गोयनका ने पोस्ट में उस समय को याद किया है जब बेंगलुरु एक शांत शहर था। सुबह कब्बन पार्क में सैर, प्रीमियर पद्मिनी में आराम से ड्राइव और दोपहर किताबों की दुकानों में बिताना आम बात थी। उन्होंने बताया कि कैसे कुछ IIT ग्रेजुएट्स ने IT बूम लाकर शहर को बदल दिया।
क्या लिखा है पोस्ट में?
गोयनका ने एक्स पर लिखा है, ‘एक समय था जब बेंगलुरु एक शांत स्वर्ग था- सुबह कब्बन पार्क में सैर, प्रीमियर पद्मिनी में आराम से ड्राइव और दोपहर पुरानी किताबों की दुकानों में। फिर, कुछ होशियार IITians को अपनी पत्नियों से कुछ शुरुआती पैसे मिले, और अब… हम ‘गार्डन सिटी’ की हवा का आनंद लेने से ज्यादा समय आउटर रिंग रोड पर ट्रैफिक में फंसे रहते हैं। प्रगति, वे इसे कहते हैं!’
यूजर्स ने क्या कहा?
गोयनका की इस पोस्ट पर लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोगों ने नीलेकणि और मूर्ति का बचाव किया है। इन यूजर्स का कहना है कि बेंगलुरु का तेजी से बदलना लाजमी था।
वहीं कुछ ने शहर की खराब व्यवस्था को इसके बुनियादी ढांचे की समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया। @seetharamankc यूजर ने बेंगलुरु के दो फोटो शेयर किए हैं। एक फोटो साल 1991 का है, जिसमें बेंगलुरु में ग्रीनरी और खुली जगह दिखाई दे रही है। वहीं दूसरे फोटो में ऊंची-ऊंची इमारतें हैं।
कई यूजर्स ने की आलोचना
कई यूजर्स ऐसे भी रहे जिन्हें हर्ष गोयनका की यह पोस्ट पसंद नहीं आई। @TheVagabond7 ने लिखा, ‘हा हा, मुझे विश्वास है कि गांव के लोग भी आपकी फैक्ट्री को देखने के बाद ऐसा ही कहेंगे।’ @sanvai यूजर ने लिखा है, ‘मजाक छोड़िए। उनके उद्यम ने मिडिल क्लास के योग्य लोगों के लिए लाखों नौकरियां पैदा की हैं।’

