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Diesel Demand : ग्लोबल मार्केट में भले ही कच्चे तेल की कीमतों में ताबड़तोड़ उछाल आ रहा है, लेकिन घरेलू बाजार में डीजल की डिमांड कम होने का नाम नहीं ले रही है. त्योहारी सीजन में डीजल की डिमांड 25 फीसदी तक बढ़ गई है. कमाल की बात यह है कि तेल कंपनियां आज भी बाजार भाव से कम कीमत पर डीजल बेच रही हैं और उन्हें एक लीटर पर 20 रुपये का नुकसान हो रहा है.
सरकारी तेल कंपनियों को एक लीटर डीजल पर 20 रुपये का नुकसान हो रहा.
नई दिल्ली. ग्लोबल मार्केट में एक तरफ को कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल दिख रहा है और क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास टिका हुआ है. दूसरी ओर, देश में डीजल की खपत भी तेजी से बढ़ रही है. डीजल की डिमांड बढ़ने का सबसे बड़ा कारण त्योहारी सीजन है, क्योंकि माल ढुलाई में डील की खपत ज्यादा होती है. आपको बता दें कि ईरान युद्ध की वजह से ग्लोबल मार्केट में डीजल की कीमतों ने हाहाकार मचा रखा है और अमेरिका तक में इसकी डिमांड और सप्लाई में बड़ा अंतर आ चुका है. ट्रंप तो डीजल के दबाव में आकर रूस से भी तेल खरीदने लगे. इस दौरान भारत में डीजल की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है.
आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े यानी 15 अक्टूबर तक सरकारी तेल कंपनियों द्वारा डीजल की बिक्री बढ़कर 36.5 लाख मीट्रिक टन (करीब 2.7 करोड़ बैरल) हो गई, जो सितंबर की इसी अवधि से लगभग 26.4% और पिछले साल की तुलना में 25.4% अधिक है. इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर फेलो एसपी सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र की मांग के कारण डीजल की खपत बढ़ रही है और त्योहारी सीजन की डिमांड के चलते परिवहन में तेजी आई है.
किसानों में भी बढ़ी डिमांड
भारत में किसान सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले जनरेटर का इस्तेमाल करते हैं. यही कारण है कि खुदरा डीलरशिप ने भी खरीदारी बढ़ा दी है, जिससे ट्रकों की आवाजाही तेज हो गई है. नवंबर में दिवाली तक त्योहारी सीजन के दौरान इन्वेंट्री तैयार करने के लिए भी डीलर्स ने डीजल खरीदने की दर बढ़ा दी है. उन्होंने कहा कि सितंबर 2026 में ट्रकों की बिक्री तेजी से बढ़कर 44,323 यूनिट हो गई, जो अगस्त से 33.57% अधिक है. बाजार भाव से कम दर पर ईंधन की बिक्री हो रही.
कंपनियों को एक लीटर पर 20 रुपये घाटा
सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम आज भी खुदरा उपभोक्ताओं को बाजार भाव से कम दर पर ईंधन बेचती हैं. रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि इन तीनों कंपनियों ने मई से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं और उन्हें एक लीटर डीजल पर करीब 20 रुपये का घाटा सहना पड़ता है. दूसरी ओर, प्राइवेट कंपनी नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कीमतें बढ़ा दी हैं और वैश्विक स्तर पर ज्यादा मुनाफे का लाभ उठाने के लिए ईंधन का निर्यात कर रहे हैं.
बिजली में भी हो रहा डीजल का इस्तेमाल
वशिष्ठ ने कहा कि बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए भी डीजल का इस्तेमाल किया जाता है और उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो ग्राहक निजी कंपनियों से खरीद रहे थे वे अब सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर जा रहे हैं. निजी खुदरा विक्रेताओं के ईंधन स्टेशनों पर बिकने वाला एक लीटर पेट्रोल और डीजल, सरकारी ईंधन कंपनियों की कीमतों की तुलना में क्रमशः 3 रुपये और 5 रुपये महंगा है. 1 से 15 अक्टूबर के दौरान सरकारी कंपनियों की पेट्रोल बिक्री बढ़कर 15.5 लाख टन हो गई, जो पिछले महीने की इसी अवधि से 0.9% की वृद्धि है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

