Last Updated:
India-US Trade Deal : भारत और अमेरिका के बीच करीब एक साल से व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है. वित्त मंत्रालय ने भी 1 अक्टूबर को जारी समीक्षा रिपोर्ट में बताया है कि फिलहाल वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका में ही हैं और वहां के व्यापार प्रतिनिधि से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर कोई सहमति नहीं बन सकी है.
ग्राहम बिल की वजह से भारत-अमेरिका ट्रेड डील पूरी नहीं हो पा रही है.
नई दिल्ली. सालभर से चल रही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बात अब भी अधर में ही दिख रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीग के बीच मुलाकात के बावजूद दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर आम सहमति बनती नहीं दिख रही है. वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिका के हालिया कानून की वजह से भारत के साथ व्यापार डील पूरी करने में बाधा उत्पन्न हो रही है. दोनों देश बातचीत के जरिये किसी अंतरिम समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
वित्त मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को जारी सितंबर महीने की आर्थिक समीक्षा में बताया है कि अमेरिकी कांग्रेस की ओर से पास किए गए ग्राहम बिल की वजह से भारत के साथ व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है. अमेरिका ने हाल में ही लिंडसे ओ ग्राहम बिल पास किया है, जो रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है. अमेरिका का मकसद इन दोनों देशों को तेल से होने वाली कमाई पर प्रतिबंध लगाना है. लेकिन, इसका सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ता दिख रहा है. यही वजह है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है.
ग्राहम बिल से क्या मुसीबत
वित्त मंत्रालय ने बताया कि अमेरिका ने कांग्रेस और राष्ट्रपति की शक्तियों के साथ हाल में ग्राहम बिल को पास कराया था. इस कानून में राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह रूस से क्रूड खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा सकते हैं. भारत अभी अपनी जरूरत का करीब 50 फीसदी तेल रूस से ही खरीदता है और इस टैरिफ के बाद उसका अमेरिका के साथ कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा. इस नियम की वजह से विदेशी निवेश में भी दिक्कत आ सकती है. अभी एआई के निवेश सहित तमाम सेक्टर से विदेशी निवेश भी आता है, लेकिन टैरिफ लगा तो यह निवेश पर भी असर पड़ेगा.
मंत्रालय को किस बात की चिंता
वित्त मंत्रालय ने बताया है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने अपने निवेश को घर में ही बनाए रखने और मैन्युफैक्चरिंग के साथ हथियारों की सप्लाई बढ़ाने समेत तमाम महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तरह-तरह के कानून बना रहे हैं. इसका मतलब है कि भारत सहित अन्य विकासशील देशों को विदेशी पूंजी आकर्षित करने में परेशानी आ सकती है. बावजूद इसके भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का आंकड़ा साफ बताता है कि यहां चालू वित्तवर्ष में एफडीआई अन्य देशों से बेहतर रहा है.
भारत पर भी बढ़ेगा दबाव
वित्त मंत्रालय ने बताया कि भारतीय संपत्तियों और करेंसी पर शॉर्ट टर्म में दबाव बना रहेगा. मंत्रालय का मानना है कि भूराजनैतिक और भूआर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से भारत पर कोरोना महामारी के बाद एक बार फिर दबाव दिखने लगा है. इससे निपटने की तैयारी करना ही पॉलिसी बनाने वालों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. अब अमेरिका ने साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहक के नाम पर बनाए इस कानून के जरिये भारत पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है और उस पर रूस से कच्चे तेल न खरीदने की शर्त रखी है.
एक दिन पहले ही गोयल ने की थी मुलाकात
वित्त मंत्रालय की यह समीक्षा ऐसे समय में सामने आई है, जब वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक दिन पहले ही अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से मुलाकात की थी. गोयल ने यह मुलाकात मिलवॉकी में चल रही जी20 देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक के बाद की थी. हालांकि, दोनों देशों की ओर से ट्रेड डील पर अंतरिम सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक इस पर कोई प्रगति नहीं दिखी है. मुलाकात के बाद गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिकी प्रतिनिधि के साथ बातचीत सार्थक रही है और दोनों मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने पर काम कर रहे हैं.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
और पढ़ें

