NEET-UG 2026 Paper Leak Case: देशभर में भारी बवाल मचाने वाले नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच पूरी कर ली है. जांच एजेंसी ने 14 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी. इस ताजा चार्जशीट में एक और आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी का नाम जोड़ा गया है. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसी के साथ पेपर लीक के मूल मामले की जांच अब पूरी हो चुकी है. हालांकि, इस पूरे मामले में किसी भी सरकारी अधिकारी को नामजद नहीं किया गया है, जिसने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है.
शेषराव बजरंग सूर्यवंशी महाराष्ट्र के पुणे का रहने वाला बताया जाता है. आरोप है कि उसने कथित तौर पर परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को नीट-यूजी का पेपर उपलब्ध कराया था. सीबीआई के अनुसार, आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी पेपर लीक मामले में आरोपी शुभम खैरनार का सहयोगी था. शुभम खैरनार एक करियर काउंसलर है, जिसे 12 मई को नासिक से गिरफ्तार किया गया था. उस पर सोशल मीडिया के जरिए प्रश्नपत्र फैलाने का आरोप है.
इससे पहले 28 जुलाई को एजेंसी ने अपनी पहली मुख्य चार्जशीट दायर की थी. उसमें 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था. उन 13 नामों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा हायर किए गए तीन विषय विशेषज्ञ (मनीषा मंधारे, मनीषा संजय हवलदार और प्रहलाद कुलकर्णी) भी शामिल थे, जिन्होंने कथित तौर पर पेपर से जुड़ी गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाई थी. इसके अलावे 10 अन्य आरोपी हैं: मनीषा वाघमारे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनोज शिरुरे, तेजस हर्षद शाह, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल.
सीबीआई ने दिल्ली की अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर जांच पूरी होने का दावा किया. ताजा रिपोर्ट में एक नए प्राइवेट व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है. पहली चार्जशीट में एनटीए के तीन एक्सपर्ट्स, बिचौलिए और कोचिंग सेंटर से जुड़े लोग शामिल थे. एजेंसी के मुताबिक, पेपर लीक के इस पूरे केस में किसी भी सरकारी अफसर का नाम शामिल नहीं है.
सरकारी अफसरों को मिली क्लीन चिट पर उठे सवाल
इस जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी सरकारी अधिकारी पर सीधी आंच नहीं आई है. एक जांच अधिकारी ने साफ किया कि चार्जशीट में किसी भी सरकारी अफसर का नाम नहीं है. पूरा शिकंजा बिचौलियों, कोचिंग सेंटरों के नुमाइंदों और प्राइवेट एक्सपर्ट्स के इर्द-गिर्द ही कसा गया है. पहली चार्जशीट में कोचिंग माफिया और दलालों के गठजोड़ का खुलासा हुआ था, जिन्होंने मोटी रकम लेकर पेपर लीक कराया था. अब सप्लीमेंट्री रिपोर्ट आने के साथ ही कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा.
अब तक क्या हुआ है?
12 मई को, NTA ने 2026 NEET परीक्षा रद्द करने की घोषणा की. यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि एक ‘गेस पेपर’ (विषय विशेषज्ञों और शिक्षकों द्वारा पिछले ट्रेंड्स और पैटर्न के आधार पर तैयार किए गए संभावित सवालों का संग्रह) के कम से कम 120 सवाल, 3 मई को हुई NEET परीक्षा के पेपर से मेल खाते पाए गए थे. परीक्षा होने के एक हफ्ते बाद ही पेपर लीक का पता चला, जिससे संसद में जबरदस्त विरोध हुआ. ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के बैनर तले लाखों युवाओं के सड़कों पर उतरने के बाद, तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.
पेपर लीक मामले में पहली चार्जशीट 28 जुलाई को दायर की गई, जिसमें 13 लोगों को आरोपी बनाया गया. इनमें NTA द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल थे – बॉटनी और ज़ूलॉजी के लिए मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री के लिए प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी और फ़िज़िक्स के लिए मनीषा संजय हवलदार. CBI ने तब कहा था कि उसने “अन्य साज़िशकर्ताओं” की भूमिका की जांच खुली रखी है, ताकि सेंट्रल फ़ोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL), गवर्नमेंट एग्ज़ामिनर ऑफ़ क्वेश्चन्ड डॉक्यूमेंट्स (GEQD) और दिल्ली यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की राय वाली रिपोर्ट जमा की जा सके.

