Agency:एजेंसियां
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Justice Surya Kant Judgments: जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को भारत के 53वें CJI बनने जा रहे हैं. आर्टिकल 370, राजद्रोह कानून पर रोक, पेगासस जांच और चुनावी पारदर्शिता जैसे कई बड़े राष्ट्रीय मामलों में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई है. जेंडर जस्टिस और नागरिक अधिकारों पर भी उनके फैसले बेहद प्रभावशाली रहे हैं. इस खबर में पढ़िए उनके 5 अहम और बड़े फैसले.
जस्टिस सूर्यकांत भारत के 53वें CJI बनने जा रहे हैं. (फोटो PTI)Justice Surya Kant 5 Judgments: भारत आज यानी सोमवार को अपने नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) का स्वागत करेगा. जस्टिस सूर्यकांत, जिनका नाम कई ऐतिहासिक और गहराई से जुड़े संवैधानिक फैसलों के लिए जाना जाता है. आर्टिकल 370 के फैसले से लेकर पेगासस की जांच, राजद्रोह कानून सस्पेंड करने से लेकर जेंडर जस्टिस तक. जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक सफर हमेशा बड़े राष्ट्रीय मुद्दों के केंद्र में रहा है. यही वजह है कि उनके CJI बनने से पहले ही उनके महत्वपूर्ण निर्णय एक बार फिर सुर्खियों में हैं.
जस्टिस सूर्यकांत अपने हर फैसले में कानून की आत्मा को केंद्र में रखते हैं. (फाइल फोटो PTI)
जस्टिस सूर्यकांत: संवैधानिक मामलों में निर्णायक भूमिका
सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने कई ऐसे फैसलों पर काम किया जिन्होंने न सिर्फ कानून बल्कि राष्ट्रीय विमर्श को भी प्रभावित किया. इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिक स्वतंत्रता, चुनावी पारदर्शिता, न्यायिक संघवाद और लैंगिक समानता जैसे क्षेत्र शामिल रहे.
5 बड़े फैसले जिनके लिए याद रखे जाएंगे जस्टिस सूर्यकांत
- आर्टिकल 370 फैसला: जस्टिस सूर्यकांत उस बेंच का हिस्सा थे जिसने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखा. यह हाल के वर्षों का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसला माना गया, जिसने केंद्र-राज्य संबंधों और राष्ट्रीय एकीकरण पर स्थायी प्रभाव छोड़ा.
- राजद्रोह कानून (124A) को सस्पेंड करने वाला आदेश: उन्होंने उस बेंच में अहम भूमिका निभाई जिसने राजद्रोह कानून पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया कि सरकार इसके पुनरीक्षण तक 124A के तहत नई FIR दर्ज न करें. इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बड़े कदम के रूप में देखा गया.
- पेगासस स्पाइवेयर केस: पेगासस जासूसी मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने बेंच में रहते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राज्य को फ्री पास नहीं दिया जा सकता. इसके बाद कोर्ट ने साइबर विशेषज्ञों की स्वतंत्र कमेटी गठित की.
- बिहार इलेक्टोरल रोल्स- 65 लाख वोटरों की पारदर्शिता: एक अन्य महत्वपूर्ण आदेश में उन्होंने चुनाव आयोग से 65 लाख हटाए गए वोटरों का पूरा विवरण साझा करने का निर्देश दिया. यह चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की दिशा में अहम निर्णय था.
- जेंडर जस्टिस और लोकल गवर्नेंस: अवैध रूप से हटाई गई एक महिला सरपंच को बहाल करने का आदेश. बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 1/3. आरक्षण का ऐतिहासिक निर्देश. महिला अधिकारों और न्यायिक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व पर निर्णायक रुख.
हिसार के जस्टिस सूर्यकांत का सफर आम से खास बनने की मिसाल है. (फाइल फोटो ANI)
न्यायिक दृष्टि की प्रमुख विशेषताएं
- संवैधानिक संतुलन और नागरिक अधिकारों पर जोर
- राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में भी पारदर्शिता की प्राथमिकता
- चुनावी सुधारों और मतदाता अधिकारों पर सख्त रुख
- जेंडर जस्टिस को न्यायिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत माना
- केंद्र–राज्य संबंधों से जुड़े मामलों में स्पष्ट संवैधानिक व्याख्या
अन्य उल्लेखनीय फैसले पर एक नजर
उन्होंने राष्ट्रपति–गवर्नर शक्तियों से जुड़े संवैधानिक प्रश्नों पर भी सुनवाई की, जिसकी रिपोर्ट अभी लंबित है. PM मोदी के पंजाब दौरे के दौरान हुई सुरक्षा चूक की जांच के लिए जस्टिस इंदु मल्होत्रा कमेटी को नियुक्त करने वाले बेंच में भी वे शामिल थे. OROP यानी वन रैंक–वन पेंशन योजना को उन्होंने संविधान सम्मत ठहराया. AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर 1967 के फैसले को पलटने वाली 7-जज बेंच का हिस्सा भी वे थे.
अब CJI के रूप में उनका कार्यकाल क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
क्योंकि आने वाले महीनों में कई बड़े संवैधानिक मामलों की सुनवाई होनी है और इन सभी में जस्टिस सूर्यकांत की पूर्व दृष्टि बताती है कि वे न्याय, पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोच्च मानेंगे.
Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in News18 Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master’s degree in Journalism. Before working in News18 Hindi, …और पढ़ें
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