महीनों की कड़वाहट और तनाव के बाद, भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक बार फिर पटरी पर लौटते दिख रहे हैं. नई दिल्ली ने एक बड़ा और सकारात्मक कदम उठाते हुए संकेत दिया है कि वह जल्द ही बांग्लादेश में अपनी पूरी वीजा सेवाएं बहाल करने जा रहा है. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के जाने और नई सरकार बनने के बाद इसे दोनों देशों के बीच दोस्ती की नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.
सिलहट में भारत के वरिष्ठ कांसुलर अधिकारी अनिरुद्ध दास ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत बांग्लादेश के लिए फुल वीजा सर्विसेस जल्द शुरू करने पर विचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली सभी कैटेगरी में वीजा संचालन को पूरी तरह से बहाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. दास ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में केवल सीमित कैटेगिरी से आगे बढ़कर सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है. बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट बीडीन्यूज24 के हवाले से दास ने कहा, मेडिकल और डबल-एंट्री वीज़ा अभी जारी किए जा रहे हैं, और यात्रा वीजा सहित अन्य श्रेणियों को फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, द्विपक्षीय संबंध साझा मूल्यों और आपसी सम्मान पर टिके हैं. देश रूपांतोर ने उनके हवाले से कहा, भारत-बांग्लादेश संबंध आपसी सम्मान और आदर पर स्थापित हैं.
महीनों के तनाव के बाद ‘बर्फ’ पिघलने के संकेत
भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध जुलाई-अगस्त 2024 के उस हिंसक आंदोलन के बाद तेजी से बिगड़ गए थे, जिसके कारण अवामी लीग सरकार का पतन हुआ और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़कर भारत भागना पड़ा. 2009 में हसीना के सत्ता में आने के बाद से नई दिल्ली के ढाका के साथ सबसे करीबी संबंध थे. लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद, बांग्लादेश के भीतर यह धारणा बनने लगी कि भारत ने एक ऐसी सरकार का समर्थन किया जो तानाशाह हो गई थी.
यूनुस के वक्त रिश्ते रसातल में
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. इस दौर में भारत-विरोधी बयानबाजी तेज हो गई, कई भारत-विरोधी कट्टरपंथियों को जेल से रिहा कर दिया गया, और भारतीय हितों को निशाना बनाने वाले विरोध प्रदर्शन आम हो गए थे.
भारत ने क्यों सस्पेंड की थीं वीजा सेवाएं?
शेख हसीना के भारत भागने के कुछ ही दिनों बाद, भारी अशांति के बीच 8 अगस्त 2024 को भारत ने पहली बार पूरे बांग्लादेश में अपनी वीज़ा सेवाओं को पूरी तरह से निलंबित कर दिया था. नई दिल्ली ने ‘अस्थिर स्थिति’ और अपने दूतावासों की सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए बांग्लादेश में सभी भारतीय वीज़ा आवेदन केंद्रों को बंद कर दिया था. यह पहला मौका था जब भारत ने पड़ोसी देश में वीज़ा सेवाओं पर ऐसा ‘ब्लैंकेट सस्पेंशन’ यानी पूर्ण प्रतिबंध लगाया था.
बाद में कुछ सेवाओं को आंशिक रूप से बहाल किया गया, लेकिन वे काफी हद तक मेडिकल और डबल-एंट्री वीज़ा तक ही सीमित थीं. 2025 की शुरुआत और मध्य तक वीज़ा जारी करने में धीमी गति से सुधार तो हुआ, लेकिन यह संकट-पूर्व के स्तर से बहुत नीचे रहा. राजनयिक सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगस्त 2024 से पहले जहां रोज़ाना लगभग 8,000 वीज़ा जारी होते थे, वहीं यह संख्या गिरकर लगभग 1,500 रह गई थी.
नवंबर 2025 में कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की मौत से जुड़े ताजा भारत-विरोधी विरोध प्रदर्शनों के बाद एक और बड़ा व्यवधान आया. ढाका, चटगाँव, खुलना और राजशाही में भारतीय वीज़ा केंद्रों को एक के बाद एक बंद कर दिया गया. इसके जवाब में, बांग्लादेश के अंतरिम अधिकारियों ने भी नई दिल्ली, कोलकाता और अगरतला में अपने मिशनों पर वीज़ा सेवाओं को निलंबित कर दिया था.

