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दिल्ली में जापान को QUAD और G-20 का अहम साथी बताना चीन को साफ संदेश है. उधर, टोक्यो में जापान और इटली की महिला प्रधानमंत्रियों ने मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अरमानों पर नकेल कसी है. ये दोनों घटनाक्रम जाहिर करते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और इटैलियन प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की केमिस्ट्री काम कर रही है.
मोदी-मेलोनी की केमिस्ट्री का जलवा और जापान का साथ, अब भारत बदलेगा वर्ल्ड ऑर्डर.नई दिल्ली: भारत की विदेश नीति इन दिनों एक साथ तीन मोर्चों पर बेहद सक्रिय है. एक तरफ दिल्ली में इंडो-पैसिफिक की ‘रेड लाइन’ साफ होती दिख रही है, जहां चीन की बढ़ती आक्रामकता को संतुलित करने के लिए भारत अपने पार्टनर्स के साथ मजबूत कोऑर्डिनेशन बना रहा है. दूसरी तरफ टोक्यो में ट्रंप फैक्टर को मैनेज करने की कवायद है, ताकि अमेरिका की संभावित हार्ड पॉलिसी शिफ्ट के बावजूद रीजन में स्टेबिलिटी बनी रहे. और तीसरी दिशा यूरोप है, जहां मोदी-मेलोनी की केमिस्ट्री भारत के लिए ट्रेड और स्ट्रैटेजिक डील्स को आगे धकेल रही है. इसी बैकग्राउंड में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 18वें इंडिया-जापान स्ट्रैटेजिक डायलॉग में बड़ा संदेश दे दिया. जयशंकर ने कहा कि भारत क्वाड, संयुक्त राष्ट्र और जी-20 जैसे इंटरनेशनल फोरम्स पर जापान के साथ काम करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है. यह आने वाले सालों की पावर पॉलिटिक्स का क्लियर इंडिकेटर है कि भारत किस साइड खड़ा है और किसके साथ चलना चाहता है.
आखिर भारत-जापान की पार्टनरशिप अब सिर्फ दोस्ती नहीं, स्ट्रैटेजिक ढाल क्यों बन गई?
एस जयशंकर के मुताबिक पिछले दो दशकों में भारत-जापान रिश्ता आर्थिक दायरे से निकलकर ‘व्यापक, अर्थपूर्ण और रणनीतिक’ बन चुका है. यह वही शिफ्ट है जहां ट्रेड के साथ सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल गवर्नेंस भी कनेक्ट हो जाते हैं. जयशंकर ने यह भी याद दिलाया कि इंडो-पैसिफिक को बतौर राजनीतिक और रणनीतिक फ्रेम दुनिया के सामने रखने में जापान के प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक भूमिका रही है. और यही वजह है कि भारत का इंडो-पैसिफिक विजन, जापान के ‘फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक’ अप्रोच से काफी हद तक मेल खाता है. मतलब यह कि चीन के इन्फ्लुएंस को कंट्रोल करने के लिए दिल्ली और टोक्यो का अलाइनमेंट अब ऑप्शन नहीं, जरूरत बन गया है.
क्वाड, यूएन और जी-20 में भारत को जापान की सबसे ज्यादा जरूरत क्यों पड़ रही है?
जयशंकर ने क्वाड, संयुक्त राष्ट्र, जी4 सदस्यता और जी-20 का खास तौर पर नाम लिया. इसके पीछे लॉजिक बिल्कुल प्रैक्टिकल है. क्वाड रीजनल सिक्योरिटी और सप्लाई चेन से जुड़ा है. यूएन और जी4 में भारत के लंबे टर्म रिफॉर्म एजेंडे को सपोर्ट चाहिए. और जी-20 में भारत-जापान जैसे बड़े डेमोक्रेसी ब्लॉक का मैसेज दुनिया के लिए बहुत अहम बन जाता है.
डायलॉग में क्रिटिकल मिनरल्स और एआई जैसे सेक्टर्स पर नई पहल भी सामने आई. खासकर क्रिटिकल मिनरल्स वही ‘सप्लाई चेन हथियार’ हैं जिनके दम पर भविष्य की टेक्नोलॉजी और डिफेंस इंडस्ट्री चलेगी. भारत और जापान का इसमें साथ आना, सीधे तौर पर चीन की माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग मोनोपॉली को चैलेंज करता है.
Pleased to co-chair the 18th India – Japan Strategic Dialogue alongside FM Toshimitsu Motegi in New Delhi today. @motegingOur Special Strategic and Global Partnership is on an upward trajectory and holds immense potential for shaping the world order and de-risking the… pic.twitter.com/x7NdVhrm8f

