Delhi Budget 2026 LIVE Updates: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली का बजट पेश करना शुरू कर दिया है. सीएम रेखा गुप्ता का यह दूसरा बजट है, जिस पर सभी राजधानीवासियों की नजरें टिकी हैं. दिल्ली विधानसभा में ऐसा बार देखा गया कि मुख्यमंत्री के बजट भाषण के दौरान विपक्ष के सारे नेता नदारद दिखे.
दिल्ली सरकार में वित्त मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में दिल्ली का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) करीब 13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री के नेतृत्व के चलते दिल्ली को आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिला है.
103700 करोड़ रुपये का बजट
सीएम ने बताया कि पिछले साल दिल्ली सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जिसमें पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में 145% की वृद्धि हुई थी. उन्होंने कहा कि केंद्र के सहयोग से ही यह संभव हो पाया है. इस साल दिल्ली सरकार ने 1 लाख 3 हजार 700 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जिसमें करीब 74 हजार करोड़ रुपये टैक्स राजस्व के रूप में आने का अनुमान है.
बजट में कुल खर्च का 70.3% हिस्सा राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि 29.7% हिस्सा पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर खर्च किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने सालाना बजट (Delhi Budget 2026-27) पेश कर हुए कहा, ‘दिल्ली की अपनी एक अलग पहचान है और यह शहर बार-बार गिरकर उठने की सृजन शक्ति रखता है. दिल्ली पर मां दुर्गा का आशीर्वाद है और देश की राजधानी होने के नाते इसने हमेशा अपनी गरिमा बनाए रखी है.’
सरकार का कहना है कि यह बजट दिल्ली को आधुनिक, स्वच्छ और बेहतर कनेक्टिविटी वाला शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण दोनों का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाएगा. इसके तहत प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया जाएगा.
10 फोकस एरिया तय
सरकार ने बजट के लिए 10 प्रमुख फोकस एरिया तय किए हैं, जिनके जरिए राजधानी के समग्र विकास को गति देने की योजना है. दिल्ली के निर्माण और शहरी ढांचे को मजबूत करने के लिए नगर निगम (MCD) को 11,666 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है. इसके अलावा सड़कों और कनेक्टिविटी सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है.
वहीं सरकार का लक्ष्य राजधानी में निर्बाध (Flawless) कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है. इसके लिए विभिन्न विभागों को बड़े बजट आवंटित किए गए हैं:
- पीडब्ल्यूडी (PWD): 5,921 करोड़ रुपये
- शहरी विकास (UD): 8,787 करोड़ रुपये
- ट्रांस-यमुना क्षेत्र: पहले चरण में 300 करोड़ रुपये
- बारापुला प्रोजेक्ट गैप फंडिंग के लिए 210 करोड़
- नजफगढ़ नाले के दोनों तरफ सड़क बनने के लिए 454 करोड़
- विधायक विकास बजट 350 करोड़
- निर्बाध पॉवर सप्लाई के लिए 3942 करोड़ का बजट
अनाधिकृत कॉलोनियों के विकास के लिए 800 करोड़ रुपये और दिल्ली ग्राम विकास के लिए 787 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा अन्य विकास कार्यों के लिए 960 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं.
सड़कों को धूल-मुक्त बनाने की योजना
राजधानी की सड़कों को ‘डस्ट-फ्री’ बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत 750 किलोमीटर सड़कों का एंड-टू-एंड कारपेटिंग किया जाएगा, जिस पर 1,392 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. साथ ही MCD को सड़कों के विकास के लिए अतिरिक्त 1,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के लिए 160 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. वहीं पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फुटओवर ब्रिज के लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
पिछली आप सरकार पर साधा निशाना
सीएम रेखा गुप्ता ने इस दौरान पिछले वर्षों की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति और छोटी सोच के कारण विकास प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा, ‘अब विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को वास्तविक रूप में दिखाई दे रहा है.’ उन्होंने कहा कि पहले ‘फ्रीबीज’ यानी मुफ्त योजनाओं की राजनीति के कारण निवेशक और लोग दिल्ली से दूर हो रहे थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है.
विधानसभा से नदारद विपक्ष के नेता, भड़क गए स्पीकर विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा में ऐसा बार देखा गया कि मुख्यमंत्री के बजट भाषण के दौरान विपक्ष के सारे नेता नदारद दिखे. इसे लेकर स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि बजट जैसे महत्वपूर्ण विषय से विपक्ष का दूरी बनाना न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है, बल्कि यह सदन की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है.
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि बजट केवल सरकार का दस्तावेज नहीं, बल्कि दिल्ली के करीब 2 करोड़ लोगों के भविष्य से जुड़ा अहम विषय होता है. ऐसे में विपक्ष का कार्यवाही से खुद को अलग रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे सदन में आकर अपनी बात रखें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाएं.
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दिल्ली का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) करीब 13.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले 9.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. यह आंकड़ा राजधानी की तेज आर्थिक रफ्तार का संकेत है. वहीं प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर लगभग 5.31 लाख रुपये रहने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय औसत से करीब ढाई गुना अधिक है. हालांकि हाल के वर्षों में इसकी वृद्धि दर कुछ धीमी जरूर रही है, लेकिन कुल मिलाकर दिल्ली की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है.
महिलाओं और बेटियों के लिए खास योजनाएं
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि इस बार के बजट में महिलाओं और बेटियों के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएंगी. मुख्यमंत्री यह साफ कह चुकी हैं कि ‘लखपति बिटिया’ और ‘सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड’ जैसी योजनाओं के जरिये महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया जाएगा. खासकर मुफ्त बस यात्रा जैसी सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं.
दिल्ली में सर्विस सेक्टर का दबदबा
इस आर्थिक सर्वेक्षण से एक बात जो साफ निकलकर आई, वह है दिल्ली की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का दबदबा. सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में सर्विस सेक्टर का योगदान 86.32 प्रतिशत है. इसके मुकाबले उद्योग क्षेत्र का योगदान 12.88 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र का हिस्सा महज 0.80 प्रतिशत है. यही वजह है कि राजधानी की आर्थिक वृद्धि मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र पर निर्भर है.
वहीं दिल्ली विधानसभा में आर्थिक सर्वे पेश करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को एक विश्वस्तरीय, समावेशी और रहने योग्य शहर बनाना है. इसके लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. पिछले बजट में कुल 1 लाख करोड़ रुपये के आवंटन में से 59,300 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं पर खर्च किए गए थे. इसमें परिवहन क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई, जिसे करीब 20 प्रतिशत हिस्सा मिला. इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा, जल आपूर्ति, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों पर भी बड़ा खर्च किया गया.
महंगाई और रोजगार पर भी नजर
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, महंगाई का असर भी दिल्ली में देखा गया है. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2024 के 132.5 से बढ़कर 2025 में 139.4 हो गया, जो 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. ऐसे में बजट में महंगाई से राहत और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उपायों की भी उम्मीद की जा रही है.
आर्थिक सर्वे में सामने आए मजबूत आंकड़ों के बाद अब सभी की नजर आज पेश होने वाले बजट पर है. उम्मीद की जा रही है कि यह बजट न सिर्फ विकास को गति देगा, बल्कि आम जनता और खासकर महिलाओं, छात्रों और व्यापारियों को राहत और नई सुविधाएं भी प्रदान करेगा.

