Kal Ka Mausam Update: दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भीषण गर्मी और भयंकर लू से बड़ी राहत मिल चुकी है. पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने से देश की राजधानी का तापमान अब काफी कम हो गया है. मौसम विभाग के अनुसार इस पूरे हफ्ते दिल्ली और आसपास के इलाकों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना रहेगा. दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश ने भयंकर तबाही मचा रखी है. असम और मेघालय के कई जिलों में रिकॉर्ड तोड़ बरसात दर्ज की गई है. मेघालय के मावसिनराम में तो सिर्फ चौबीस घंटे में 530 मिलीमीटर पानी बरस गया है. मौसम वैज्ञानिकों ने देश के कई अन्य राज्यों में भी भारी बारिश और बिजली गिरने का बड़ा अलर्ट जारी कर दिया है. दक्षिण भारत के तमिलनाडु और चेन्नई में भी अगले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है.
दिल्ली-एनसीआर को पश्चिमी विक्षोभ ने बचा लिया!
दिल्ली और पूरे एनसीआर के लोगों को पिछले कई हफ्तों से चुभने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा था. अब वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है. आसमान में बादलों की लगातार आवाजाही से तेज धूप का असर बहुत कम हो गया है. मौसम विभाग के नए बुलेटिन के अनुसार लोगों को भीषण गर्मी और लू से बड़ी राहत मिल चुकी है.
दिल्ली के साथ नोएडा और गाजियाबाद में भी ठंडी हवाएं चल रही हैं. गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है. लोकल वेदर एक्टिविटीज के कारण दिल्ली के आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे. इस वजह से दोपहर के समय चलने वाली गर्म हवाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पूरे सप्ताह लू चलने की कोई संभावना नहीं है. दिल्ली के लोगों के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि जून के महीने में पारा अक्सर 45 डिग्री के पार चला जाता था. इस बार पश्चिमी विक्षोभ ने समय पर आकर लोगों को झुलसने से बचा लिया है.
दिल्ली के लिए अगले पांच दिनों का क्या अनुमान है? मौसम विभाग ने बताया
भारतीय मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए अगले पांच दिनों का पूरा डेटा जारी किया है. इस पूरे सप्ताह अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही सीमित रहने का अनुमान है. मौसम विभाग ने फिलहाल दिल्ली के लिए किसी भी तरह की कोई गंभीर चेतावनी जारी नहीं की है.
- 23 जून को दिल्ली का अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने वाला है. इसके अगले दिन यानी 24 जून को पारा और अधिक गिर सकता है. उस दिन अधिकतम तापमान 39 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है.
- 25 जून को भी मौसम का मिजाज बिल्कुल ऐसा ही बना रहेगा. उस दिन भी आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे जिससे उमस से थोड़ी राहत मिल सकती है.
- इसके बाद 26 और 27 जून को तापमान में मामूली बढ़त देखने को मिल सकती है. इन दिनों अधिकतम तापमान फिर से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है.
- 27 जून को हवा में मैक्सिमम ह्यूमिडिटी यानी आर्द्रता लगभग 55 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. 28 जून को भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जाएगा जिससे राहत बनी रहेगी.
मेघालय में भारी बारिश ने तोड़ा रिकॉर्ड
उत्तर भारत में जहां गर्मी से राहत मिल रही है वहीं पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी बारिश आफत बन चुकी है. मेघालय के मावसिनराम में पिछले चौबीस घंटे के दौरान रिकॉर्ड तोड़ बरसात दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार मावसिनराम में एक ही रात में 530 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है. मौसम विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि मावसिनराम में एक रात में हुई यह बारिश जोधपुर या बीकानेर जैसे सूखे शहरों में छह महीने में होने वाली कुल बारिश के बराबर है.
इस भयंकर बारिश के कारण पूरे इलाके में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है. इसी तरह सोहरा में भी 470 मिलीमीटर और मावकिरवाट में 390 मिलीमीटर पानी बरसा है. लगातार हो रही इस मूसलाधार बारिश के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है. शिलांग को भारत-बांग्लादेश सीमा से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह टूट गया है. हाईवे टूटने के कारण गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है. प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है लेकिन लगातार हो रही बारिश काम में बाधा डाल रही है.
पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में मानसून का क्या असर दिख रहा है?
पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में इस समय मानसून पूरी तरह एक्टिव मोड में आ चुका है. असम और मेघालय के अलावा त्रिपुरा और नागालैंड में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी है. त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में चौबीस घंटे के भीतर 102.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. इतनी अधिक बारिश के कारण अगरतला शहर के कई प्रमुख रास्तों पर पानी भर गया है. शहर का ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है.
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 28 जून तक पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यापक स्तर पर भारी बारिश होती रहेगी. असम के कई जिलों में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. नदियों का जलस्तर तेजी से ऊपर बढ़ रहा है जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है. मौसम विभाग ने नागालैंड और मणिपुर के लिए भी स्पेशल अलर्ट जारी किया है. मिजोरम में भी आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश के साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान है.
अरुणाचल प्रदेश में बिजली गिरने और भारी बारिश का अलर्ट
- अरुणाचल प्रदेश के मौसम विज्ञान केंद्र ने जिला स्तर पर मौसम की गंभीर चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग के अनुसार अरुणाचल के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भारी आशंका है.
- पश्चिम कमेंग और पूर्वी कमेंग जिलों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बरसात हो सकती है. इसके साथ ही पापुम पारे और पश्चिम सियांग में भी मौसम का मिजाज बहुत खराब रहने वाला है. निचली दिबांग घाटी और लोहित जिलों में भी बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी किया गया है.
- प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अपने घरों से बाहर न निकलें. ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की विशेष सलाह दी गई है. बुधवार और गुरुवार को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में ऐसा ही खराब मौसम रहने वाला है.
- ऊपरी सियांग और चांगलांग जिलों में भी तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है. पहाड़ी रास्तों पर लैंडस्लाइड यानी भूस्खलन का भी बड़ा खतरा बना हुआ है.
तमिलनाडु के लोगों को क्यों सावधान रहने को कहा गया?
दक्षिण भारत की बात करें तो तमिलनाडु में भी मौसम का मिजाज तेजी से करवट ले रहा है. चेन्नई के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले दो दिनों के लिए राज्य के कई हिस्सों में मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है. राजधानी चेन्नई में इस समय अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है. तापमान बढ़ने के साथ ही हवा में उमस का लेवल बहुत अधिक बढ़ गया है. दोपहर के समय अत्यधिक उमस के कारण लोगों को बहुत ज्यादा बेचैनी महसूस हो रही है. मौसम विभाग ने सलाह दी है कि लोग अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें. दोपहर के सबसे गर्म समय में सीधी धूप में जाने से बचने की सलाह दी गई है.
हालांकि राहत की बात यह है कि बीच-बीच में होने वाली हल्की बारिश गर्मी से थोड़ी राहत जरूर देगी. मौसम विभाग ने 25 जून को तिरुवल्लूर और कांचीपुरम जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. चेंगलपट्टू और रानीपेट जिलों के लोगों को भी मौसम के अपडेट पर नजर रखने को कहा गया है. 26 जून को नीलगिरी और कोयंबटूर जैसे पहाड़ी इलाकों में भयंकर बारिश का अलर्ट है.
देश के बाकी हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून कब तक दस्तक देगा?
- देश के बाकी राज्यों के लिए भी मौसम विभाग की तरफ से एक अच्छी खबर सामने आई है. लगभग एक हफ्ते तक शांत रहने के बाद अब दक्षिण-पश्चिम मानसून फिर से आगे बढ़ने के लिए तैयार है. मौसम विभाग के अनुसार मानसून इस सप्ताह के मध्य में देश के पश्चिमी तट और पूर्वी भारत के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ेगा.
- महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ और हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं. ओडिशा और झारखंड के लोगों को भी मानसूनी बारिश के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
- बिहार और छत्तीसगढ़ में भी 23 जून के आसपास मानसून के दस्तक देने की पूरी संभावना बनी हुई है. इससे पहले अरब सागर वाली मानसून की ब्रांच आठ जून को दक्षिण कोंकण तक पहुंची थी. उसके बाद से मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई थी.
- महाराष्ट्र में मानसून के पहुंचने में इस बार काफी देरी दर्ज की गई है. सामान्य तौर पर 15 जून तक मानसून पूरे महाराष्ट्र को कवर कर लेता है. इस देरी के कारण कई इलाकों में किसानों की चिंताएं बढ़ गई थीं लेकिन अब मानसून की वापसी से राहत मिलेगी.
किन राज्यों में अभी भी हीटवेव का सितम जारी रहने वाला है?
भले ही देश के कई हिस्सों में मानसून आगे बढ़ रहा है लेकिन कुछ इलाकों में अब भी हीटवेव यानी लू का कहर जारी है. महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र इस समय भयंकर गर्मी की चपेट में है. विदर्भ में सामान्य से पांच से सात डिग्री अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है. पिछले दिनों महाराष्ट्र का ब्रह्मपुरी और उत्तर प्रदेश का बांदा जिला देश में सबसे गर्म स्थान रहे थे. इन दोनों जगहों पर अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था.
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में 25 जून तक लू का प्रकोप बना रह सकता है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में भी 24 जून तक लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा. विदर्भ क्षेत्र में 24 जून तक सीवियर हीटवेव यानी अत्यधिक गंभीर लू चलने का रेड अलर्ट जारी किया गया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे ही मानसून इन राज्यों में आगे बढ़ेगा वैसे ही तापमान में तेजी से गिरावट आएगी. तब तक लोगों को सावधानी बरतने और दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सख्त जरूरत है.
मानसून की देरी से खेती और फसलों पर क्या असर पड़ रहा है?
देश में मानसून की चाल का सीधा असर हमारी खेती और फसलों पर पड़ता है. इस साल महाराष्ट्र और मध्य भारत के कई हिस्सों में मानसून की एंट्री काफी लेट हो गई है. इस देरी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई का काम काफी पिछड़ गया है. किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बादलों के बरसने का इंतजार कर रहे हैं. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि देरी के बावजूद इस बार देश में नॉर्मल मानसून रहने की पूरी उम्मीद है.
अलनीनो का प्रभाव इस बार पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों पर ज्यादा नहीं पड़ेगा. इसका सबसे बड़ा कारण वहां का घना जंगल और विशेष भौगोलिक बनावट है. मध्य भारत में मानसून के एक्टिव होने से फसलों को नया जीवन मिलेगा. पानी की कमी से जूझ रहे जलाशयों का वाटर लेवल भी तेजी से सुधरने लगेगा. कृषि एक्सपर्ट्स ने किसानों को सलाह दी है कि वे मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद ही बुवाई शुरू करें.

