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NEET Success Story: ओडिशा के मयूरभंज की दो बहनों ने नेटवर्क न होने पर पहाड़ियों पर चढ़कर ऑनलाइन पढ़ाई की. उन्होंने बिना किसी महंगी कोचिंग के नीट परीक्षा पास कर ली. किसान की बेटियों- यज्ञसेनी और दिव्यसेनी खतुआ की अटूट लगन आज देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
Odisha Sisters NEET Success Story: दोनों बहनों ने सीमित संसाधनों से तैयारी कर नीट परीक्षा पास की
नई दिल्ली (NEET Success Story). सपनों को पंख देने के लिए सिर्फ बड़े शहरों की महंगी कोचिंग या हाई-स्पीड वाई-फाई की जरूरत नहीं होती. इरादे पक्के हों तो पहाड़ों की चोटियों पर भी भविष्य की नींव रखी जा सकती है. ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक छोटे से गांव महुलापंखा की 2 बहनों- यज्ञसेनी और दिव्यसेनी खतुआ ने यह सच कर दिखाया है. मामूली किसान और आंगनबाड़ी सहायिका की इन बेटियों ने बिना किसी प्राइवेट कोचिंग के देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक नीट क्रैक कर ली है.
महुलापंखा गांव से मेडिकल कॉलेज तक का सफर
ओडिशा के मयूरभंज जिले के कपतिपदा ब्लॉक स्थित माझिगड़िया पंचायत का महुलापंखा गांव चर्चा में है. वजह है गांव की 2 होनहार बेटियां, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बीच इतिहास रच दिया है. पिता गौरांग खतुआ खेती-किसानी करके परिवार का पेट पालते हैं और मां सुनीता आंगनबाड़ी में सहायिका का काम करती हैं. इतनी कम आमदनी में घर का खर्च चलाना ही किसी चुनौती से कम नहीं था. ऐसे में नीट जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए लाखों रुपये की कोचिंग फीस देना इस परिवार के लिए नामुमकिन था.
नेटवर्क की तलाश में पहाड़ों पर बना ‘ओपन क्लासरूम’
आर्थिक तंगी के कारण कोचिंग का रास्ता बंद हो गया तो दोनों बहनों ने सेल्फ स्टडी और इंटरनेट का सहारा लिया. लेकिन चुनौती यहीं खत्म नहीं हुई. उनके गांव में मोबाइल नेटवर्क बेहद खराब रहता था. ऑनलाइन क्लास अटेंड करना या स्टडी मटीरियल डाउनलोड करना मुश्किल होता था. इस समस्या का हल उन्होंने अनोखे अंदाज में निकाला. दोनों बहनें किताबें और मोबाइल लेकर गांव के पास स्थित पहाड़ियों पर निकल जाती थीं. पहाड़ी की ऊंचाई पर जहां बेहतर नेटवर्क मिलता, वहीं बैठकर वे घंटों पढ़ाई करती थीं. मौसम चाहे कैसा भी हो, उनका यह सिलसिला कभी नहीं रुका.
नीट में दोनों बहनें हुईं सफल
बड़ी बहन यज्ञसेनी लगातार मेहनत करती रही और आखिरकार अपने तीसरे प्रयास में नीट परीक्षा पास कर ली. वहीं, छोटी बहन दिव्यसेनी ने अपनी बड़ी बहन के अनुभवों और गाइडेंस से सीखते हुए नीट के पहले ही प्रयास में यह कठिन परीक्षा पास कर ली. दोनों बहनों की इस डबल सक्सेस ने पूरे गांव को गर्व से भर दिया है.
ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए यह सफलता मिसाल क्यों है?
- सेल्फ स्टडी में है असली दम: अगर आपके पास सही गाइडेंस और इंटरनेट पर उपलब्ध फ्री कंटेंट है तो महंगी कोचिंग के बिना भी टॉप एग्जाम्स क्रैक किए जा सकते हैं.
- रिमोट लर्निंग का बढ़ता दायरा: देश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के बच्चे अब डिजिटल मीडियम का सही इस्तेमाल करके बड़े सपने पूरे कर रहे हैं.
- दृढ़ इच्छाशक्ति: नेटवर्क न होने पर हार मानने के बजाय ऑप्शन ढूंढना (जैसे पहाड़ी पर जाना) दिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, रास्ता निकाला जा सकता है.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…
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