सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान लगातार ही रोना रो रहा है, लेकिन भारत उसकी शिकायतों पर जरा कान नहीं धर रहा है. विश्व बैंक की जिस मध्यस्थता अदालत के निर्देश पर पाकिस्तान बहुत रहा था, भारत सरकार ने उसे सिरे से खारिज करके इस्लामाबाद के अरमानों पर पानी फेर दिया. वहीं अब लद्दाख से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो शहबाज शरीफ और असीम मुनीर के सीने पर पत्थर जैसा साबित होगी. दरअसल भारत ने सिंधु नदी पर अपना पहला रॉक चेक डैम तैयार कर लिया है. खास बात यह है कि यह डैम न तो सीमेंट से बना है और न ही कंक्रीट से. बड़े-बड़े पत्थरों को जोड़कर तैयार किए गए इस बांध ने सिंधु नदी के पानी का स्तर करीब 10 फीट तक ऊपर उठा दिया है.
लेह जिले के उप्शी इलाके में बने इस चेक डैम से अब करीब 4 करोड़ लीटर पानी जमा किया जा सकेगा. इस पानी को इगू फे सिंचाई नहर के जरिए उन खेतों तक पहुंचाया जा रहा है, जो लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे थे.
सिंधु बहती थी, लेकिन खेत सूखे रहते थे
लद्दाख के किसानों के सामने सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि उनके पास दुनिया की प्रमुख नदियों में से एक सिंधु मौजूद थी, लेकिन उसका पानी खेतों तक पहुंचाना बेहद मुश्किल था. दरअसल, कई इलाकों में सिंधु नदी गहरी घाटियों के बीच काफी नीचे बहती है. ऐसे में खासकर वसंत के मौसम में बुआई के दौरान पंपों के जरिए नदी से पानी निकालना आसान नहीं था. नतीजा यह होता था कि नदी पास होने के बावजूद खेत पानी के लिए तरसते रहते थे.
पानी की इसी कमी ने खेती को प्रभावित किया और स्थानीय किसानों की आर्थिक मुश्किलें भी बढ़ाईं. अब उप्शी में बने इस रॉक चेक डैम ने तस्वीर बदलने की उम्मीद जगाई है. पानी का स्तर ऊपर उठने के बाद उसे नहरों के जरिए खेतों तक पहुंचाना आसान हो गया है.
4 करोड़ लीटर पानी का सहारा
नया चेक डैम करीब 40 मिलियन लीटर यानी 4 करोड़ लीटर पानी जमा करने की क्षमता रखता है. जमा पानी को इगू फे सिंचाई नहर के माध्यम से सूखे कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है. लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले और शुष्क इलाके में यह केवल पानी जमा करने की परियोजना नहीं है. यह किसानों के लिए बुआई के मौसम में एक नई उम्मीद की तरह है.
प्राकृतिक पत्थरों से तैयार यह ढांचा स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसके जरिए नदी के पानी का स्तर बढ़ाकर उसे सिंचाई योग्य बनाया गया है.
पाकिस्तान से पहले भारत करेगा सिंधु के पानी का इस्तेमाल?
इस परियोजना का महत्व खेती से कहीं आगे भी जाता है. भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव के बीच सिंधु नदी पर भारत का यह कदम रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया हुआ है. ऐसे में सीमा से जुड़े और रणनीतिक रूप से संवेदनशील लद्दाख क्षेत्र में सिंधु नदी के पानी के उपयोग के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करना एक बड़ा संकेत माना जा रहा है.
भारत का संदेश साफ है… नदी का पानी आगे पाकिस्तान की ओर बहने से पहले भारत अपने हिस्से के जल संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए ढांचा तैयार कर रहा है. यह परियोजना किसी बड़े बांध की तरह नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोकने के बजाय स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता बढ़ाने और उसे खेती के लिए उपयोगी बनाने पर केंद्रित है.
अब 36 और परियोजनाओं की तैयारी
उप्शी का रॉक चेक डैम लद्दाख में ऐसी परियोजनाओं की शुरुआत भर हो सकता है. प्रशासन सिंधु नदी और दूसरे जल स्रोतों पर इसी तरह के और ढांचे विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है.
लद्दाख प्रशासन ने केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को 36 चेक डैम परियोजनाओं का प्रस्ताव भेजा है. इनमें लेह क्षेत्र में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम और कारगिल क्षेत्र में 29 RCC चेक डैम या वीयर बनाने की योजना शामिल है. इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है.
अगर इन योजनाओं को गति मिलती है तो लद्दाख में जल संरक्षण और सिंचाई की तस्वीर बड़े पैमाने पर बदल सकती है. सीमावर्ती गांवों को पानी की बेहतर उपलब्धता मिलेगी और खेती पर निर्भर परिवारों को राहत मिल सकती है.
अब लहलहाएंगे लद्दाख के खेत
उप्शी का यह चेक डैम भले ही आकार में किसी विशाल जलविद्युत परियोजना जैसा नहीं है, लेकिन इसका संदेश बड़ा है. एक तरफ यह सिंधु के किनारे रहने वाले किसानों के लिए पानी का रास्ता खोल रहा है, दूसरी तरफ भारत की सीमावर्ती इलाकों में अपने जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग की रणनीति को भी दर्शाता है.
यानी सिंधु का पानी अब सिर्फ गहरी घाटियों में बहने वाली नदी नहीं रहेगा. भारत की कोशिश है कि उसका अधिक से अधिक लाभ पहले लद्दाख के खेतों और सीमावर्ती लोगों को मिले.

