नई दिल्ली (Medical Course to Open Clinic). ज्यादातर मेडिकल स्टूडेंट्स खुद का क्लिनिक खोलने और मरीजों की सेवा करने का सपना देखते हैं. लेकिन अक्सर युवाओं के मन में उलझन रहती है कि आखिर क्लिनिक शुरू करने के लिए कौन सा कोर्स करना सबसे बेहतर रहेगा. भारत में कानूनन क्लिनिक चलाने और मरीजों का इलाज करने के लिए सरकार और मेडिकल काउंसिल की मान्यता प्राप्त डिग्री का होना अनिवार्य है. सही योग्यता के बिना क्लिनिक चलाना मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ है.
क्लिनिक खोलने के लिए कौन सा कोर्स करें?
सही यानी निर्धारित योग्यता के बिना क्लिनिक खोलना कानूनन गंभीर अपराध (Quackery) की श्रेणी में भी आता है. अगर आप भविष्य में क्लिनिक खोलना चाहते हैं तो डिग्री और लाइसेंस से जुड़ी हरजरूरी डिटेल पता होनी चाहिए.
एमबीबीएस: एलोपैथिक क्लिनिक का सबसे लोकप्रिय जरिया
अगर आप एलोपैथिक (अंग्रेजी) दवाओं का जनरल क्लिनिक खोलना चाहते हैं तो एमबीबीएस सबसे पहली और प्रमुख डिग्री है. यह 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप वाला कोर्स है, जिसमें एडमिशन नीट यूजी परीक्षा के जरिए होता है. एमबीबीएस पूरा करने के बाद नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) या संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होता है. इसके बाद आप जनरल प्रैक्टिस क्लिनिक शुरू कर सकते हैं.
बीएएमएस (BAMS) और बीएचएमएस (BHMS): आयुष और होम्योपैथी का विकल्प
आयुष और ऑल्टरनेटिव मेडिसिन की बढ़ती मांग के बीच इन मेडिकल कोर्सेज का दायरा तेजी से बढ़ा है:
- बीएएमएस: आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से इलाज के लिए यह 5.5 साल का डिग्री कोर्स है. इसे पूरा करने के बाद आयुर्वेदिक क्लिनिक खोल सकते हैं.
- बीएचएमएस: होम्योपैथी क्लिनिक चलाने के लिए बीएचएमएस डिग्री जरूरी है.
इन दोनों ही कोर्स में एडमिशन के लिए नीट परीक्षा पास करना अनिवार्य है और प्रैक्टिस के लिए संबंधित आयुष परिषद में रजिस्ट्रेशन कराना होता है.
बीपीटी और अलाइड कोर्सेज: ‘डॉक्टर’ लिखे बिना खोलें स्पेशलाइज्ड क्लिनिक
भारी-भरकम दवाओं के बिना इलाज करने वाले थेरेपी सेंटर्स की मांग आज के समय में बहुत ज्यादा है:
- बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT): 4.5 साल का यह कोर्स करने के बाद खुद का फिजियोथेरेपी या रिहैबिलिटेशन सेंटर खोल सकते हैं.
- बैचलर ऑफ ऑप्टोमेट्री (B.Optom): 4 साल का यह कोर्स आपको अपना विजन केयर या आई टेस्ट क्लिनिक खोलने का अधिकार देता है.
- BASLP (स्पीच एंड हियरिंग थेरेपी): स्पीच थेरेपी और हियरिंग एड (कान की मशीन) क्लिनिक चलाने के लिए इस 4 साल के डिग्री कोर्स की जबरदस्त मांग है.
डिप्लोमा वर्सेस डिग्री: CMS-ED का सच
अक्सर छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों में लोग 1-2 साल का CMS-ED (Community Health Worker) या D.Pharma करके क्लिनिक खोलने की भूल कर बैठते हैं. सच यह है कि CMS-ED केवल प्राथमिक उपचार (First Aid) और डब्ल्यूएचओ (WHO) की निर्धारित 45-50 जरूरी दवाओं की सिफारिश के लिए मान्य है. इसके आधार पर नाम के आगे ‘Dr.’ लिखना या पूरी तरह से डेवलप्ज एलोपैथिक क्लिनिक चलाना बिल्कुल गैरकानूनी माना जाता है.
क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और 3 सख्त कानूनी नियम
मेडिकल डिग्री हासिल करने के अलावा क्लिनिक की बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ सख्त नियम भी पूरे करने होते हैं:
- बायो-मेडिकल वेस्ट (BMW) एग्रीमेंट: क्लिनिक से निकलने वाले बायो-वेस्ट (सुई, कॉटन, पट्टियां) के डिस्पोजल के लिए अधिकृत एजेंसी से एग्रीमेंट होना जरूरी है.
- मिनिमम स्पेस: कंसल्टेशन रूम का न्यूनतम साइज (कम से कम 100-120 वर्ग फीट) और मरीजों के बैठने की अलग व्यवस्था होनी अनिवार्य है.
- लोकल बॉडी परमिशन: क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन और लोकल म्युनिसिपल अथॉरिटी से NOC लेना अनिवार्य है.
पॉलीक्लिनिक (Polyclinic) मॉडल: लागत घटाने का स्मार्ट हैक
शुरुआत में क्लिनिक का भारी किराया और इंफ्रास्ट्रक्चर संभालना नए प्रोफेशनल्स के लिए मुश्किल होता है. इसके लिए ‘शेयरिंग स्पेस मॉडल’ अपनाएं. आप किसी पैथोलॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर या रिटेल फार्मेसी के साथ टाई-अप करके सुबह या शाम के स्लॉट में अपनी ओपीडी (OPD) शुरू कर सकते हैं. 3-4 अलग-अलग पैथी या स्पेशलाइजेशन के डॉक्टर मिलकर भी एक पॉलीक्लिनिक खोल सकते हैं. इससे शुरुआती लागत 60-70% तक कम हो जाती है.

