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Election Commission New Rule on Form-6: निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR ड्राफ्ट सूची में नाम न मिलने पर पुराने मतदाता भी बिना किसी डर के फॉर्म-6 भर सकते हैं. पूर्व में मतदाता होने के बावजूद फॉर्म भरना झूठी घोषणा या अपराध नहीं माना जाएगा. धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई नहीं होगी, बशर्ते मतदाता का नाम अन्य किसी क्षेत्र में दर्ज न हो. ECI ने सभी राज्यों को इसका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया है.
चुनाव आयोग ने नए नियम जारी कर दिए हैं. (File Photo)
नई दिल्ली. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने वोटर लिस्ट वाले ड्रामे पर एकदम फुल एंड फाइनल क्लैरिटी दे दी है. स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के चक्कर में जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब हो गए थे, वे इस बात पर भयंकर टेंशन में थे कि अगर दोबारा फॉर्म-6 भरा, तो कहीं सेक्शन 31 के तहत जेल न हो जाए. ECI ने एकदम कूल अंदाज में समझा दिया है कि पुराना वोटर होना और दोबारा फॉर्म भरना कोई क्राइम या झूठी घोषणा नहीं है. दिल्ली हाईकोर्ट की मुहर के बाद आयोग ने साफ कह दिया है कि बिना किसी डर के फॉर्म-6 भरो और अपना नाम जुड़वाओ. बस शर्त इतनी सी है कि आपका नाम किसी दूसरी जगह लिस्ट में नहीं होना चाहिए.
‘फॉर्म-6 भरना कोई गुनाह नहीं’ ECI का बड़ा बयान
इलेक्शन कमीशन ने साफ कर दिया है कि अगर किसी पुराने वोटर का नाम SIR की नई ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं मिल रहा है, तो वह बिना किसी डर के फॉर्म-6 भर सकता है. पहले से वोटर रह चुके लोग जब फॉर्म-6 में यह डिक्लेरेशन देखते हैं कि उनका नाम पहली बार जुड़ रहा है तो वे घबरा जाते थे कि कहीं यह झूठी घोषणा न मान ली जाए. लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ इस आधार पर कि मतदाता पहले भी सूची में था, उसका फॉर्म भरना गलत या झूठा नहीं माना जाएगा.
धारा 31 का नहीं होगा कोई खौफ, दिल्ली हाईकोर्ट की भी मुहर
अक्सर लोगों को डर रहता था कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत उन पर कोई कानूनी कार्रवाई न हो जाए. इस पर ECI ने साफ फरमान जारी किया है कि किसी भी पुराने वोटर के खिलाफ सिर्फ इसलिए धारा 31 के तहत एक्शन नहीं लिया जाएगा क्योंकि उसने SIR या उसके बाद फॉर्म-6 जमा किया है. इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (नीलोत्पल दत्ता बनाम ECI केस) के फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कोर्ट ने साफ किया था कि ऐसा डर पूरी तरह बेबुनियाद है.
बस एक शर्त का रखना होगा खास ध्यान
हालांकि, इसमें एक छोटा सा नियम है जिसे आपको मिस नहीं करना है. शर्त यह है कि मतदाता का नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज नहीं होना चाहिए और उसकी घोषणा पूरी तरह कानून के मुताबिक होनी चाहिए. यानी एक ही जगह वैध तरीके से नाम जुड़वाने के लिए आप बेझिझक फॉर्म-6 का इस्तेमाल कर सकते हैं.
देशभर में होगा धांसू प्रचार
इलेक्शन कमीशन ने देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को यह सख्त निर्देश दे दिया है कि वे इस महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण का स्थानीय भाषाओं में व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि जनता के बीच से सारा कंफ्यूजन पूरी तरह दूर हो सके. तो फिर देर किस बात की, अगर आपका नाम भी ड्राफ्ट लिस्ट से गायब है, तो नियमों के तहत अपना फॉर्म-6 सबमिट करें और फिक्र फ्री हो जाएं.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…

