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अचानक मोबाइल स्क्रीन पर तेज बीप के साथ आया Extremely severe alert सरकार का आपातकालीन संदेश है. इसे दूरसंचार विभाग (DoT) और NDMA ने ‘सचेत’ ऐप के तहत भेजा है. इसका मतलब है कि अगले 3 घंटों में आपके जिले में 70 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार से भयंकर आंधी, भारी बारिश और ओले गिरने का तत्काल खतरा है. यह तकनीक आपदा के समय लोगों को सतर्क कर उनकी जान बचाने के लिए है.
सभी लोगों के फोन पर एक अलर्ट सरकार की तरफ से भेजा गया है.
अचानक आपके मोबाइल से एक डरावनी, तेज साइरन जैसी आवाज गूंजती है. फोन की स्क्रीन पर लाल त्रिकोण के खतरे के निशान के साथ फ्लैश होता है Extremely severe alert! जून की इस उमस भरी रात में अगर आपके या आपके किसी जानने वाले के स्मार्टफोन पर भी ऐसा कोई पॉप-अप मैसेज अचानक तैरने लगा है तो यकीनन एक पल के लिए आपके रोंगटे खड़े हो गए होंगे. इस मैसेज में साफ-साफ शब्दों में लिखा है कि अगले 3 घंटों में आपके जनपद (जिले) के कुछ इलाकों में 70 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भयंकर आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली, मध्यम से भारी बारिश और ओले गिरने वाले हैं. आखिर क्या है अचानक आधी रात को पूरे देश में लाखों स्क्रीन्स पर एक साथ गूंजने वाले इस रहस्यमयी और डरावने अलर्ट का सच? क्या वाकई कोई बड़ी आफत हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है या यह सरकार का कोई गुप्त टेस्ट है? आइए इस पूरी पहेली की तह तक जाते हैं.
इमरजेंसी अलर्ट से जुड़ी 5 मुख्य बातें
• सरकार का ‘सचेत’ कवच: यह कोई वायरस या फेक मैसेज नहीं है बल्कि भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा संयुक्त रूप से भेजा गया एक आधिकारिक आपातकालीन संदेश है.
• अगले 3 घंटों का लाइव काउंटडाउन: इस विशिष्ट अलर्ट का सीधा मतलब है कि मौसम विभाग (IMD) के ‘नाउकास्ट’ (तत्काल मौसम पूर्वानुमान) सिस्टम ने आपके सटीक इलाके में अगले 180 मिनट के भीतर अत्यधिक खतरनाक आंधी-तूफान को डिटेक्ट किया है.
• 100 किमी/घंटा की जानलेवा रफ्तार: मैसेज में साफ चेतावनी है कि हवाओं की रफ्तार 70 से 90 किमी/घंटा से लेकर 100 किमी/घंटा तक छू सकती है. इस रफ्तार में कच्चे मकान, टीन शेड, कमजोर पेड़ और बिजली के खंभे पलक झपकते ही उखड़ सकते हैं.
• सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक का कमाल: इस अलर्ट के लिए आपके फोन में इंटरनेट होना या न होना मायने नहीं रखता. सरकार ने ‘सेल ब्रॉडकास्टिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया है जो बिना नेटवर्क कंजेशन के एक साथ एक पूरे मोबाइल टावर क्षेत्र के सभी फोन्स को सीधे वाइब्रेट और साइरन मोड पर डाल देती है.
• बिजली कड़कने और ओले गिरने का रेड अलर्ट: आंधी के साथ-साथ आकाशीय बिजली गिरने और ओले गिरने की भी गंभीर चेतावनी है. यह अलर्ट सीधे तौर पर आम जनता को यह बताने के लिए है कि वे अगले 3 घंटों के लिए खुले आसमान के नीचे जाने की गलती बिल्कुल न करें.
तकनीक और सुरक्षा
स्मार्टफोन की स्क्रीन पर दिखने वाला यह छोटा सा पॉप-अप बॉक्स असल में भारत की बदलती आपदा प्रबंधन तकनीक का एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी उदाहरण है. पहले के दौर में जब कोई चक्रवात, भयंकर आंधी या बाढ़ आती थी तो लोगों तक सूचना पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो जाती थी और जान-माल का भारी नुकसान होता था. लेकिन आज ‘सचेत’ और सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के जरिए सरकार सीधे आपके हाथ में मौजूद डिवाइस को एक ‘पोर्टेबल साइरन’ में बदल देती है.
साइलेंट फोन भी बज उठेगा
रणनीतिक रूप से देखें तो यह तकनीक ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ (DND) मोड को भी बाईपास कर सकती है यानी अगर आपका फोन साइलेंट पर भी है तो भी यह तेज आवाज में बजेगा ताकि सोते हुए इंसान की भी नींद खुल जाए और वह सतर्क हो सके. 100 किमी/घंटा की रफ्तार वाली आंधी और आकाशीय बिजली भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में हर साल सैकड़ों जानें लेती हैं. ऐसे में यह 3 घंटे पहले मिलने वाली चेतावनी किसी देवदूत से कम नहीं है क्योंकि यह लोगों को अपनी गाड़ियों को सुरक्षित जगह पार्क करने, खिड़की-दरवाजे बंद करने और पशुओं को सुरक्षित बाड़े में बांधने का पर्याप्त समय दे देती है. इसे कॉरपोरेट या सरकारी दखलंदाजी के बजाय एक बेहतरीन ‘लाइफ-सेविंग टूल’ के रूप में देखा जाना चाहिए.
सवाल-जवाब
क्या ‘Extremely severe alert’ आने पर मुझे घबराना चाहिए और क्या इसके लिए इंटरनेट जरूरी है?
बिल्कुल घबराने की जरूरत नहीं है यह केवल आपको सतर्क करने के लिए सरकार की एक व्यवस्था है. इस अलर्ट को प्राप्त करने के लिए आपके फोन में एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन या बैलेंस होना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है. यह सीधे मोबाइल टावर के सिग्नल के जरिए आपके फोन पर फ्लैश होता है.
अगर ऐसा अलर्ट मेरे फोन पर आए, तो मुझे तत्काल क्या सुरक्षा कदम उठाने चाहिए?
मैसेज मिलते ही सबसे पहले अगले 3 घंटों के लिए अपनी सभी बाहरी यात्राएं रद्द कर दें. यदि आप रास्ते में हैं, तो गाड़ी को किसी पक्के मकान या सुरक्षित जगह के पास रोक लें (पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे बिल्कुल न रुकें). घर के सभी नाजुक खिड़की-दरवाजे बंद कर लें और बिजली के भारी उपकरणों के प्लग निकाल दें.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें

