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मेघालय में UDP को बड़ा सियासी झटका लगा है. पार्टी के 12 में से 11 विधायक बीजेपी और NPP में शामिल हो गए हैं. आठ विधायक बीजेपी और तीन NPP में गए. इससे बीजेपी की ताकत 10 और NPP की 36 हो गई. UDP अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. अब विधानसभा में UDP के पास सिर्फ एक विधायक बचा है.
मेघालय में गजब सियासी ड्रामा हो रहा है.
मेघालय की राजनीति में एक ऐसा सस्पेंस-थ्रिलर ड्रामा हुआ है, जिसने पूरे नॉर्थ-ईस्ट का सियासी पारा हाई कर दिया है. सोचिए, रात-रात भर में पूरी की पूरी पार्टी ही गायब हो जाए तो क्या कहेंगे? यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के 12 में से पूरे 11 विधायकों ने ऐसा मास्टर स्ट्रोक खेला कि बीजेपी और एनपीपी में जा घुसे और पीछे छोड़ गए सिर्फ अपनी पार्टी के अध्यक्ष को अकेले. पॉलिटिक्स का यह ऐसा गेम चेंजर मोमेंट है. बीजेपी 2 से सीधे 10 सीटों वाली पावरहाउस बन गई और सीएम कॉनराड संगमा की एनपीपी 36 का आंकड़ा छूकर फुल भौकाल में आ गई. इधर बेचारे UDP चीफ मेटबा लिंगदोह ने अकेले पड़ते ही कैबिनेट से इस्तीफा थमा दिया. 2023 में नंबर-2 रहने वाली क्षेत्रीय पार्टी का अचानक सिर्फ 1 सीट पर सिमट जाना. बॉस, यह दलबदल का खेल नहीं बल्कि मेघालय की सियासत का सबसे बड़ा ट्विस्ट है.
UDP के 11 विधायकों ने क्यों बदला पाला?
मेघालय की 60 सदस्यीय विधानसभा में UDP के पास पहले 12 विधायक थे. अब इनमें से 11 विधायक दूसरे दलों में चले गए हैं. आठ विधायकों ने बीजेपी का दामन थामा है. वहीं तीन विधायक NPP में शामिल हो गए हैं. बीजेपी में शामिल होने वालों में लाहमेन रिम्बुई, किरमेन शायला, पियुस मारवीन, मेयरलबोर्न साइम, मैथ्यू बियोंडस्टार कुर्बाह, ओलान सिंह सुइन, बालाजिद कुफर सिंगरेम और सिनशार कुफर रॉय लिंगदोह थाबाह शामिल हैं. दूसरी तरफ पॉल लिंगदोह, रेनीकटन लिंगदोह टोंगखर और नुजोरकी सुंगोह ने NPP का साथ चुना है. इस बदलाव के बाद विधानसभा में बीजेपी के 10 और NPP के 36 विधायक हो गए हैं.
दलबदल के बाद भी विधायकों की सदस्यता बरकरार
इस पूरे घटनाक्रम में संविधान की दसवीं अनुसूची का नियम अहम है. विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय की अधिसूचना के मुताबिक, बीजेपी में शामिल हुए आठ विधायकों के विलय को मान्यता दी गई है. वहीं, NPP में गए तीन विधायकों ने दावा किया कि वे UDP विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य हैं. इस आधार पर उनके विलय को भी मान्यता मिली. संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 में निर्धारित शर्तें पूरी होने पर पार्टी विलय के मामले में अयोग्यता से छूट का प्रावधान है.
UDP अध्यक्ष ने कैबिनेट से दिया इस्तीफा
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच UDP अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह ने शनिवार को कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा को अपना इस्तीफा सौंपा. उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात और पार्टी के भीतर हुए घटनाक्रम को इसकी वजह बताया. हालांकि, लिंगदोह ने पीटीआई से बातचीत में साफ किया कि उनका फैसला स्वैच्छिक था. उन्होंने उन अटकलों को खारिज किया कि उन पर इस्तीफे का दबाव बनाया गया था. 2023 में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी UDP मेघालय विधानसभा चुनाव 2023 में UDP ने 12 सीटें जीती थीं. इस प्रदर्शन के साथ वह विधानसभा की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी.
अब पार्टी के पास सिर्फ एक विधायक मेतबाह लिंगदोह बचे हैं. पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आई थीं. सितंबर 2025 के कैबिनेट फेरबदल में UDP के मंत्रियों में बदलाव हुआ था. उस समय मेतबाह लिंगदोह और लाहमेन रिम्बुई ने पॉल लिंगदोह और किरमेन शायला की जगह ली थी. अब 11 विधायकों के जाने के बाद UDP के सामने संगठन बचाने की चुनौती है. वहीं बीजेपी और NPP की बढ़ी ताकत ने मेघालय के सियासी समीकरण को नया मोड़ दे दिया है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…

