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80th Independence Day: आजादी से एक दिन पहले यानी 14 अगस्त 1947 का दिन कई खास घटनाओं का गवाह बना. यह वही दिन था जब भारत के एक सरकारी दफ्तर में पाकिस्तान के झंडे ‘परचम-ए-सितारा-ओ-हिलाल’ को फहरा दिया गया था. वहीं, सालों से मोहम्मद अली जिन्ना के दिल में पल रही मुराद आज पूरी हो गई थी. इसके अलावा, देश के मौजूदा हालात और बेलियाघाट के मंजर को देखने के बाद महात्मा गांधी का दिल दहल उठा था. क्या है पूरा घटनाक्रम, जानने के लिए पढ़ें आगे…
14 अगस्त 1947 की तारीख आजादी से पहले हुए कई अहम घटनाक्रम की गवाह बनी.
80th Independence Day: महज चंद घंटों के बाद भारत को अपनी आजादी और पाकिस्तान को उसका वजूद मिलने वाला था. लेकिन, बंटवारे के दंश से पैदा हुए दंगों की आग ने अभी भी देश के कई शहरों को झुलसा रखा था. वहीं, कोलकाता के बेलियाघाट में मौजूद महात्मा गांधी अभी भी हिंदू-मुस्लिमों के बीच का सौहार्द लौटाने की कोशिशों में जुटे हुए थे. 14 अगस्त की सुबह महात्मा गांधी अपने कुछ कार्यकर्ताओं के साथ बेलियाघाट इलाके में सुबह की सैर के लिए निकले थे. इस दौरान, वहां जो नजारा नजर आया, उसे देखकर बापू का दिल अंदर तक सहम गया.
लेखक प्रशांत पोल ने अपनी पुस्तक ‘ये पंद्रह दिन’ में लिखा है कि महात्मा गांधी के सामने हिंदुओं की जली हुई न दुकानें और घर थे. इन जली हुई दुकानों और मकानों को देखकर महात्मा गांधी कुछ पलों के लिए ठिठक गए. वह उदास मन से उन जले हुए घरों और दुकानों को लगातार देखते रहे. गांधी के साथ चल रहे कार्यकर्ताओं ने उन्हें बताया कि बीते दिनों हुए दंगों में मुस्लिम लीग के गुंडों ने हिंदुओं की इन दुकानों और मकानों को जला दिया था. कुछ देर वहां रुकने के बाद गांधी फिर आगे बढ़ गए. इसी बीच, उन्हें यह भी बताया गया कि उनके आह्वान के बाद बीते दिन कोलकाता से हिंसा की कोई खबर नहीं आई है.
और पूरी पूरी हुई जिन्ना के दिल की मुराद
दूसरी तरफ 14 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे पाकिस्तान के असेंबली हॉल में अफरा-तफरी का माहौल था. अगले कुछ ही पलों में पाकिस्तान को आधिकारिक तौर पर अस्तित्व मिलने वाला था. असेंबली हॉल में लॉर्ड माउंटबेटन अपनी नौसेना की वर्दी में मौजूद थे. आज पहला भाषण उन्हीं का होना था. कुछ मिनटों के इंतजार के बाद जॉन क्रिस्टी ने भाषण की कॉपी माउंटबेटन की तरफ बढ़ा दी. इसके बाद माउंटबेटन ने भाषण पढ़ना शुरू किया. उन्होंने पाकिस्तान के उदय को ऐतिहासिक घटना बताया और कहा कि इतिहास कभी धीमी गति से तो कभी तेजी से आगे बढ़ता है. उन्होंने भविष्य की ओर देखने की बात कही.
भाषण पूरा होने के बाद लॉर्ड माउंटबेटन और मोहम्मद अली जिन्ना खुली छत वाली रॉल्स रॉयस कार में सवार हुए. उन्हें असेंबली हॉल से गवर्नर हाउस तक जुलूस में जाना था. गवर्नर हाउस वही जगह थी, जहां मोहम्मद अली जिन्ना की रिहाइश थी. करीब तीन मील की दूरी तक सड़क के दोनों तरफ लोग खड़े थे. कार की पिछली सीट पर जिन्ना और माउंटबेटन बैठे थे. 21 तोपों की सलामी के बाद कार आगे बढ़ी. दोनों ने करीब तीन मील की यह दूरी लगभग पौने घंटे में पूरी की. पाकिस्तान की इमारतों पर लहराते पाकिस्तानी ‘परचम-ए-सितारा-ओ-हिलाल’ (पाकिस्तान राष्ट्रध्वज) को देखकर मोहम्मद अली जिन्ना के मन की सालों पुरानी मुराद आज पूरी हो गई थी.
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भारत में कहां फहराया पाकिस्तान का परमच?
14 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे श्रीनगर में भी एक अहम घटना हुई. लेखक प्रशांत पोल के अनुसार, शहर के मुख्य पोस्ट ऑफिस के एक अधिकारी ने दफ्तर की छत पर पाकिस्तान का झंडा फहरा दिया था. पोस्ट ऑफिस की छत पर पाकिस्तानी झंडा देखकर वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया. इस पर पोस्ट मास्टर ने तर्क दिया कि श्रीनगर पोस्ट ऑफिस अभी सियालकोट सर्कल के दायरे में आता है और सियालकोट पाकिस्तान का हिस्सा बन चुका है. इसलिए पोस्ट ऑफिस पर पाकिस्तान का झंडा लगाया गया है. इस घटना की जानकारी प्रेमनाथ डोगरा ने महाराजा हरि सिंह के कार्यालय तक पहुंचाई. इसके बाद कुछ अधिकारियों को मुख्य पोस्ट ऑफिस की तरफ भेजा गया. अधिकारियों के समझाने के बाद पोस्ट ऑफिस से पाकिस्तान का झंडा उतार लिया गया.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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