महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के तिसगांव इलाके में एक पिता और पुत्र की खाई में गिरने से मौत हो गई. जब कुणाल पहाड़ी से कूदने की धमकी दे रहा था, तभी उसके पिता मुरलीधर ने उसे बचाने की कोशिश की और दोनों ही खाई में गिर गए. ये दृश्य देखकर मां संगीता भी खाई में कूद गईं. शुरुआत में खबरें थीं कि कुणाल आईफोन लेने की जिद पर अड़ा था और इसी बात को लेकर पिता पुत्र के बीच झगड़ा हुआ था. अब इस मामले में पुलिस जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है. डीसीपी रत्नाकर नवल ने साफ किया है कि शुरुआती जांच में आईफोन को आत्महत्या का कारण नहीं पाया गया है. उनके अनुसार, कुणाल मानसिक तनाव से ग्रस्त था.
पुलिस ने क्या बताया?
डीसीपी रत्नाकर नवल ने इस मामले में कहा, ‘112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची. स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद थे. दमकल विभाग को भी बुलाया गया. एम्बुलेंस भी बुलाई गई. पुलिस ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी. युवक बहुत तनाव में था. प्रारंभिक जांच में कहीं भी यह बात सामने नहीं आई कि युवक ने आईफोन के लिए आत्महत्या की.’
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का सटीक कारण पता नहीं चल सका है. असली कारण पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा. फिलहाल, मृतक युवक और उसके परिवार का कोई भी सदस्य जीवित नहीं है. इसलिए, सच्चाई सामने आने में कुछ समय लग सकता है. घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि कुणाल तनाव में था. मौके पर मौजूद लोग उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे.
गांव के पूर्व सरपंच ने क्या कहा?
दूसरी ओर, घटना के प्रत्यक्षदर्शी और पूर्व सरपंच संजय जाधव ने कहा कि कुणाल ने आईफोन मांगने जैसी कोई बात नहीं की थी. दरअसल, कुणाल के पास पहले से आईफोन था. संजय जाधव ने कुणाल को नीचे आने के लिए समझाने की कोशिश भी की, लेकिन कुणाल ने किसी की बात नहीं सुनी.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चंदगुडे परिवार में वर्षों से कलह चल रही थी. मुरलीधर चंदगुडे और संगीता चंदगुडे के दो बच्चे थे. मुरलीधर चंदगुडे ट्रक ड्राइवर थे, इसलिए वे ज्यादातर घर से बाहर रहते थे. छह साल पहले उनके बड़े बेटे की बीमारी से मृत्यु हो गई थी. तब से परिवार में कलह चल रही थी. चूंकि मुरलीधर ज्यादातर घर से बाहर रहते थे, इसलिए कुणाल पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं था. रिश्तेदारों का यह भी कहना है कि पिता पुत्र के संबंध अच्छे नहीं थे. पिता दो दिन पहले ही घर लौटे थे. जिसके बाद पिता पुत्र के बीच झगड़ा हुआ और कुणाल ने डूंगर जाकर आत्महत्या कर ली.
‘मेरी जिंदगी का कोई मतलब नहीं’
‘मां, मेरी कोई नहीं सुनता. अब जीने की कोई इच्छा नहीं. मेरी जिंदगी का कोई अर्थ नहीं. मेरा कुछ नहीं होगा.’ ये शब्द महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित खावड्या डूंगर पहुंचे 19 वर्षीय कुणाल चंदगुडे के आखिरी शब्द थे. आत्महत्या करने के इरादे से वह खरी खोटी सुनाने पहुंचा था. इसके बाद, महज पांच सेकंड में, एक खुशहाल पारिवारिक आशियाना बिखर गया. कुणाल को बचाने की कोशिश में उसके पिता मुरलीधर भी 150 200 फीट गहरी खाई में गिर गए. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद कुणाल की मां भी खाई में कूद गईं. इसे रस्म की कुटिलता कहें या कुछ और, लेकिन 92% अंकों के साथ 10वीं की परीक्षा पास करने वाला कुणाल जिंदगी की इस जंग में हार गया.
पिता थे ड्राइवर, पैसों को लेकर हुआ था झगड़ा
अंबड तालुका के धनगर पिंपलवाड़ी का चंदगुडे परिवार पिछले 18 वर्षों से शहर के झालता फाटा इलाके में रह रहा था. पिता मुरलीधर एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में ड्राइवर का काम करते थे. पिता मुरलीधर और बेटे कुणाल के बीच पिछले कुछ दिनों से किसी बात पर कहा सुनी चल रही थी. कुणाल की शिकायत थी कि उसके पिता उसे पर्याप्त जेब खर्च नहीं देते. मोबाइल फोन की बकाया किस्तों को लेकर भी दोनों के बीच कहा सुनी होती रहती थी. शुक्रवार को दोनों के बीच फिर कहा सुनी हुई. जिसके बाद कुणाल घर से भाग गया और खावड्या डूंगर पहुंच गया. सूचना मिलते ही कुणाल के माता पिता भी डूंगर पहुंच गए.
एक साथ पूरा परिवार खत्म
जब वह खवाडिया पहाड़ी पर गईं और देखा कि कुणाल पहाड़ी के किनारे पर खड़ा है. इसके बाद मां संगीता चंदगुड ने उसे समझाने की कोशिश की. मां ने यहां तक कहा कि अगर तुम्हारे पिता से झगड़ा हुआ तो हम उनसे अलग होकर कहीं और रहने चले जाएंगे. इतना ही नहीं, कुणाल की मां ने उसके गले में पहना मंगलसूत्र भी उतारकर फेंक दिया.
कुणाल को विश्वास नहीं हुआ और पूरा परिवार मौत के कगार पर पहुंच गया. मां, पुलिस और अन्य लोग कुणाल को समझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी उसके पिता उसे बचाने के लिए आगे आए. इसी दौरान कुणाल के पिता ने उसे पकड़ने की कोशिश की और उसी समय दोनों का संतुलन बिगड़ गया. दोनों सीधे 150 फीट गहरी खाई में गिर गए. यह दृश्य देखकर कुणाल की मां भी खाई में कूद गई. तीनों की मौके पर ही मौत हो गई.
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