India
oi-Smita Mugdha
Gujarat
Namo
Shri
Yojana:
गुजरात
सरकार
की
ओर
से
महिलाओं
के
लिए
खास
नमो
श्री
योजना
(Namo
Shri
Yojana)
चलाई
जा
रही
है।
देश
की
चर्चित
योजनाओं
में
से
एक
योजना
यह
भी
है
और
इससे
अब
तक
छह
लाख
महिलाओं
को
लाभ
मिला
है।
इस
योजना
के
तहत
गर्भवती
महिलाओं
और
नई
मांओं
की
देखभाल
के
लिए
आर्थिक
सहायता
दी
जाती
है।
सुरक्षित
मातृत्व
और
बेहतर
स्वास्थ्य
सुविधाएं
देने
के
उद्देश्य
से
राज्य
सरकार
ने
यह
स्कीम
लॉन्च
की
है।
गुजरात
सरकार
की
ओर
से
इस
योजना
को
शुरू
करने
के
पीछे
मातृत्व
को
सुरक्षित
बनाना
है।
साथ
ही,
कमजोर
आर्थिक
पृष्टभूमि
वाली
महिलाओं
को
गर्भावस्था
और
जचगी
के
दौरान
आर्थिक
सहायता
देना
इसका
उद्देश्य
है।
इसके
तहत
सहायता
राशि
सीधे
खाते
में
पहुंचाई
जाती
है।

क्या
है
Gujarat
Namo
Shri
Yojana:?
नमो
श्री
योजना
का
मुख्य
उद्देश्य
गर्भावस्था
से
लेकर
प्रसव
और
उसके
बाद
की
देखभाल
तक
महिलाओं
को
वित्तीय
सहयोग
देना
है।
योजना
के
तहत
पात्र
महिलाओं
को
अलग-अलग
चरणों
में
कुल
₹12,000
तक
की
सहायता
राशि
सीधे
उनके
बैंक
खाते
में
दी
जाती
है।
नमो
श्री
योजना
के
लिए
पात्रता
(Eligibility)
शर्तें
क्या
हैं?
इस
योजना
का
लाभ
लेने
के
लिए
महिलाओं
को
निम्न
शर्तें
पूरी
करनी
होती
हैं:
–
आवेदन
के
लिए
महिला
का
गुजरात
राज्य
की
स्थायी
निवासी
होना
जरूरी
है।
–
महिला
गर्भवती
हो
या
हाल
ही
में
बच्चे
को
जन्म
दिया
हो।
आयु
सीमा
18
वर्ष
या
उससे
अधिक
हो।
–
परिवार
की
वार्षिक
आय
सरकार
द्वारा
निर्धारित
सीमा
से
कम
हो।
गर्भावस्था
का
पंजीकरण
सरकारी
अस्पताल
या
मान्यता
प्राप्त
स्वास्थ्य
केंद्र
में
होना
जरूरी
है।
सरकारी
या
आयकर
दाता
परिवारों
को
इस
योजना
का
लाभ
नहीं
मिलेगा।
नमो
श्री
योजना
के
लिए
आवेदन
कैसे
करें?
(How
to
Apply)
नमो
श्री
योजना
में
आवेदन
की
प्रक्रिया
बेहद
आसान
रखी
गई
है:
आंगनवाड़ी
केंद्र
या
सरकारी
अस्पताल
से
संपर्क
करें।
गर्भावस्था
का
पंजीकरण
कराएं।
आवश्यक
दस्तावेज
जमा
करें,
जैसे
कि
आधार
कार्ड,
बैंक
पासबुक,
स्थायी
निवास
प्रमाण
पत्र,
गर्भावस्था
प्रमाण
पत्र।
स्वास्थ्य
विभाग
की
ओर
से
विवरण
सत्यापन
के
बाद
आवेदन
स्वीकृत
किया
जाता
है।
स्वीकृति
के
बाद
सहायता
राशि
DBT
(Direct
Benefit
Transfer)
के
जरिए
खाते
में
भेज
दी
जाती
है।
कुछ
जिलों
में
यह
सुविधा
ऑनलाइन
पोर्टल
के
माध्यम
से
भी
उपलब्ध
कराई
जा
रही
है।
क्यों
जरूरी
है
यह
योजना?
नमो
श्री
योजना
न
सिर्फ
महिलाओं
को
आर्थिक
राहत
देती
है,
बल्कि
समय
पर
स्वास्थ्य
जांच,
पोषण
और
सुरक्षित
प्रसव
को
भी
प्रोत्साहित
करती
है।
इससे
मातृ
मृत्यु
दर
कम
करने
और
महिला
सशक्तिकरण
को
मजबूती
मिलती
है।

