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Home » All News » Iran Nuclear Deal: ईरान-अमेरिका में न्यूक्लियर समझौते पर बातचीत, ईरान को किस बात का डर? | US- Iran Nuclear Deal: What has Iran discussed with Russia over ‘Nuclear Talk’ with US?
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Iran Nuclear Deal: ईरान-अमेरिका में न्यूक्लियर समझौते पर बातचीत, ईरान को किस बात का डर? | US- Iran Nuclear Deal: What has Iran discussed with Russia over ‘Nuclear Talk’ with US?

HawkNewsBy HawkNewsApril 19, 2025No Comments8 Mins Read
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International

oi-Siddharth Purohit

Time
Published: Saturday, April 19, 2025, 22:47 [IST]

Google Oneindia News

US- Iran Nuclear Deal: अमेरिका और ईरान में दुश्मनी कोई बैकडोर गेम नहीं है। 1979 में जब से ईरान अमेरिका के हाथ से निकला है तब से लेकर आज तक अमेरिका इसे वापस अपने खाते में शामिल करने पर आमादा है। 1979 के बाद से ही सभी ईरानी सरकारें खुलकर अमेरिका की मिडिल ईस्ट को लेकर बनी नीतियों का विरोध करती रहीं है जबकि, अमेरिका सिर्फ विरोध नहीं करता बल्कि समय-समय ईरान को हल्के-भारी डोज देता रहता है। चाहे वो जनवरी 2020 में ईरान की कुद्स फोर्स चीफ कासिम सुलेमानी की हत्या हो, जिसमें ड्रोन अटैक का आरोप अमेरिका पर लगा था या फिर नवंबर 2020 में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम प्रमुख वैज्ञानिक की मोहसेन फखरजादे की हत्या हो। हालांकि फखरजादे की हत्या का सीधा आरोप लगा जरूर मोसाद पर था लेकिन इस प्लान के तार भी अमेरिका से जुड़े थे। तब से लेकर अभी तक अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर एक रस्साकशी चलती रही है। जिसमें आज एक बड़ा अपडेट आया है।

बातचीत सार्थक रही- ईरान

रोम की राजधानी इटली में न्यूक्लियर समझौते को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची मौजूद थे। ईरान ने इन चर्चाओं को सार्थक बताया है। इसी चर्चा की अगली बैठक शनिवार को होनी है। जिसमें दोनों देशों के बीच बड़े फैसले हो सकते हैं।

US- Iran Nuclear Deal

ईरान ने रूस को अमेरिका के बारे में क्या बताया?

इससे पहले, ईरानी विदेश मंत्री अराकची ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ बातचीत की। अपनी बातचीत के दौरान, अराकची ने अमेरिकी इरादों के बारे में रूसी विदेश मंत्री से कई तरह की आशंकाएं जताते हुए कहा कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा नहीं है। बावजूद इसके ईरान अमेरिका से बातचीत करेगा।
पिछले एक दशक में अमेरिका और ईरान के बीच पहली ऑफिशियल बातचीत 12 अप्रैल को ओमान में हुई थी, जिसकी मध्यस्थता ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने की थी। हालांकि इसके नतीजे कुछ खास नहीं रहे थे।

ईरान न्यूक्लियर प्रोग्राम की जिद छोड़ने धमकी दे चुके ट्रंप

अमेरिका और ईरान के बीच हुई इस बातचीत में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची शामिल जरूर हुए थे लेकिन अभी तक ये जानकारी बाहर आना बाकी है कि दोनों की एक-दूसरे से सीधी बात हुई या नहीं हालांकि, डोनाल्ड ट्रम्प ईरान को अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को न छोड़ने को लेकर पहले से धमकाते आए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के मुताबिक, ईरान को न्यूक्लियर हथियार प्राप्त करने से रोकना ट्रम्प की लिस्ट में टॉप पर है। लेविट ने पिछले सप्ताह एक प्रेस ब्रीफिंग में ट्रम्प रुख के बारे में बताते हुए कहा था कि ईरान से निपटने के लिए सभी विकल्प मौजूद हैं। मतलब साफ था, या तो अमेरिका की बात मानें या गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें।

2 महीने में हां करें या फिर….भुगते

पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने ईरान को नए न्यूक्लियर समझौते पर सहमत होने के लिए 60 दिन का समय दिया है। अगर इस बीच ईरान, अमेरिका की बात से सहमत नहीं होता है तो उसे अमेरिका का आक्रोश झेलना होगा। यह चेतावनी एक लैटर के जरिए ईरान के सुप्रीम लीडन अयातुल्ला अली खामेनेई को दी गई थी। लैटर में साफ-साफ लिखा था कि तेहरान को वाशिंगटन के साथ बातचीत करने के लिए तैयार रहना चाहिए, चाहे वह डायरेक्ट हो या इनडायरेक्ट। और यदि ईरान ऐसा नहीं करता है तो खामेनेई की सरकार पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

ईरान को हमले की धमके दे चुके हैं डोनाल् ट्रंप

अमेरिकी न्यूज चैनल एनबीसी न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने ईरान को उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि समझौता ना मानने पर अमेरिका ईरान पर स्ट्राइक कर सकता है। उन्होंने संभावित सैन्य कार्रवाई की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि यह कार्रवाई ऐसी होगी कि ईरान ने पहले कभी नहीं देखी होगी। ट्रंप का यह बयान ईरान पर दबाव और यह बताने के लिए काफी था कि अगर डील निगेटिव रहती है तो क्या हो सकता है।

दोहरे खतरे बीच में झूलता ईरान

ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए ट्रंप ने सेकंडरी टैरिफ को फिर से लागू करने की संभावना का भी जिक्र किया, जो चार साल पहले लगाए गए टैरिफ की याद दिलाता है। अगर ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम में अमेरिका की बातों को नहीं मानता है तो उसे आर्थिक पाबंदियां और सैन्य कार्रवाई दोनों के खतरे उठाने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने अपने 30 मार्च वाले बयान में भी इस तरह के ही ऐलान किए थे। ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी सहमती से बाहर जाकर अपनी न्यूक्लियर क्षमताओं को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए ट्रंप सरकार के सख्त रुख को दिखाता है। दोनों देशों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण है, लेकिन चर्चाओं की बारीकियों का खुलासा नहीं किया गया है।

ईरान के पास इतना यूरेनियम कि बना सकता है आधा दर्जन बम

2018 में ट्रंप द्वारा ईरान के साथ न्यूक्लियर समझौते को रद्द करने के बाद ईरान की न्यूक्लियर हथियार बनाने की क्षमता में कथित तौर पर वृद्धि हुई है। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने साफ किया है कि ईरान ने 60% शुद्धता तक 275 किलोग्राम यूरेनियम का उत्पादन कर चुका है। यूरेनियम की इतनी मात्रा छह न्यूक्लियर बम बनाने के लिए पर्याप्त है, जो बताता है ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को दरकिनार कर अपनी न्यूक्लियर क्षमता बढ़ाई है।

अमेरिका-इजरायल मिलकर कर सकते हैं हमला

अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते के न होने की स्थिति में इस बात की संभावना है कि इस साल के आखिरी तक, अमेरिका, इज़रायल या दोनों ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला करने का फैसला कर सकते हैं। यह संभावित कार्रवाई ईरान की बढ़ी हुई न्यूक्लियर क्षमताओं और समझौतों को ना मानने से उपजी है। अमेरिका, इज़राइल और अरब देशों के सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प से कुछ और महीनों तक बातचीत की प्रक्रिया जारी रखने की उम्मीद है।

ट्रम्प ने नेतन्याहू को भी दी समझाइश

एक इजराइली सूत्र ने द इकोनॉमिस्ट से कहा कि ट्रम्प ने नेतन्याहू को अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर डील पर बातचीत के दौरान कोई गड़बड़ी न करने की चेतावनी दी है। मतलब जब तक बात चल रही है तब तक किसी किस्म का हमला इजरायल, ईरान पर ना करे। अमेरिका को ये बात इसलिए कहना पड़ी क्योंकि इजराइल ने बीते अक्टूबर में‎ ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में उसके एयर डिफेंस नेटवर्क को तबाह कर दिया था।

ट्रंप के खिलाफ जाना नेतन्याहू के पड़ेगा महंगा!

एक‎ इजराइली सैनिक अधिकारी ने कहा कि ईरान ‎इस समय बहुत ज्यादा कमजोर है। पहले नेतन्याहू ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले ‎का आदेश देने से हिचक रहे थे। अब ट्रम्प को ‎‎छोड़कर उनके पास पीछे हटने का कोई कारण ‎नहीं है।
सनद रहे कि इजराइली प्रधानमंत्री ने कई बार अमेरिकी राष्ट्रपतियों की मर्जी के ‎खिलाफ जाकर हमले किए हैं जिससे उन्हें उनके देश में लोकप्रियता हासिल की‎ है। लेकिन इस बार कमान ट्रंप के पास है और ट्रम्प की इच्छा के खिलाफ जाना बेहद ‎मुश्किल है।‎

1953 से चली आ रही ईरान अमेरिका की दुश्मनी

अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संबंधों की गहरी ऐतिहासिक जड़ें हैं। इसकी शुरुआत
1. 1953 में हुई जब ब्रिटिश समर्थन से सीआईए ने ईरान में तख्तापलट की साजिश रची। जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादिक को हटा दिया गया, जिनका मकसद तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण करना था। नतीजतन शाह रजा पहलवी को नेता के रूप में स्थापित किया गया, जिससे ईरान दो विचारधाराओं में बंटता चला गया।
2. 1979 में, अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी की ईरान में लहर आई। उन्होंने पश्चिमी प्रभावों का विरोध किया और ईरान की अमेरिका पर निर्भरता की आलोचना की। उनके नेतृत्व में, शाह पहलवी के खिलाफ असंतोष बढ़ता गया, जिससे रजा पहलवी को देश छोड़कर भागना पड़ा। खोमेनेई 1 फरवरी 1979 को वापस ईरान लौटे और मॉर्डन बन रहा ईरान कट्टरता में झुलसता चला गया।
3. 1979 में ही ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़ा कूटनीतिक संकट भी देखने को मिला। ईरानी छात्रों ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्ज़ा कर लिया और 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इस घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया। इसी दौरान, इराक ने अमेरिकी समर्थन से ईरान पर हमला किया। यह जंग आठ साल तक चली, जिससे ईरान और अमेरिका के बीच संबंध और भी खराब हो गए।
4. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में 2015 में संबंधों को सुधारने के प्रयासों में कुछ कोशिशें हुई। एक न्यूक्लियर समझौता हुआ, जिसके तहत ईरान ने आर्थिक प्रतिबंधों में कमी के बदले अपनी न्यूक्लियर गतिविधियों को सीमित करने पर सहमति जताई। हालांकि, यह समझौता अल्पकालिक था क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पदभार ग्रहण करने के बाद इसे खत्म कर दिया, जिससे दुश्मनी फिर चरम पर पहुंच गई।
इन दोनों देशों के बीच जटिल इतिहास तख्तापलट, क्रांति, बंधक संकट, युद्ध और अस्थिर कूटनीतिक प्रयासों से चिह्नित है। न्यूक्लियर समझौते जैसे समझौतों के माध्यम से सुलह के प्रयासों के बावजूद, स्थायी तनाव उनके संबंधों को आकार देना जारी रखते हैं।
इस खबर पर आपकी क्या राय है हमें कॉमेंट में जरूर बताएं।

ये भी पढ़ें: Indian Student In US: ट्रंप का फरमान, 11 लाख छात्रों का वीजा हो सकता है रद्द, सबसे ज्यादा भारतीय छात्रों पर संकट

ये भी पढ़ें: Pakistan Selling PIA : बिकने को पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन (PIA), पर कोई नहीं खरीद रहा!

English summary

US- Iran Nuclear Deal: What has Iran discussed with Russia over ‘Nuclear Talk’ with US?

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