Last Updated:
Gujarat Back to School Campaign Success: गुजरात सरकार के ‘बैक टू स्कूल’ अभियान के तहत अहमदाबाद ने कमाल कर दिखाया है. शिक्षकों की कठोर मेहनत के दम पर पढ़ाई छोड़ चुके 86% बच्चों को वापस स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है. जानिए टीचर्स ने कैसे घर-घर जाकर माता-पिता को मनाया और बच्चों का भविष्य संवारा.
Ahmedabad Back to School Campaign Success: अहमदाबाद के शिक्षक बच्चों को वापस स्कूल ले आए
नई दिल्ली (Gujarat Back to School Campaign Success). गरीबी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या सामाजिक बंदिशों के चलते कई बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं. लेकिन शिक्षकों का जज्बा और सरकार की नीतियां मिल जाएं तो बड़ी से बड़ी रुकावट भी दूर हो जाती है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है अहमदाबाद के सरकारी और नगर निगम स्कूलों के शिक्षकों ने. गुजरात शिक्षा विभाग के ‘बैक टू स्कूल’ अभियान के तहत अहमदाबाद में पढ़ाई छोड़ चुके 86% बच्चों को वापस स्कूल पहुंचाया गया है.
मई-जून 2026 के दौरान चलाए गए इस अभियान के तहत शिक्षकों ने अपनी छुट्टियों की परवाह किए बिना घर-घर जाकर उन बच्चों को ढूंढ निकाला, जो कभी सब्जी बेच रहे थे तो कभी घर के कामों में लगे थे. माता-पिता को समझाने में समय जरूर लगा कि बच्चा कोई ‘कमाई का जरिया’ नहीं है, बल्कि उसकी असली जगह स्कूल में है. शिक्षकों के इसी अडिग प्रयास का नतीजा है कि आज हजारों मासूम फिर से अपने हाथों में किताबें थामे नजर आ रहे हैं.
अहमदाबाद में दर्ज हुई 86% की शानदार सफलता
शिक्षकों का संघर्ष: घर-घर जाकर माता-पिता को मनाया
लड़कियों और प्रवासी परिवारों के मामले में आईं ज्यादा चुनौतियां
असरवा और जहांगीरपुरा जैसे इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों को अलग तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा. जहांगीरपुरा स्कूल के शिक्षक सुकेतुभाई याग्निक बताते हैं कि उनके 37 ड्रॉपआउट स्टूडेंट्स में से 80% से अधिक लड़कियां थीं. 8वीं के बाद कई पेरेंट्स सोशल रूढ़ियों के कारण लड़कियों को घर के काम (जैसे खाना पकाना या छोटे भाई-बहनों की देखभाल) में लगा देते थे. कई परिवार काम की तलाश में बार-बार अपने रहने का ठिकाना और मोबाइल नंबर बदल लेते थे, जिससे उन्हें ढूंढना बड़ी चुनौती बन गया था.
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को सराहा, मिला सम्मान
शिक्षकों के इस अभूतपूर्व और मानवीय प्रयास की हर तरफ सराहना हो रही है. 22 जुलाई को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने में सफलता हासिल करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया. नगर निगम स्कूल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों के लगातार फॉलो-अप और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी देने से ही यह सफलता संभव हो सकी है. इससे अब हजारों बच्चों का भविष्य अंधेरे में जाने से बच गया है.
About the Author
Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…
और पढ़ें

