राजपरिवार के सदस्यों ने किया पूजन
गणगौर पूजन के समय महारावल द्वारा मां गणगौर की आरती की गई इस दौरान राजपरिवार के सदस्यों सहित समाज के प्रबुद्ध जन भी मौजूद रहे। वहीं पूजन के बाद गणगौर को दुर्ग स्थित दशहरा चौक के चामुंडा माता मंदिर के पास लाया गया। जहां जिलेवासियों ने माता के दर्शन कर कुशलक्षेम की प्रार्थना कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान गोर पूजन करने वाली महिलाओं के साथ ही काफी संख्या में शहरवासी भी मौजूद रहे।
200 साल से हैं इस गणगौर को अपने ईसर का इंतजार
भगवान शिव पार्वती के प्रेम के प्रतीक के रूप में ईसर-गणगौर की पूजा होती है। राजस्थान भर में गणगौर का यह त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है और हर एक जिले में इसका अपना अलग-अलग महत्व है। वहीं भारत-पाक सीमा पर बसे मारवाड़ के सरहदी जिले जैसलमेर की गणगौर अपने आप में ऐतिहासिक घटना के चलते विशेष पहचान रखती है। आज से लगभग 200 वर्ष पहले रियासत काल के समय बीकानेर की सेना यहां के ईसर की प्रतिमा को उठा ले गई थी और गणगौर को यहीं छोड़ गए थी। जिसके चलते जैसलमेर की गणगौर को आज भी अपने ईसर का इंतजार है। इस कारण जैसलमेर में शाही गणगौर की अकेली की ही पूजा होती है। यहां की गणगौर बिना पलक झपकाए आज भी अपने ईसर का इंतजार कर रही है।

