Mamata Banerjee in Supreme Court: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. उससे पहले एसआईआर पर घमासान जारी है. पश्चिम बंगाल का एसआईआर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. बंगाल में एसआईआर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ दायर याचिका के पक्ष में अपने वकीलों की फौज के साथ खुद दलील देने पहुंची थीं. ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया को उत्पीड़न का हथियार बताया. जबकि चुनाव आयोग ने SIR वोटर लिस्ट को साफ करने के लिए ज़रूरी है. सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने ममता बनर्जी ने बोलने देने की गुहार लगाई थी. सीजेआई ने भी उन्हें दलील रखने का मौका दिया.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार हुआ, जब कोई महिला मुख्यमंत्री अपनी दलील रखने के लिए खुद कोर्ट में मौजूद थी. ममता बनर्जी लॉ ग्रेजुएट हैं. और शायद सुप्रीम कोर्ट में खुद पेश होकर बहस करने वाली पहली मुख्यमंत्री बन चुकी हैं. ममता बनर्जी ने करीब 20 मिनट तक सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को देखा. पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में SIR में अनियमितताओं पर पश्चिम बंगाल के वकील श्याम दीवान की बात सुनी. ममता बनर्जी उन्हें बोले दिए जाने का इंतजार करती दिखीं. इस दौरान ममता बनर्जी को टीएमसी के कल्याण बनर्जी से यह कहते हुए सुना गया, ‘बोलबो तो आज (मैं आज बोलूंगी).’
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को ममता बनर्जी के इंतजार के सब्र का बांध टूट गया. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच और चुनाव आयोग के वकील डी एस नायडू के बीच बातचीत के दौरान ममता बनर्जी ने कई बार दखल देने की नाकाम कोशिश की. आखिरकार वह और इंतज़ार नहीं कर सकीं और कहा, ‘सर…मुझे अनुमति दें सर. कृपया मुझे अपनी बात पूरी करने दें…SIR प्रक्रिया केवल (वोटरों को) हटाने के लिए है, शामिल करने के लिए नहीं.’ ममता ने कहा कि जो काम 2 साल में होता है, उसे 3 महीने में क्यों करते हैं?
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में SIR प्रोसेस का विरोध करते हुए CM ममता बनर्जी ने कहा, ‘नाम में सिर्फ़ टाइटल में ही गड़बड़ी नहीं है…वे उन बेटियों के नाम हटा रहे हैं जो शादी के बाद ससुराल जाती हैं (पता बदल जाता है), वह टाइटल क्यों बदल रही है (इसे नाम में बदलाव के तौर पर कैटेगरी में रखा गया है) और पति का टाइटल इस्तेमाल कर रही है, यह एक गड़बड़ी है.’
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ये नाम हटाने का आधार कभी नहीं हो सकते. ममता बनर्जी ने जवाब दिया, ‘कुछ बेटियां जो ससुराल चली गईं, उनके नाम हटा दिए गए. यह सब एकतरफा है. जो लोग ट्रांसफर हुए हैं या जिनका पता बदला है… उन्हें लॉजिकल विसंगति (लिस्ट) में रखा गया है. उन्होंने यानी चुनाव आयोग ने उल्लंघन किया… क्या वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर सकते हैं? बंगाल के लोग बहुत खुश थे, जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आधार कार्ड दस्तावेजों में से एक होगा. लेकिन वे इसे लागू नहीं कर रहे हैं. वे असली दस्तावेजों को अनुमति नहीं देते हैं. सिर्फ बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है.’
एसआईआर विवाद: ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की नई अर्जी, अपना पक्ष खुद रखने की इजाजत मांगी
ममता बनर्जी ने रिवीजन प्रक्रिया को टालने के लिए बहस की. उन्होंने कहा, एसआईआर 24 साल बाद हो रहा है… इतनी जल्दी क्या है? जो काम दो साल में होता है, उसे तीन महीने में क्यों किया जा रहा है. त्योहारों का मौसम है, कटाई का मौसम है… जब लोग शहर में रहने के मूड में नहीं हैं और अपने घरों को जाना चाहते हैं, उस समय वे नोटिस जारी कर रहे हैं.’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि BLOs सहित 100 से ज़्यादा लोग एसआईआर की वजह से मर गए. सीजेआई के सामने ममता ने कहा कि 100 से ज़्यादा लोग मर गए, सर. बीएलओ मर गए और उन्होंने पत्र लिखकर कहा है कि मेरे आत्महत्या के लिए CEO (राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी) ज़िम्मेदार हैं. 100 से ज़्यादा लोग मर गए और इतने सारे लोग अस्पताल में भर्ती हुए. पश्चिम बंगाल को परेशान किया जा रहा है. असम को क्यों नहीं.’
इस पर चुनाव आयोग के वकील नायडू ने ममता बनर्जी को बीच में रोकते हुए कहा कि राज्य सरकार की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने उन्हें रोका और कहा, ‘मैम इतनी दूर से कुछ कहने आई हैं.’ सीजेआई ने काह, ‘मैम ममता, मुझे आपको कुछ बातें साफ़ करने दीजिए. आधार कार्ड के बारे में SIR की वैधता के मुद्दे पर दो महीने से ज़्यादा समय तक बहस हुई और फ़ैसला सुरक्षित रखा गया है. इसलिए हम आधार कार्ड की विश्वसनीयता, प्रमाणिकता और स्वीकार्यता के बारे में किस हद तक टिप्पणी नहीं कर सकते. आप यह भी मानेंगी कि जब आप उस संबंध में कानून पढ़ेंगे तो आधार कार्ड की अपनी सीमाएं हैं. साथ ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में इसे शामिल करने का मुद्दा, इसका क्या मूल्य होगा, यह हमें अभी तय करना है.’

