़ी
बढ़त:
मजबूत
ट्रेनिंग
और
कैपेसिटी
भारत
ने
खाड़ी
में
अपनी
मौजूदगी
का
मुख्य
स्तंभ
नौसेना
ट्रेनिंग
और
क्षमता
निर्माण
को
बनाया
है।
इसका
बड़ा
उदाहरण
2024
में
देखा
गया,
जब
सऊदी
अरब
के
King
Fahd
Naval
Academy
के
76
कैडेट
भारत
के
कोच्चि
में
एक
महीने
की
ट्रेनिंग
पर
आए।
इन
चार
हफ्तों
में
उन्होंने
सिम्युलेटेड
वार
मॉड्यूल,
बेसिक
नेवल
रूटीन
और
सी-टाइम
का
अनुभव
किया।
सऊदी
अधिकारियों
ने
खुले
तौर
पर
भारतीय
नेवी
की
ट्रेनिंग
की
तारीफ
की।
किसी
भी
समय
भारत
अपने
तटीय
प्रतिष्ठानों
और
जहाज़ों
पर
लगभग
300
विदेशी
नौसैनिक
कर्मियों
को
ट्रेन
करता
है।
भारत-सऊदी
संबंध
कहां
पहुंचे?
भारत
और
सऊदी
अरब
का
सहयोग
अब
सिर्फ
ट्रेनिंग
तक
सीमित
नहीं
रहा।
दोनों
देशों
ने
2025
में
पहली
बार
Navy-to-Navy
Staff
Talks
आयोजित
किए।
इतना
ही
नहीं,
द्विपक्षीय
अभ्यास
“अल-मोहेद
अल-हिंदी”
के
दो
सफल
संस्करण
2021
और
2023
में
हो
चुके
हैं।
अगस्त
2025
में
भारतीय
नेवी
के
जहाज़-INS
तमाल
और
INS
सूरत-जेद्दा
पहुंचे,
जहां
उन्होंने
संयुक्त
अभ्यास,
पैसेज
एक्सरसाइज़
और
व्यापक
चालक
दल
इंटरैक्शन
किया।
यूएई-भारत
पार्टनरशिप
की
तेज़
रफ्तार
यूएई
के
साथ
भारत
की
पार्टनरशिप
भी
इसी
दिशा
में
और
मज़बूत
हुई
है।
जुलाई
2025
में
दोनों
देशों
ने
13वीं
Joint
Defence
Cooperation
Committee
की
मीटिंग
में
अमीराती
कर्मियों
के
लिए
कस्टमाइज़्ड
नौसैनिक
ट्रेनिंग
मॉड्यूल
को
फाइनल
किया।
इसके
अलावा,
नौसेना-से-नौसेना
वार्ता
के
9वें
दौर
ने
समुद्री
जानकारी
साझा
करने
को
और
गहरा
किया।
इससे
दोनों
देशों
के
बीच
संस्थागत
स्तर
पर
बड़ा
भरोसा
बना
है।
पाकिस्तान
अब
अभ्यास
के
लायक
नहीं?
पाकिस्तान
हर
दो
साल
में
बहुराष्ट्रीय
“अमन”
अभ्यास
कराता
है,
जिसमें
50
से
ज्यादा
देश
हिस्सा
लेते
हैं।
लेकिन
खाड़ी
देशों
के
लिए
यह
उतना
मूल्यवान
नहीं
रहा
क्योंकि
भारत
अब
उन्हें
लगातार,
तकनीकी
और
नियमित
ट्रेनिंग
सुविधाएं
प्रदान
करता
है,
जो
व्यावहारिक
रूप
से
ज्यादा
उपयोगी
हैं।
रक्षा
निर्यात
में
भी
अंतर
साफ
दिख
रहा
है-पाकिस्तान
की
क्षमताएं
सीमित
हैं,
जबकि
भारत
अब
इंडिजेनस
नौसैनिक
उपकरणों
का
स्थिर
रूप
से
निर्यात
कर
रहा
है।
भारत
जीत
रहा
खाड़ी
का
भरोसा
खाड़ी
देशों
का
झुकाव
भारत
की
ओर
बढ़ने
का
सबसे
बड़ा
कारण
क्षमता
का
अंतर
है।
भारतीय
नौसेना
दो
एयरक्राफ्ट
कैरियर-INS
विक्रमादित्य
और
INS
विक्रांत-के
साथ
आधुनिक
विध्वंसक,
फ्रिगेट
और
सबमरीन
ऑपरेट
करती
है।
India
Mission-based
Deployment
के
तहत
भारत
अदन
की
खाड़ी,
फारस
की
खाड़ी
और
ओमान
की
खाड़ी
में
लगातार
मौजूद
रहता
है।
जनवरी
2024
में
ऑपरेशन
संकल्प
के
दौरान
10
से
ज्यादा
भारतीय
वॉरशिप
व्यापारी
जहाज़ों
की
सुरक्षा
में
लगे
थे।
भारत
का
SAGAR
विज़न
अब
एक्शन
में
भारत
का
“SAGAR”
Vision-Security
and
Growth
for
All
in
the
Region-2015
में
पेश
किया
गया
था।
आज
यह
सिर्फ
बयान
नहीं,
बल्कि
एक
सक्रिय
नीति
बन
चुका
है।
2025
में
Indian
Ocean
Ship
Sagar
ने
हिंद
महासागर
के
द्वीपीय
राष्ट्रों
के
साथ
संयुक्त
मिशन
किए।
पाकिस्तान
की
चुनौतियां
पाकिस्तान
की
नौसेना
की
सीमाएं
साफ
दिखती
हैं-न
एयरक्राफ्ट
कैरियर,
न
बड़े
विध्वंसक।
उनकी
पहुंच
कराची-ग्वादर
के
तटीय
इलाके
से
ज़्यादा
आगे
नहीं
जा
पाती।
समुद्री
सुरक्षा,
piracy
patrol
या
बड़े
क्षेत्र
की
मॉनिटरिंग
में
पाकिस्तान
का
योगदान
सीमित
रहा
है।
आर्थिक
संकट
ने
भी
पाकिस्तान
के
विकल्प
कम
कर
दिए
हैं।
यमन
युद्ध
पर
पाकिस्तान
के
संसद
के
फैसले
का
राजनीतिक
असर
अभी
भी
खाड़ी
देशों
की
धारणा
को
प्रभावित
करता
है।
भारत
बना
खाड़ी
का
भरोसेमंद
समुद्री
पार्टनर
खाड़ी
में
भारत-खाड़ी
का
उभरता
समुद्री
गठबंधन
सिर्फ
डिप्लोमैसी
का
खेल
नहीं
है-यह
ऑपरेशनल
जरूरतों
पर
आधारित
है।
भारत
की
लगातार
तैनाती,
भरोसेमंद
ट्रेनिंग
सिस्टम,
हाइड्रोग्राफिक
expertise
और
मजबूत
सूचना
साझाकरण
ढांचे
ने
उसे
खाड़ी
के
लिए
सबसे
विश्वसनीय
नौसैनिक
पार्टनर
बना
दिया
है।
इसके
उलट,
पाकिस्तान
के
सीमित
संसाधन
और
कम
होती
सहभागिता
ने
खाड़ी
में
उसका
महत्व
कम
कर
दिया
है।
आने
वाले
समय
में
भारत
का
नौसैनिक
प्रभाव
और
बढ़ने
वाला
है-क्योंकि
यह
बयानबाज़ी
नहीं,
बल्कि
असली
क्षमता
और
भरोसे
पर
टिका
है।
इस
खबर
पर
आपकी
क्या
राय
है,
हमें
कमेंट
में
बताएं।
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