दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए कार बम ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कई खुलासे किए हैं. एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरे आतंकी मॉड्यूल का मुख्य चेहरा डॉक्टर उमर उन नबी था और धमाके में इस्तेमाल कार को ही कथित तौर पर विस्फोटक वाहन यानी VBIED के तौर पर इस्तेमाल किया गया था. इस धमाके में उमर उन नबी की भी मौत हो गई थी और घटनास्थल से मिले सैंपल की DNA जांच के जरिये उसकी पहचान की गई.
इस मामले में NIA ने पहले 10 आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद जून में तीन और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई. इस तरह मामले में चार्जशीटेड आरोपियों की कुल संख्या 13 हो गई.
पूरी कार को ही बना दिया बम
एनआईए की जांच का सबसे अहम हिस्सा धमाके में इस्तेमाल ह्यूंडै आई20 कार को लेकर है. एजेंसी के मुताबिक, इस कार के मलबे और धमाके वाली जगह से मिले सामान में TATP, अमोनियम नाइट्रेट और पोटैशियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक पदार्थों के निशान मिले हैं.
जांच के दौरान घटनास्थल से मिले मानव अवशेषों और जैविक नमूनों की DNA जांच की गई. एजेंसी के मुताबिक, इन नमूनों की DNA फिंगरप्रिंटिंग से उसकी पहचान उमर उन नबी के तौर पर हुई. इसका मतलब यह है कि धमाके के वक्त उमर उन नबी उसी कार के अंदर मौजूद था.
TATP को कहा जाता है ‘शैतान की मां’
चार्जशीट में TATP की प्रकृति को लेकर भी एक्सपर्ट रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. दस्तावेज के मुताबिक, TATP को एसीटोन पेरॉक्साइड भी कहा जाता है और इसे बेहद संवेदनशील विस्फोटक के तौर पर जाना जाता है. NIA ने दर्ज किया है कि TATP बेहद खतरनाक होता और यह गर्मी, घर्षण और दबाव जैसी परिस्थितियों में कभी भी फट सकता है.
रेड टेप और मेटल पीस ने खोला राज…
चार्जशीट में एक और अहम सबूत का जिक्र है. जांच के दौरान लाल रंग के टेप वाले एक कमांड मैकेनिज्म को बरामद किया गया. इस पर भी विस्फोटक पदार्थों के निशान मिले. एनआईए के मुताबिक, यह डिवाइस IED को दूर से या कमांड के जरिये सक्रिय करने के लिए इस्तेमाल किया गया था. एजेंसी का दावा है कि यही कमांड सिस्टम धमाके वाली कार के पास से बरामद हुआ. यानी जांच का निष्कर्ष यह है कि कार में विस्फोटक लगाया गया था और उसे एक खास कमांड मैकेनिज्म के जरिए सक्रिय किया गया.
उमर इस पूरे आंतकी हमले का मुख्य साजिशकर्ता था, जिसने खुद को धमाके में उड़ा लिया था.
पेन ड्राइव में मिलीं 87 तस्वीरें
इस चार्जशीट में डिजिटल सबूतों का भी जिक्र है. NIA के मुताबिक, एक अन्य आरोपी शाहीन सईद के पास से मिले एक पेन ड्राइव में 87 तस्वीरें बरामद हुईं. एजेंसी का दावा है कि इनमें डॉक्टर मुजम्मिल शकील और शाहीन सईद की हथियारों के साथ तस्वीरें भी थीं.
NIA के अनुसार, ये तस्वीरें आरोपियों के आपसी संपर्क और कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं. एजेंसी ने आरोप लगाया है कि आरोपी अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) और अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा से प्रभावित नेटवर्क से जुड़े थे.
सिग्नल ऐप और कोड नेम का भी जिक्र
जांच एजेंसी ने आरोपियों के बीच डिजिटल संपर्क को लेकर भी कई दावे किए हैं. चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने आपस में बातचीत के लिए सिग्नल ऐप का इस्तेमाल किया था और वे इस पर बातचीत के लिए कोड नेम का इस्तेमाल करते थे. जांच में A-7 की पहचान सिग्नल पर ‘राउलदत्ता’ नाम से किए जाने की बात सामने आई है.
NIA ने आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कथित तौर पर कट्टरपंथी साहित्य और जिहादी सामग्री मिलने का भी दावा किया है. एजेंसी के अनुसार, इन डिजिटल सामग्रियों को आरोपियों की विचारधारा और कथित गतिविधियों के संदर्भ में जांचा गया.
‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ का जिक्र
इस चार्जशीट में ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ और ‘हत्यारा कैसे बनें’ जैसे कथित चरमपंथी मैनुअल का भी जिक्र है. NIA के अनुसार, यह दस्तावेज ‘Inspire Magazine’ के अंक 1 से 10 के जरिए प्रकाशित सामग्री से जुड़ा है. Inspire Magazine को अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला (AQAP) से संबद्ध बताया गया है.
NIA के मुताबिक यह AQAP से जुड़ा मैनुअल है, जिसमें विस्फोटक, हथियार और गुप्त ऑपरेशन से संबंधित दिशा-निर्देश दिए गए हैं. जांच एजेंसी का कहना है कि बरामद प्रोपगैंडा सामग्री में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को ‘शैतानी और अत्याचारी’ बताया गया था और उन्हें हिंसक तरीके से खत्म करने की वकालत की गई थी.
चार्जशीट के मुताबिक, इस दस्तावेज को एक अकेले आतंकी हमलावर के लिए कदम-दर-कदम गाइड के तौर पर पेश किया गया था. इसमें ऐसी गतिविधियों को ‘Open-Source Jihad’ के नाम से प्रचारित किया गया था. एनआईए का आरोप है कि मैनुअल में विस्फोटक, हथियार, वाहनों, आगजनी और गुप्त गतिविधियों से संबंधित ऑपरेशनल जानकारी दी गई थी.
लाल किला ब्लास्ट मामले की जांच के दौरान एनआईए ने आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट और वॉयस लेयरिंग टेस्ट भी कराए. ये परीक्षण नेशनल फॉरेंसिक स्टेट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मदद से किए गए. एनआईए के मुताबिक, जासिर बिलाल वानी, मुजम्मिल शकील, आदिल अहमद राथर , शाहीन सईद, इरफान अहमद वागे, सोएब और बिलाल नासिर के फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट कराए गए.
NIA का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई तथ्यों को छिपाने की कोशिश की और उनके जवाबों में कथित विरोधाभास मिले. जांच एजेंसी ने इन परीक्षणों के नतीजों को भी अपनी केस थ्योरी का हिस्सा बनाया है.
ड्रोन और रॉकेट बनाने की कोशिश
एनआईए की चार्जशीट में आरोपी जसीर बिलाल वानी (A-3) को लेकर कई अहम दावे किए गए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, पूछताछ और दूसरे आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर सामने आया कि जसीर का संबंध मामले के मुख्य आरोपी A-1 यानी उमर उन नबी और अन्य आरोपियों से था और वह कथित तौर पर IED तैयार करने और उनकी टेस्टिंग से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था.
NIA की पहले की जांच में भी जसीर को उमर उन नबी का करीबी सहयोगी बताया गया था. नवंबर 2025 में गिरफ्तारी के समय एजेंसी ने दावा किया था कि जसीर ने कथित तौर पर ड्रोन में तकनीकी बदलाव और रॉकेट तैयार करने की कोशिशों के जरिए हमले की तैयारी में मदद की थी.
चार्जशीट में उसके इंटरनेट पर तकनीकी जानकारी खोजने और कथित तौर पर IED और ड्रोन बनाने से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश का भी दावा किया गया है. एजेंसी के मुताबिक, जसीर बिलाल वानी ने यूट्यूब और चैटजीपीटी के ज़रिये रॉकेट बनाने के तरीके सर्च किए थे. चार्जशीट में यह भी लिखा है कि उसने रॉकेट बना भी लिया था, जिसकी टेस्टिंग बाद में इन्होंने टाल दी थी. इसके अलावा जासीर बिलाल वानी को उमर उन नबी ने 2 ड्रोन भी दिए गए थे.
अल फलाह कॉलेज कैंपस में हुई मुलाकातें
NIA के अनुसार, 2024-25 के दौरान जसीर की आरोपी 4, 5 और 13 से अल फलाह कॉलेज कैंपस में दो से तीन बार मुलाकात हुई थी. एजेंसी का आरोप है कि इन मुलाकातों में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कथित साजिश को तकनीकी मदद देने पर चर्चा हुई. चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि A-5 ने जसीर को A-1 से मिलवाया था. इसके बाद जसीर को IED से संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई गई.
रॉकेट-IED की टेस्टिंग की भी कोशिश…
जांच एजेंसी के मुताबिक, जसीर ने A-1, A-4 और A-13 के साथ मिलकर तैयार किए गए एक रॉकेट IED को काजीगुंड के जंगल में टेस्ट करने की योजना बनाई थी. हालांकि आपसी असहमति के चलते यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी और कथित तौर पर डिवाइस को वहीं नष्ट कर दिया गया.
चार्जशीट में ड्रोन से जुड़ी गतिविधियों का भी जिक्र है. NIA का कहना है कि A-1 ने जसीर को दो ड्रोन दिए थे, जिनका इस्तेमाल उनकी उड़ान क्षमता और रेंज से जुड़ी टेस्टिंग के लिए किया जाना था. इनमें से एक ड्रोन के काम करने के बाद उसे A-1 को वापस कर दिया गया, जबकि खराब ड्रोन को नष्ट किए जाने का दावा किया गया है.
नौगाम थाने के धमाके का भी कनेक्शन
चार्जशीट में नौगाम थाने से जुड़े एक अलग मामले का भी जिक्र है. जांच के दौरान विस्फोटक और उससे संबंधित सामग्री बरामद किए जाने का दावा किया गया था. इन्हीं जब्त वस्तुओं को जांच के लिए नौगाम पुलिस स्टेशन लाया गया था, जहां नवंबर 2025 में एक धमाका हुआ था.
चार्जशीट के मुताबिक, इस घटना में पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की बात दर्ज है. NIA ने इस पूरे घटनाक्रम को भी इस आतंकी मॉड्यूल से जोड़ा है.
पुराना टेरर नेटवर्क फिर खड़ा करना चाहता था उमर
NIA के मुताबिक, उमर उन नबी ने कथित तौर पर एक पुराने आतंकी नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने और भारत में हमलों के लिए मॉड्यूल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालिया रिपोर्ट में NIA ने उसे इस मॉड्यूल का ऑपरेशन प्रभारी बताया है. एजेंसी के अनुसार, उसने हथियारों, फंडिंग, विस्फोटक तैयारियों और दूसरे सदस्यों के बीच संपर्क बनाने में भूमिका निभाई.
जांच एजेंसी का दावा है कि उसके आसपास तैयार हुआ नेटवर्क लंबे समय से गतिविधियों में लगा था और अलग-अलग आरोपियों की भूमिकाएं तकनीकी मदद, संपर्क, संसाधन जुटाने और कथित आतंकी तैयारी से जुड़ी थीं.
उमर की मौत से उसके खिलाफ आरोप हुए खत्म
उमर उन नबी की मौत धमाके में ही हो गई थी. इसलिए उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही उसकी मृत्यु के कारण कानूनी रूप से समाप्त मानी गई है. हालांकि, NIA ने चार्जशीट में उसके कथित नेटवर्क और बाकी आरोपियों की भूमिका को जांच का अहम आधार बनाया है. मामले में बाकी आरोपियों के खिलाफ UAPA, विस्फोटक सामग्री अधिनियम , आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता समेत अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं.
11 मौतों और 29 घायलों के पीछे की पूरी साजिश
10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए इस कार विस्फोट ने राजधानी को दहला दिया था. इस हमले में 11 लोगों की मौत और 29 लोगों के घायल होने की बात सामने आई. NIA की जांच अब सिर्फ धमाके तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इस आतंकी मॉड्यूल, उसके सदस्यों, डिजिटल संचार, फंडिंग, हथियारों, विस्फोटक सामग्री और तकनीकी गतिविधियों की पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है.
चार्जशीट में एजेंसी ने फॉरेंसिक सबूत, डिजिटल सामग्री, बरामदगी और आरोपियों के बीच संपर्क को एक साथ रखकर अपनी केस थ्योरी बनाई है. हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए ये आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं और अंतिम दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी.

