इम्तियाज अली और अनुपमा चोपड़ा।
9वीं क्लास में फेल होना, जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट: इम्तियाज अली
फेस्टिवल के लास्ट सेशन को लेकर लोगों के काफी क्रेज देखने को मिला। इस दौरान इम्तियाज ने रौचक बात बताते हुए कहा कि ‘मैं 9वीं क्लास में फेल हो गया था, यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, क्योंकि इसने मुझे असफलताओं का सामना करना सिखाया और मैं वो कर पाया, जो मैं करना चाहता था। उन्हाेंने बताया कि मेरे घर के पास में एक थिएटर था, तब ऐसा नहीं होता था। कई बार रात में थिएटर का दरवाजा खुला रहता था। इसकी वजह से मैं स्क्रीन का एक हिस्सा देख पाता था। मैं अमिताभ की नाक, रेखा के कान देख पाता था। मैं देख पाता था कि बाईं तरफ क्या है और दाईं तरफ क्या है। बाद में जब मैंने फिल्में डायरेक्ट करना शुरू किया, तो इससे मुझे बहुत मदद मिली।’
मैं अपनी फिल्मों को बहुत आसान बनाना चाहता हूं
इस दौरान इम्तियाज ने कहा कि मैं अपनी फिल्मों को आसान बनाना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि क्या मैं अपने समय से आगे हूं। मैंने कहा कि मैं ऐसा नहीं करना चाहता। मैं हर वो तरकीब अपनाना चाहता हूं जिससे मेरी फिल्में इस दौर में ही पसंद की जाएं। मैं इसे सरल बनाना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि महाभारत इतनी जटिल है, जबकि मेरी फिल्में उससे ज्यादा सरल हैं। लेकिन अगर इसे समझा जा रहा है, तो मेरी फिल्में भी समझी जानी चाहिए।
इम्तियाज ने खुद का बताया जयपुर से खास कनेक्शन
इस दौरान इम्तिायाज ने कहा कि उनका जयपुर से खास कनेक्शन है। उन्होंने कहा कि मेरे थिएटर के पास जयपुर हेयर कटिंग सैलून था। लोग वहां आते थे और मिथुन की तरह बाल कटवाते थे। मैं उन्हें देखता था और इस तरह जयपुर से मेरा जुड़ाव हो गया। उनकी कई फिल्में ऐसी हैं, जो रिलीज होने पर लोगों को पसंद नहीं आईं, लेकिन बाद में उन्हें पसंद करने वालों ने एक अलग समूह बना लिया। जिससे प्रशंसा और आलोचना दोनों मिलती है। इसलिए जब आलोचना आए तो आपको देखना चाहिए कि क्या यह सही है? क्या आप इससे बेहतर कुछ कर सकते हैं? सफलता की कोई गारंटी नहीं है, इसलिए बस अपना काम करते रहो, किसी भी सफलता या असफलता के बोझ से खुद को मुक्त रखो।

