नई दिल्ली. कालीघाट से निकले एक आदेश ने पश्चिम बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया है. विधानसभा चुनाव में हार का ‘हंटर’ ऐसा चला कि पश्चिम बंगाल में बारसात की सांसद काकली घोष के पंख कतर दिए गए और उनकी जगह फिर से पुराने सिपाही कल्याण बनर्जी की ताजपोशी हो गई. लेकिन इस बदलाव के बाद काकली का सोशल मीडिया पर फूटा दर्द महज एक पोस्ट नहीं बल्कि ममता बनर्जी की पॉलिटिक्स पर सीधा हमला माना जा रहा है. उन्होंने ममता पर ‘यूज एंड थ्रो’ का सीधा आरोप लगाया. उन्होंने पूछा, ‘मैं आपसे 76 में मिला था, 84 में अपना सफ़र शुरू किया था. आज मुझे 4 दशकों की वफ़ादारी का इनाम मिला.’. जब गढ़ ढहते हैं तो बलि भी अपनों की ही दी जाती है. टीएमसी के इस नाटकीय फेरबदल ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में ‘वफादारी’ की एक्सपायरी डेट अब परफॉर्मेंस तय करती है!
टीएमसी में बदलाव के मुख्य प्वाइंट्स
· पुराने चावल पर भरोसा: अगस्त 2025 में इस्तीफा देने वाले कल्याण बनर्जी की 9 महीने बाद मुख्य सचेतक के पद पर वापसी हुई है.
· काकली का इनाम: पद से हटाए जाने के बाद काकली घोष दस्तीदार ने लिखा— “1976 से परिचय, 1984 से साथ चलना शुरू… चार दशक की वफादारी के लिए आज मुझे पुरस्कृत किया गया.” यह तंज सीधे तौर पर ममता बनर्जी के फैसले पर है.
· अभिषेक का कद: 2025 में सुदीप बनर्जी की जगह अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में दल नेता बनाया गया था लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद समीकरण फिर बदलते दिख रहे हैं.
· खराब प्रदर्शन की सजा: उत्तर 24 परगना टीएमसी का गढ़ माना जाता था, वहां 33 में से केवल 9 सीटें मिलने का खामियाजा काकली को भुगतना पड़ा है.
क्यों हटीं काकली और क्यों लौटे कल्याण?
1. चुनावी विफलता का ठीकरा: उत्तर 24 परगना और खासकर काकली के संसदीय क्षेत्र बारसत के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने भारी बढ़त बनाई है. ममता बनर्जी ने इस हार का जिम्मेदार स्थानीय नेतृत्व और संसद में समन्वय की कमी को माना है.
2. भरोसेमंद संकटमोचक: कल्याण बनर्जी न केवल एक वरिष्ठ नेता हैं, बल्कि एक मंझे हुए वकील भी हैं. कई कानूनी लड़ाइयों में उन्होंने ममता बनर्जी का ढाल बनकर साथ दिया है. महुआ मोइत्रा के साथ विवाद के समय उन्होंने पद छोड़ा था, लेकिन अब पार्टी को फिर से उनके जैसे ‘आक्रामक’ नेता की जरूरत महसूस हुई.
3. वफादारी बनाम प्रदर्शन: काकली घोष दस्तीदार का सोशल मीडिया पोस्ट संकेत देता है कि पार्टी के भीतर ‘पुराने गार्ड’ और ‘नए नेतृत्व’ के बीच तालमेल की कमी है. 40 साल की वफादारी के बाद पद से हटाया जाना टीएमसी के भीतर एक नई अंतर्कलह को जन्म दे सकता है.
सवाल-जवाब
लोकसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक पद पर क्या बदलाव हुआ है?
ममता बनर्जी ने बारसत की सांसद काकली घोष दस्तीदार को हटाकर अनुभवी सांसद कल्याण बनर्जी को दोबारा मुख्य सचेतक नियुक्त किया है.
काकली घोष दस्तीदार ने सोशल मीडिया पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि 1984 से पार्टी के प्रति उनकी चार दशकों की वफादारी के बदले उन्हें यह ‘इनाम’ (पद से हटाना) मिला है.
कल्याण बनर्जी ने यह पद पहले क्यों छोड़ा था?
अगस्त 2025 में कल्याण बनर्जी ने महुआ मोइत्रा के साथ हुए सार्वजनिक विवाद के बाद अचानक इस्तीफा दे दिया था, जिसे अब 9 महीने बाद वापस ले लिया गया है.
क्या अभिषेक बनर्जी अभी भी लोकसभा में पार्टी के नेता हैं?
हाँ, 2025 के फेरबदल में सुदीप बनर्जी की जगह अभिषेक बनर्जी को दल नेता बनाया गया था. फिलहाल फोकस मुख्य सचेतक के पद पर हुआ है.
टीएमसी के इस बड़े फेरबदल की मुख्य वजह क्या मानी जा रही है?
हालिया विधानसभा चुनावों में उत्तर 24 परगना जैसे मजबूत किलों में पार्टी की करारी हार और संगठन को फिर से मजबूत करने की ममता बनर्जी की कोशिश इसकी मुख्य वजह है.

