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Facial Recognition Technology Delhi Police Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिल्ली पुलिस के फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) ने 215 वांटेड अपराधियों को पकड़ा है. 26 जनवरी से शुरू हुआ यह एआई-सक्षम स्मार्ट चश्मा सामने आते ही अपराधियों का चेहरा स्कैन कर अलर्ट देता है. स्वदेशी तकनीक से बने इस चश्मे में 65 हजार अपराधियों का डेटा शामिल है. प्रोटेस्ट के बीच आंदोलन की आड़ में मौजूद हर असमाजिक तत्व पर पुलिस की पैनी नजर है ताकि बच्चों के आंदोलन को कोई खराब ना कर पाए.
पुलिस की नजर हर आपराधिक गतिविधि पर है.
नई दिल्ली. भीड़ के बीच छुपा चेहरा और चश्मे में कौंधती लाल रोशनी. क्या आपने कभी सोचा है कि एक काला चश्मा जो देखने में बिल्कुल साधारण लगता है, वह मिनटों में किसी शातिर अपराधी का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलकर सामने रख सकता है? जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुछ ऐसा ही हैरतअंगेज नजारा देखने को मिला, जब दिल्ली पुलिस की इस तीसरी आंख के सामने आते ही 215 वांटेड अपराधी बेनकाब हो गए. दिल्ली पुलिस के इस अत्याधुनिक फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) और एआई-संचालित स्मार्ट चश्मे ने सुरक्षा की दुनिया में तहलका मचा दिया है. प्रदर्शन स्थल की भीड़ में छिपे अपराधियों और आतंकियों की पहचान करने में यह तकनीक पुलिस के लिए एक अचूक हथियार साबित हो रही है.
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और नई दिल्ली जिले की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिल्ली पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. दिल्ली पुलिस के फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) ने प्रोटेस्ट एरिया में पहुंचे 215 वांटेड अपराधियों की पहचान की है. दिल्ली पुलिस अब भीड़भाड़ वाले इलाकों में संदिग्धों, कुख्यात बदमाशों और आतंकियों पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस खास किस्म के स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल कर रही है.
गणतंत्र दिवस पर मिली थी पुलिस को यह थर्ड आई
बीते 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के मौके पर दिल्ली पुलिस के बेड़े में पहली बार इस फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी से लैस खास स्मार्ट चश्मे को शामिल किया गया था. गणतंत्र दिवस की भव्य परेड और अति-विशिष्ट मेहमानों की सुरक्षा में पहली बार इसका सफल इस्तेमाल किया गया था. देखने में साधारण काले चश्मे जैसा दिखने वाला यह गैजेट असल में पुलिस का एक ऐसा अत्याधुनिक हथियार है जो सामने से गुजरने वाले किसी भी अपराधी या आतंकी का चेहरा देखते ही उसकी पूरी कुंडली पलभर में खोलकर रख देता है. यही वजह है कि इसे दिल्ली पुलिस की थर्ड आई यानी तीसरी आंख कहा जा रहा है.

