गूगल लेंस की मदद से फोटो बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इन दस्तावेजों से उबर पर ड्राइवर आईडी बनाते थे। कंपनी का भरोसा जीतने के लिए पहले ये लोग 8-10 छोटी राइड पूरी करते थे। इसके बाद कंपनी से लोन लेकर लंबी राइड बुक करते थे। बिना सफर किए ही 20-30 किलोमीटर की फर्जी राइड का भुगतान ले लेते थे। एक आईडी ब्लॉक होने पर नई आईडी बनाकर अपना काम जारी रखते थे।
एडीसीपी ग्रेटर नोएडा सुधीर कुमार ने बताया कि आरोपी शातिर किस्म के अपराधी है। इनके द्वारा कई मोबाइलों के माध्यम से उबर एप्लीकेशन पर ड्राईवर की आईडी बनायी जाती है। यह लोग एक ही आधार कार्ड व ड्राईवर लाईसेंस को ऑनलाइन ऐप की मदद से एडिट करके कई फर्जी आधार कार्ड व ड्राईवर लाइसेंस बनाकर फर्जी आधार कार्ड व ड्राइविंग लाइसेन्स को ऊबर ऐप पर अपलोड कर देते है। आधार कार्ड व ड्राइविंग लाइसेन्स पर गूगल लेंस की मदद से फोटो बदल दी जाती थी।
आईडी तैयार होने के बाद इनके द्वारा पहले 8-10 छोटी-छोटी राइड पूर्ण की जाती है। जिसके बाद ये लोग उबर के भरोसेमन्द बन जाते है। कम्पनी द्वारा राइडर को लोन के तौर पर कुछ धनराशि दी जाती है। उसके बाद एक लम्बी राइड रिजर्व/प्री बुकिंग राइड पहले से ही बुक कर देते है। इसके बाद ओटीपी लेकर उबर ड्राईवर वाली आईडी मे डालकर बिना यात्रा किए 20-30 किलोमीटर यात्रा करके कम्पनी से भुगतान ले लिया जाता है। उबर कम्पनी के द्वारा पकड़े जाने के बाद वह आईडी ब्लाक हो जाती है। यह लोग फिर से नई आईडी बनाकर पुनः अपराध कारित करते है।

